फिल्म और टीवी सीरियलों में देवी देवताओं का मखौल उड़ाने वाले हो जाएं सावधान; निमंत्रण पत्रों में पौधों की फोटो छाप वृक्षारोपण को दें बढ़ावा

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आज हम पवित्र लोहड़ी का त्यौहार मना रहे हैं। कल को संक्रांति पर्व मनाएंगे। तो बीते दिवस युवाओं को उठो जागो लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रूको, तुम्हें कोई पढ़ा सकता और ना ही आध्यात्मिक बना सकता। सबकुछ खुद ही सीखना है। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं। खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है फिर भी वह एक ही होगा। बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप होता है। जैसे प्रेरणादायक आगे बढ़ने के संदेश देने तथा शिकागो महासम्मेलन में शून्य पर बोलकर विश्व में देश का मान बढ़ाने और भारत का परचम लहराने वाले महान प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद जी का 157वां जन्मदिवस मना कर चुके हैं। कहने का मतलब यह है कि वर्तमान में धर्म के प्रति आस्था ओैर सम्मान व्यक्त करने के साथ साथ महापुरूषों से प्रेरणा लेने का दौर वर्तमान में चल रहा है।
दोस्तों इस मौके पर मैं आपका ध्यान एक बड़ी प्रचलित कहावत है कि जिसका समाज उसके साथ नहीं होता उसका कोई नहीं होता। दूसरे जो अपने मां बापों का सम्मान नहीं कर सकता वो किसी को नहीं हो सकता। लेकिन हम तो अपने मां बापों का सम्मान और आदर भी करते हैं और अपनों के साथ ही औरों को भी लेकर चलने की कोशिश हमारे द्वारा की जाती है।

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अब वो समय आ गया है जब हम शांति पूर्ण तरीके से अपनी बात चाहे धरना देकर कहें या आंदोलन कर सुनाएं। जो भी अब अपने महापुरूषों और देवी देवताओं के सम्मान के लिए हमें हर संभव प्रयास करने और संयुक्त रूप से आगे आकर बोलना होगा।
यह किसी से छिपा नहीं है कि देश में पहले गांव गली मौहल्लों में नौटंकी के पात्रों द्वारा देवी देवताओं का मखौल बनाया जाता था तो कितनी बार ऐसे आयोजनों में देवी देवताओं के पात्र बने कलाकारों की कारस्तानियों के चलते महापुरूषों के मजाक बनने की स्थिति उत्पन्न होती थी। अब फिल्मों और टीवी सीरियलों में विभिन्न मौकों पर हमारे देवी देवताओं का मखौल उड़ाकर हमारी भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश की जाती है।

मैं कोई कटटरवादी तो हूं नहीं और ना ही मंदिरों में जाकर पूजा पाठ करने वाला हूं। लेकिन जिस प्रकार अपने मां बापों का सम्मान करने के लिए हम हमेशा तैयार रहते हैं उसी प्रकार मेरा मानना है कि देवी देवताओं के सम्मान पर भी आंच नहीं आनी देनी चाहिए क्योंकि इससे बहुसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दिखाए मार्ग पर अहिंसक रूप से चलते हुए हम इस मामले में अब खुलकर आवाज उठानी चाहिए। क्योंकि जब हम सब धर्मोैं का सम्मान करते हुए सदभाव बनाए रखने की कोशिश करते हैं और हमारी कोशिश रहती है कि किसी को ठेस ना पहुंचे तो हमारी भावनाओं को भी आहत करने का अधिकार किसी को नहीं है।
टीवी सीरियल और फिल्मों के माध्यम से हिंदुओं के देवी देवताओं की मजाक उड़ाने की कोशिश करने वाले इनके निर्माताओं में इतनी हिम्मत अन्य जातियों के महापुरूषों और देवी देवताओं के बारे में फिल्म या सीरियत बनाना तो दूर उनके संदर्भ में बोलना भी इनके औकात की बात नहीं लगता है। क्योंकि हम नरमपंथी और उदार सोच के हैं मगर अब ऐसा और नहीं होगा ऐसा। एक बात मैं और कहना चाहता हूं कि हम जो देवी देवताओं के फोटो छपे कैलंेडर या निमंत्रण पत्र पुराने हो जाने या कार्य हो जाने के बाद फेंक देते हैं उन्हें या तो उठाकर रखें या सम्मानजनक रूप से उन्हें शिला दें अथवा अग्नि के सुपुर्द करें जिससे वो इधर उधर पड़े ना फिरें।

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एक बात मैं आप लोगों से और आग्रह करना चाहता हूं कि हम शादी या शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र पर देवी देवताओं के स्थान पर अपने मनपसंद वृक्षों तुलसी नीम आम जामुन के चित्र छापे तो इससे वृक्षारोपण को बढ़ावा मिलेगा दूसरे पर्यावरण संतुलन बनाने में सफलता मिलेगी। जिससे आॅस्ट्रेलिया के जंगलों में जलवायु परिवर्तन के कारण आग लगी जिससे भारी संख्या में जानवर और इंसान मरे। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लग सकती है।
मैं इस आग की घटना में मरे सभी अपने नागरिक भाईयों और जीव जंतुओं की आत्मा की शंांति के लिए भगवान से प्रार्थना करने के साथ ही केंद्र और प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों और विभाग के अधिकािरयों से विशेष आग्रह करना चाहता हूं कि स्कूली पाठयक्रम में देवी देवताओं सहित स्वामी विवेकानंद जी द्वारा जो हमें सदमार्ग दिखाने के संदेश दिए गए हैं। वो छोटे बच्चों से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले नौजवानों को पढ़ाए जाने चाहिए।

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