खुली अनुराग कश्यप की पोल; सांड की आंख और मुक्केबाज को सहायता नहीं मिली तो करने लगे विरोध

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यश भारती और दी गई सहयोग राशि ली जाए वापस

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कामों को लेकर सोशल मीडिया पर नागरिकता संशोधन कानून सहित कई बिंदुओं पर विरोध कर रहे फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप जहर क्यों उगल रहे हैं। इसका पता यूपी सूचना विभाग के डायरेक्टर शिशिर सिंह द्वारा लिखे गए एक पत्र के बाद हुआ।
फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से लेकर अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र की मोदी सरकार पर विवादित टिप्पणी करते रहे हैं। उन पर अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पलटवार करना शुरू कर दिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुराग कश्यप की फिल्म को अनुदान न मिलने की वजह से वह अपनी खीझ इस तरह से निकाल रहे हैं।
बीजेपी ने कहा कि पूर्व में यूपी की अखिलेश सरकार ने ‘मसान’ फिल्म के निर्माण के लिए अनुराग कश्यप को 2 करोड़ दिए थे। अब ऐसी ही राशि अनुराग कश्यप ‘सांड की आंख’ और ‘मुक्केबाज’ फिल्म के लिए योगी सरकार से मांग रहे है। भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि अनुराग कश्यप का मोदी द्वेष की वजह का अब पर्दाफाश हो गया है। अनुराग ऐसे ही धन इकट्ठा करते रहे हैं। इसके सर्मथन में भाजपा ने तीन पत्र जारी किए हैं जो सदस्य सचिव, सूचना और संपर्क विभाग, उतरप्रदेश के हैं।

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने मुक्काबाज फिल्म की स्क्रिप्ट को मान्यता दे दी थी और सांड की आंख फिल्म को भी टैक्स फ्री स्टेटस दिया गया था। राज्य सरकार के सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, पिछले वर्ष 16 दिसंबर को प्रदेश सरकार के अंतर्गत एक समिति ने 30 अन्य फिल्मों को ग्रांट के लिए मंजूरी दी थी। इनमें गायों की सुरक्षा पर (गोरक्षा, एक नई पहल), बाबा गोरखनाथ (महिमा बाबा गोरखनाथ की) और बीजेपी की ओर से आजमगढ़ सीट पर लोकसभा उम्मीदवार रहे दिनेश यादव नरहुआ (निरहुआ, लीडर नहीं सेवक) फिल्म भी शामिल थी।
उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी और राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय दोनों ने ही अनुराग कश्यप को निशाने पर लिया था। शलभमणि त्रिपाठी ने कुछ दस्तावेज अटैच करते हुए लिखा था, पिटी हुई फिल्मों के लिए सरकारी भीख न मिली तो अनुराग कश्यप कुंठित हो गालीगलौच पर उतर आए। कुछ सरकारें इनकी फ्लाॅप फिल्मों पर भी करोड़ों देती थीं। यश भारती के पेंशन की शहद चटाती थीं। योगी जी ने मुफ्त पेंशन बंद कर पैसा गरीबों, विधवाओं, किसानों में बांट दिया, यही चिढ़ है इनकी। उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत आने वाली कमेटी द्वारा जारी किए गए एक पत्र के मुताबिक, मुक्काबाज फिल्म की स्क्रिप्ट को 11 जून को अनुमोदन प्रदान किया गया था। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि 11 जून 2018 से दो वर्षों के अंदर इस फिल्म का निर्माण किया जाएगा। यदि इस अवधि में फिल्म नहीं बन पाती है तो इस अनुमोदन को खुद-ब-खुद निरस्त समझा जाएगा। बता दें कि सरकार की इस नीति के तहत यूपी में शूट की जाने वाली फिल्मों को यदि राज्य सरकार मान्यता दे देती है तो 2 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जा सकता है। अक्टूबर 2019 में यूपी सरकार ने ‘सांड की आंख’ फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया था। राज्य सरकार की ओर से जुलाई में 22 फिल्मों के लिए पैसा जारी किया गया था। इसमें ‘अनारकली आॅफ आरा’ फिल्म के लिए 43 लाख रुपये शामिल है। इस फिल्म में स्वरा भास्कर ने किरदार निभाया था, जो लंबे वक्त से बीजेपी पर हमलावर रही हैं। अन्य फिल्मों में सोनू के टिटू की स्वीटी को 41 लाख रुपये, शादी में जरूर आना को 1.15 करोड़ रुपये, मुक्ति भवन को 3.28 लाख रुपये दिए गए थे।

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मेरा मानना है कि आम आदमी से वसूले गए विभिन्न प्रकार से प्राप्त राजस्व के रूप के प्राप्त हुई धनराशि से जो यश भारती प्राप्त व्यक्तियों को 50 हजार रूपये महीना दिए जा रहे हैं। उन पर तत्काल रोक लगाई जाए। और फिर जांच कर यह देखा जाए कि अनुराग कश्यप जैसे धन संपन्न लोगों को पहली बात तो यश भारती पुरस्कार ही क्यों दिया गया और फिर ऐसे लोगों को 50 हजार रूपये प्रतिमाह किस खुशी में दिया जा रहा है। मैं अच्छा काम करने वालों का सम्मान किए जाने का विरोधी नहीं हूं लेकिन समाज हित में अनुराग कश्यप का कोई बहुत बड़ा योगदान नजर नहीं आता है। इसलिए जिन लोगों को अभी तक यश भारती से नवाजा गया है उनके बारे में खोजबीन की जाए और जो वाकई में पात्र है उनको छोड़कर बाकी से सम्मान लिए जाएं वापस। और जनता के खून पसीने से जो 50 हजार रूपये महीना इन्हें पेंशन दी जा रही है। वो पूरी तौर पर बंद होनी चाहिए। तथा जितना पैसा अनुराग कश्यप और उनकी फिल्मों को दिया गया है वो भी वापस लिया जाए क्योंकि यह कोई देशहित में फिल्म नहीं बना रहे मोटा माल कमा रहे हैं।

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