अब हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा जा सकता

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मैं कोई प्रेरणास्त्रोत व्यक्तित्व का स्वामी अथवा विशेष उपलब्धि प्राप्त व्यक्ति तो नहीं हूं। मगर निरक्षर होने के बावजूद समाज से जो सीखा और देखा उसके आधार पर सिर्फ इतना कह सकता हूं कि अब सोचे क्या होते जब चिड़िया चुग गई खेत वाली ग्रामीण कहावत को साकार करने के बजाए देश और अपने तथा समाज के लिये सोचने का समय आ गया है।
आज हम 71वां गणतंत्र दिवस मना आ हैं। और ऐसा आजादी के बाद से नागरिकों द्वारा हमेशा ही पूर्ण देशभक्ति की भावना से किया जाता है। इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ। जिसके दम पर आज स्वतंत्र माहौल में हम सांस तो ले ही रहें हैं हमे अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। और इन सब के लिये हमारे पूर्वजों द्वारा अपनी कुर्बानी और शाहदत देकर देश को आजाद कराया गया। संविधान का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। लेकिन देखने में आ रहा है कि कुछ लोग इसका अक्षर अक्षर पालन करने के बजाए अपने हिसाब से इसकी व्याख्या कर उपयोग कर रहे हैं। इनमे अगर कुछ निस्वार्थाें में लिप्त नागरिक शामिल है तो कुछ नौकरशाह भी पीछे नजर नहीं आते है। कितने ही मौकों पर देखने को मिलता है कि अपने हिसाब से इनके द्वारा नियमों को लागू कर कभी कभी बेकसूर लोगों को भी जान बूझकर सजा दे दी जाती है और ऐसे अनेकों मामले अगर समीक्षा की जाए तो पूर्व के देखने को मिल सकते हैं। हमे संविधान का पालन करते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिये कि कोई हमारे हितों पर कुठाराघात न कर पाए और किसी भी व्यक्ति को नियमों के चक्रव्यहू में फंसाकर गलत तरीके से उसका उत्पीड़न न हों। गणतंत्र दिवस 2020 हमारे लिये अत्यंत महत्वपूर्ण तो है ही क्योंकि अगले कुछ सालों में देश के कई राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव होने हैं और लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार और जनप्रतिनिधियों का अपना एक अलग उच्च महत्वपूर्ण स्थान होता है। और हमारे यही प्रतिनिधि पूराने नियमों में जनहित में बदलाव करनेे में सक्षम है तो नए नियम कानून बनाने का अधिकार भी इनके पास है। इसलिये यह आवश्यक है कि हम राष्ट्र की एकता और अखंडता भाईचारा और सद्भाव को मजबूत करने और अपने किसी भी रूप में कमजोर भाईयों की संविधान के तहत मदद करने एव सबको बराबर का दर्जा दिलाने के लिये प्रयास करे तथा यह भी तय करे कि आगे देश व प्रदेश में सरकार किसे चलानी हैं। अनेकों मौको पर कितने ही नागरिक यह कहते नजर आते हैं कि सरकार जनहित में काम नहीं कर रही। नेता सही प्रकार से निर्णय नहीं ले रहे हैं। ऐसे लोगों से मेरा आग्रह है कि अब यह उच्चारण बंद किया जाए। और चुनाव में अपना वोट अपनी पसंद के उम्मीदवार को देकर राष्ट्र और जनहित में सोचने वाली सरकार बनाने हेतु खुलकर मतदान करें। मेरा विभिन्न कारणों से नराज उन संगठनों के पदाधिकारियों व नेताओं से जो आये दिन कहते घूमते हैं कि अगर ऐसा नहंी हुआ तो नोटा का बटन दबाया जाएगा से अनुरोध है कि वो अपनी भावना ओर सोच को बदले। नोटा का बटन दबाने की बजाये बढ़चढ़कर मतदान करें। और भले ही जिसको हमने वोट दी हो वो जीते या हारे लेकिन अपनी पंसद के उम्मीदवार को मानसिक रूप से मजबूत करने और उसके साथ इतने लोग है यह दर्शाने के लिये अपने पंसद के उम्मीदवार को वोट करने ओर कराने का निर्णय लें।

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यह मानकर की जो होगा ठीक होगा अब हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठा जा सकता। आओ मिलकर आने वाले चुनाव में कुछ ऐसा माहौल तैयार करें कि हम और हमारे अन्य भाई मतदाता ऐसे उम्मीदवारों को वोट दे जो अपराध रोकने, अपराधियों पर अंकुश लगाने मजलूमों और बेसहारा लोगों का उत्पीड़न रोकने के लिए काम करें तथा अपने मन की आवाज और सोच के अनुसार ऐसे व्यक्ति का साथ दे जो भले ही कम दावे करे लेकिन उन्हे पूरा करते हुए बेरोजगारों को रोजगार किसान व्यापारी और जवानों के साथ साथ आम आदमी और लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ मीडिया के हितों की रक्षा करने की सोचता हों। अपने लिये भी सोचे मगर बुजुर्गाें ओर बच्चों को निःशुल्क दवाईयां शिक्षा मिलें। ऐसे काम उसके द्वारा करने की योजनाएं तैयार की जाए तभी देश व हमारा और सबका भला हो सकता हैं। देश को आजादी मिली और संविधान लागू हुआ। इसके लिये हमारे जिन पूर्वजों ने अपने बलिदान दिये उन सभी नाम और अनाम शहीदों को मैं आज स्वयं व अपने परिवार सहयोगियों और देशवासियों की ओर से मनोअंजलि और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभी से आग्रह करता हूं कि आओ देश को आजाद कराने के लिए अपनी कुर्बानी देने वाले अपने महान पूर्वजों के द्वारा किये गए उल्लेखनीय कार्याें से प्रेरणा लेकर उन पर चलने व जरूरत मन्दो की मदद का संकल्प लें।

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केंद्र सरकार हो या प्रदेश सरकार पक्ष की हो या विपक्ष की जिसकी भी हो अगर वो अच्छा काम कर रही है तो हमें उसकी सराहना करनी चाहिए क्योंकि अगर ठीक को ठीक नहीं कहेंगे तो बुरा कहने का असर भी समाप्त हो जाएगा।

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