आखिर कब तक जानवरों द्वारा मारे जाते रहेंगे नागरिक

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गुलदार मारने वाले ग्रामीणों नहीं प्रशांत की मौत के लिए जिम्मेदार क्षेत्र के वन अधिकारियों के खिलाफ हो एफआईआर

सहारनपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले जनपद बिजनौर के गांव भोगपुर में परिषदीय स्कूल के एक छात्र प्रशांत पुत्र जयप्रकाश पर हमला कर उसे मौत के घाट उतारने वाले गुलदार को ग्रामीणों द्वारा घेरकर मार दिए जाने के बाद नरभक्षी की हत्या का दोषी ठहराते हुए गांववासियों के खिलाफ वन विभाग द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों का जनपद में विरोध शुरू हो गया है। जिसके तहत भाकियू के बैनर तले किसानों ने कोतवाली ब्लाॅक के बाहर निराश्रित गोवंश बांधकर तालाबंदी कर दी और मांग की कि मुकदमे वापस लिए जाएं। तथा वन संरक्षक डीएफओ और रेंज के वनाधिकारियों के खिलाफ हो कार्रवाई। क्योंकि कहीं न कहीं उनकी लापरवाही के चलते प्रशांत की जान गई। बताते चलें कि अभी भी हिंसक जानवरों का आतंक कम नहीं हो पा रहा है। अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव चकफेरी का मार्ग गुलदार ने बाधित किया तो कीरतपुर क्षेत्र के गांव उमरी में भी एक बछड़े को निवाला बनाया गया। इतना ही नहीं लखीमपुर खीरी के बांकेगंज जंगल से निकले बाघ द्वारा हमला कर खेत में चारा लेने गए किसान को मार डाला गया। गांव निवासी मटरूलाल 50 पुत्र चेतराम पीपरिया भूड़ स्थित अपने खेत में सुबह चारा लेने गया था जिसका अधखाया शव पड़ा मिला। वन विभाग के अधिकारी अपने कुछ छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश के तहत वन दारोगा राजू की ओर से नजीबाबाद थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बाद ग्रामीणों मंे पनपने वाले आक्रोश को देख डिप्टी रेंजर शीशपाल सिंह और बीट गार्ड रघुवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। सवाल यह उठता है कि आए दिन गुलदार और बाघ आदि द्वारा जानवरों पर हमला कर उन्हें मार देने और आदमियों को भी खा जाने की घटनाएं सुनने और पढ़ने को खूब मिलती है लेकिन यह कभी नहीं सुना गया कि फला जानवर द्वारा फला व्यक्ति या बच्चे अथवा जानवर पर हमला कर उन्हें मार देने के लिए वन क्षेत्र के अधिकारियों के खिलाफ कोई मजबूत कार्रवाई हुई हो। मगर अगर बच्चे को मार देने के बाद गुलदार को पकड़ने में असफल वन विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई को नजरअंदाज कर ग्रामीणांे ने लाठी डंडो के दम पर उन्हें मार डाला तो उन पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है जिसे किसी भी रूप मेें ठीक नहीं कहा जा सकता। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी समेत मेरा कानून, गृह और सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह है कि मानव जीवन भगवान का दिया अमूल्य उपहार है। अगर नरभक्षी जानवर उन्हें ऐसे ही मारते रहे तो कैसे काम चलेगा। इसलिए सभी वनों के अफसरों और जिला पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि अगर कोई जानवर किसी नागरिक को मार देता है तो उस क्षेत्र के वन अधिकारियों के विरूद्ध थानो में हो एफआईआर। तथा हिंसक हो रहे जानवर को पकड़कर पिंजरे में डाला जाए या जिस प्रकार वो अन्य मूक जानवरों व इंसानों को मार रहा। उसी प्रकार उसे भी ऐसी ही सजा दी जाए। क्योंकि अगर सिर्फ नागरिक मरते रहे तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।

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