स्वास्थ्य कार्यकर्ता के हौसलों को सलाम, सरकार करे सम्मान

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आठ किमी बर्फ में चलकर डालिमा कुमारी ने 188 बच्चों को पिलाई पोलियो की दवा

दुनियाभर में पल्स पोलियो जिन जिन देशों में पाया जा रहा है या इसके पैदा होने की संभावनाएं पता चलती है वहां के सरकारें और सामाजिक संगठनों द्वारा इसकी रोकथाम हेतु हर संभव प्रयास शुरू कर दिए जाते हैं। अपने देश में रोटरी क्लब और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सरकार व सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों के सहयोग से पोलियो ड्राॅप पिलाओ अभियान समय समय पर चलाए जाते रहे हैं। गत दिवस पुनः यह अभियान शुरू हुआ। दो बूंद जिंदगी की स्लोगन से युक्त यह अभियान अगर देखा जाए तो सबके लिए एक प्रेरणादायक विषय है क्योंकि जो लोग इससे पीड़ित है। वो और उनके परिवार तथा अन्य इसलिए कि उनके खानदान में किसी को यह ना हो पाए तो धार्मिक आधार पर सोच रखने वाले को छोड़ हर आदमी और परिवार अपने बच्चों को यह दवाई पिलाना चाहता है। मध्य दर्जे और गरीबी रेखा के आसपास जीवन यापन करने वाले अभियान के तहत और कुछ अपने आप को अति विशिष्ट समझने वाले प्राइवेट डाॅक्टरों के माध्यम से पोलिया दवा की दो बूंद पिलाते हैं। और अब तो कुछ सरकार के प्रयास और धार्मिक नेताओं की सीख तथा कुछ लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और अपने क्षेत्र में ख्याति प्राप्त डाॅक्टरों के माध्यम से जो जो विभिन्न कारणों से यह दवाई अपने बच्चों को नहीं पिलाना चाहते थे वो भी अब पिलाने लगे हैं। क्योंकि दुनिया के ज्यादातर मुस्लिम बाहुल्य देशों में भी पोलियो की बीमारी से बचने हेतु यह दवाई पिलाने की चर्चा है। लेकिन चर्चा है कि अभियान कुछ लोगों के लिए दिखावा तो कुछ लोगों के लिए फोटो खिंचाने और मीडिया के माध्यम से नाम चमकाने का भी माध्यम बन गया है। लेकिन अभियान चल रहा है। पोलियो से पीड़ितों की संख्या कम हो रही है तो कुछ लोग इसके लिए अभूतपूर्व प्रयास भी कर रहे हैं और इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में की एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता जो आठ किमी बर्फ में पैदल चलकर बच्चों को पोलियो ड्राॅप्स पिलाने पहुंची के सराहनीय प्रयास को देखा जा सकता है।

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बतातें चलें कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में इन दिनों बर्फबारी के बाद विषम परिस्थितियों बनी हुई है। कठिन चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने बर्फ से लकदक दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचकर सघन पल्स पोलियो अभियान बखूबी निभाया है। स्वास्थ्य विभाग ने पोलियो ड्राप्स पिलाने का 96.4 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। सराज और नाचन के कई दूर दराज के क्षेत्रों में बर्फबारी में जहां जनजीवन ठहरा हुआ है। मंडी एवं कुल्लू जिला की सीमा पर सीएचसी गाड़ागुशैणी के तहत हेल्थ सब सेंटर खुनाची में तीन फीट बर्फ के बीच करीब आठ किलोमीटर पैदल चलकर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता डालिमा कुमारी ने नौनिहालों को दो बूंद जिंदगी की पिलाई। डालिमा के इस साहस की बेहद प्रशंसा की जा रही है। सोशल मीडिया में भी डालिमा का यह प्रयास खूब सराहा जा रहा है। डालिमा ने करीब 188 बच्चों को बर्फ में पैदल चलकर पोलियो ड्राॅप्स पिलाई, बताई जा रही है। बता दें कि हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद ऊपरी इलाकों में अभी भी कई फीट बर्फ है। सड़कें भी कई जगहों में पर ठप हैं। सघन पल्स पोलियो अभियान के तहत रविवार को मंडी जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 75 हजार 975 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 73420 नौनिहालों को पोलियो ड्राॅप्स पिलाई गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जीवानंद चैहान के अनुसार जिला में पोलियो की खुराक पिलाने के लिए 1103 बूथ स्थापित किए गए थे। बस स्टैंड, झुग्गी झोपड़ी, ठेकेदार के पास, भवन निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों की सुविधा के लिए 10 ट्रांजिट पोलियो बूथ लगाए गए थे।। इस अभियान की सफलता के लिए जिलेभर में विभिन्न टीमों में 4416 सदस्य 220 पर्यवेक्षकों की देखरेख में रविवार को प्रातरू 9 बजे से 4 बजे तक बूथों पर पोलियो उन्मूलन की दवा पिलाई गई। उन्होंने कहा कि पल्स पोलियो टीम के सदस्य आज एवं 21 जनवरी को घर-घर जाकर अभियान में छूटे हुए बच्चों को यह दवा पिलाएंगे। उन्होंने कहा कि बर्फ के बीच स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचकर पोलियो ड्राॅप्स पिलाई है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी इस अभियान को सफल बनाने वाले सभी कर्मचारियों की सराहना की है।

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मुझे लगता है कि पोलियो उन्मूलन हेतु चलाए जाने वाले अभियानों को सफलता से पूरा करने और उनके प्रति नागरिकों को आकर्षित करने के लिए मंडी जिले की महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता डालिमा कुमारी को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तो सम्मानित करने के साथ ही उसे ऐसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भी इस संदर्भ में संज्ञान लेकर डालिमा कुमारी को पुरस्कृत करने के साथ साथ प्रमाण पत्र और आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए।

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