जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने में सरकार को नहीं करनी चाहिए देरी

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चीन की जनसंख्या नियंत्रण नीति और अपने देश में उठ रही मांग में दिए जा रहे तथ्यों की समीक्षा कर

देश में बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए वर्तमान समय में गांव देहातों तक इस बिंदु को लेकर विचार गोष्ठियां धरना प्रदर्शन व जागरूकता लाने के लिए पत्रकार वार्ता आयोजित करने के साथ साथ कुछ संगठनों सहित सेव इंडिया फाउंडेशन आदि द्वारा वृहद स्तर पर सांसदों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं और इस संदर्भ में तुरंत कार्रवाई हेतु मांग भी की जा रही है। विधि आयोग ने भी अनुच्छेद 47ए के तहत जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की सिफारिश की है।
प्रधानमंत्री बोले
15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा गया कि छोटा परिवार रखने वाले देशभक्तों की तरह है।
राष्ट्रपति को सौंपा पत्र
13 अगस्त 2018 को 125 सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी को एक याचिका सौंपी और दो बच्चों से संबंधित राष्ट्र नीति को जल्द लागू कराने की मांग की।
कोर्ट ने कहा
वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद चैबे की जनहित की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार को कानून बनाने का निर्देश देने से इंकार कर दिया है। एक खबर के अनुसार कहा गया है कि कानून बनाने का निर्देश देने का काम कोर्ट का नहीं है। जबकि इससे पूर्व 10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग पर केंद्र को नोटिस जारी किया।
भागवत भी बोले
दूसरी तरफ 18 जनवरी 2020 को सरसंघसंचालक मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का मुददा उठाया।
2029 में होगी 158 करोड़ की आबादी
बताते चलें कि सात साल बाद देश की 2027 में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी होगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2027 तक 158 करोड़ की आबादी वाला अपना देश होगा। जो अभी 131 करोड़ के लगभग बतायी जाती है। आंकड़ों की माने तो 2027 में ही चीन की आबादी भारत से पांच करोड़ कम 153 करोड़ तक होने की बात कही जा रही है।
बुजुर्गों की संख्या
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर यह संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है कि इससे बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी और धीरे धीरे युवाओं की संख्या में कमी आ सकती है। होगा क्या यह तो समय ही बताएगा लेकिन फिलहाल जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने वालों की मांग करने वालों के तर्क भी अपने आप में अत्यंत प्रभावी नजर आते हैं।
डाॅ प्रदीप शुक्ला ने कहा
सेव फाउंडेशन से जुड़े प्रसिद्ध दंत रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रदीप शुक्ला का कहना है कि जो कानून बनते हैं और बनाए जातें हैं वो लचीले होते हैं। और लचीलापन ही रखाा जाता है। आज कोई फ्लाईओवर या सड़क बनाने अथवा सौंदर्यीकरण की नीति तय होती है तो उस पर अमल होते होते पांच साल लग जाते हैं। इसलिए जो बजट बनाते समय तय होता है वो बनते बनते कई गुणा बढ़ जाता है लेकिन काम नहीं रूकता और सरकार इसकी व्यवस्था करती है। उसी प्रकार जनसंख्या नियंत्रण हेतु कानून बनाना चाहिए और अगर भविष्य में जरूरत पड़े तो उसमें लचीलापन देकर परिवार में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की भी अनुमति दी जा सकती है। अगर देखें तो डाॅ प्रदीप शुक्ला का कथन पूरी तौर पर सही नजर आता है।
राय शुमारी हो
मेरा मानना है कि इस अहम विषय पर हमारी सरकार को एक बड़े स्तर पर रायशुमारी करानी चाहिए जिसके तहत देश के गांव गली मौहल्लों से लेकर देहात और शहर तक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे विचार किया जाए ओैर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बुलाकर चर्चा हो जिससे भविष्य में देशवासियों को इस मुददे पर धरना प्रदर्शन का सामना ना करना पड़े। इसके उपरांत एक पूर्ण नीति घोषित की जाए।
रही बात जनसंख्या नियंत्रण से देश में बुजुर्गों की तादात बढ़ने की तो आर्थिक सर्वेक्षण 2019 के मुताबिक 2040 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 16 फीसदी तक पहुंच जाएगी और आगे चलकर वर्ष 2050 में यह संख्या 33 करोड़ को पार कर जाने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता और लगता है कि बुजुर्गों की आबादी में इजाफा हो रहा है तो नीति निर्धारण के तहत जनसंख्या नियंत्रण कानून में बदलाव भी किया जा सकता है।
नीतिकारों की समिति बनाकर
जानकारी अनुसार भारत में प्रजनन दर 2.1 प्रतिशत तो चीन में 1.62 प्रतिशत है। वहीं शिशु मृत्यु दर भारत में 31.5 और चीन में 7.1 प्रति एक हजार पर है। वहीं प्रति एक लाख पर भारत में मातृ मृत्यु दर 130 और चीन में 27 है।

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मेरा मानना है कि वक्त की मांग को देखते हुए फिलहाल केंद्र सरकार को चीन की जनसंख्या नियंत्रण की नीति और अपने यहां इस संदर्भ में उठ रही मांग की समीक्षा कर जमीन से जुड़े नीतिकारों की एक समिति बनाकर इस संदर्भ में निर्णय लेते हुए दो बच्चों का कानून एक परिवार में फिलहाल बना ही देना चाहिए।

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