गांधी जी को कोई भी सम्मान देने पर चर्चा ही क्यों, वो सब से ऊपर हैं

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अनिल दत्त शर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एमए बोबड़े की पीठ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सर्वोच्च भारत रत्न सम्मान देने की दायर याचिका पर विचार करने से इंकार करते हुए गत दिवस 17 जनवरी को छपी खबरों के अनुसार स्पष्ट रूप से कहा कि देश की जनता राष्ट्रपिता को किसी औपचारिक सम्मान से भी उच्च सम्मान देती है। इसलिए याचिका कर्ता अपना प्रतिवेदन केंद्र सरकार को सौंपे। हालांकि पीठ ने कहा कि महात्मा गांधी जी को अधिकारिक अलंकरण से सम्मानित करने की याचिकाकर्ता की भावना से सहमत हैं। लेकिन इस संदर्भ में केंद्र सरकार को गांधी जी को अलंकरण से सम्मानित करने का जो निर्देश देने का आग्रह किया गया है। वो संभव नहीं है।

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अगर ध्यान से सोचें तो अपनी इच्छा शक्ति के दम पर अहिंसक रूप से देश को आजाद कराने में सफल रहे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हर सम्मान से ऊपर हैं। इसलिए इस विषय को लेकर कोई चर्चा ही नहीं होनी चाहिए। क्यांेंकि जो राष्ट्र का पिता है उसे सम्मानित कौन करेगा। उनके द्वारा आजाद कराए गए देश में स्थापित संविधान के तहत ही हर कार्य होता है। इसलिए इस मुददे पर कोई चर्चा और बहस ठीक नहीं कही जा सकती।

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