संघ प्रमुख की पर्यावरण संरक्षण में दिलचस्पी के होंगे अच्छे परिणाम

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पिछले काफी वर्षों से जलवायु पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अनेकों प्रयास किए जा रहे हैं। और अब तो जब से केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई है तब से शुरू किए गए स्वच्छता अभियान और गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने की पहल के चलते इस ओर और भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि अपने देश के गांवों में प्रचलित किदवंती कि ज्यो ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया के समान पर्यावरण प्रदूषण का अभिशाप हमारे जीवन में बढ़ता ही जा रहा है।

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मैकिंसी ग्लोबल इंस्टीटयूट की एक रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक जलवायु खतरे से भारी क्षति होगी। पर्यावरण संतुलन मेरे हिसाब से बनाए रखने में अभी से आम आदमी से लेकर सरकार तक सबको प्रयास करने होंगे। जिसके तहत मेरा मानना है कि सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में निवेश करते समय जो परियोजनाएं बनाई जाएं उनमें पर्यावरण संतुलन का हर प्रकार से ध्यान रखा जाना चाहिए। तथा सरकार इस संदर्भ में जो नियम और कानून बनाती है उसका पालन सबसे एक समान कराने की व्यवस्था हो और दोषी चाहे कोई भी हो अगर वो या उसकी कार्यप्रणाली पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होती है तो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी द्वारा गोरखपुर में चल रहे संघ के कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक समरसता से संबंध कामकाज की भी समीक्षा की जा रही है। जिससे मुझे लगता है कि उनके दिलचस्पी लेने से पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में आशा के अनुकूल सुधार होना चाहिए क्योंकि अनुशासन प्रिय संगठन संघ के कार्यकर्ता अगर इस काम में थोड़ी दिलचस्पी लेंगे तो कहीं न कहीं सुधार तो नजर जरूर आएगा।

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