मुख्यमंत्री का निर्णय है साहसिक और सराहनीय, लखनऊ और नोएडा के बाद मेरठ में भी हो लागू

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मुजफ्फरनगर व गाजियाबाद में भी पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू करने की मांग

यूपी के दो शहरों लखनऊ व नोएडा में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था तो लागू हो गई लेकिन इसे लेकर एक प्रकार से वाद विवाद प्रतियोगिता भी शुरू हो गई है। वर्तमान आईएएस और पीसीएस अफसर तो कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन पूर्व आईएएस अधिकारियों द्वारा इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वरिष्ठ पदों पर रहे आईपीएस अधिकारी इसके समर्थन में खड़े हो गए हैं। सही क्या है गलत क्या है यह तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह पक्का है कि मजबूत इरादों वाले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो काम पिछले 50 साल में नहीं हो पाया वो करके दिखा दिया। जिसके लिए उन्हें बधाई तो दी ही जानी चाहिए। हां एक बात जरूर सरकार और पुलिस के आला अफसरों को ध्यान में रखनी होगी कि जिस प्रकार से पुलिस की कार्यप्रणाली ज्यादातर मौकों पर विवादित रहती है उन कारणों पर पूर्ण रूप से वो अंकुश लगाते रहें तो मुझे लगता है कि सीएम का यह प्रयास अत्यंत सफल रहेगा। क्योंकि कोलकाता, दिल्ली आदि देश के जिन प्रदेशों और शहरों में अभी तक यह व्यवस्था लागू हुई हुई वहां इसका अगर कोई बड़ा फायदा नजर नहीं आ रहा है तो नुकसान भी देखने को नहीं मिल रहा है। अगर एक दृष्टि से देखें तो अब आईएएस और आईपीएस अफसर अपने कार्यक्षेत्र में पहले से ज्यादा जागरूक होकर काम करेंगे। क्योंकि वर्तमान में एक तो इस व्यवस्था को लेकर मतभेद दूसरे सोशल मीडिया पर नागरिकों कीे बढ़ती सक्रियता और उनमें आई जागरूकता से छोटी से छोटी बात अब मिनटों में सीएम और पीएम तक पहुंचने के साथ-साथ दुनियाभर में चर्चा का विषय बन जाती है।

लखनऊ और नोएडा को मेट्रोपोलिटन सिटी का दर्जा
मुख्यमंत्री के प्रयासों से यूपी में कुछ जिलों में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने से प्रदेश की राजधानी लखनउ और देश की राजधानी दिल्ली के निकट बसे शहर नोएडा को मेट्रो पोलिटन सिटी बनने का मौका प्राप्त हो गया है। और यह सौभाग्य हासिल करने के लिए मेरठ गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर आदि कई शहर इसमें शामिल होने को तैयार हैं। उनका नंबर कब आता है यह समय ही बताएगा।

वासुदेव पंजानी बने थे सबसे पहले पुलिस कमिश्नर
स्मरण रहे कि जब प्रदेश में कांग्रेस शासित स्व. रामनरेश यादव जी की 1977-89 में सरकार थी तब पहली बार यूपी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का फैसला हुआ था जिसके तहत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वासुदेव पंजानी को कानपुर का पुलिस कमिश्नर बनाने का फैसला लिया गया था लेकिन उनके चार्ज लेने से पहले ही वो वापस हो गया क्योंकि बताते हैं कि आईएएस अधिकारियों की लाॅबी द्वारा इसका जमकर विरोध किया गया था। स्मरण रहे कि वासुदेव को पुलिस कमिश्नर बनाने का निर्णय श्री धर्मवीर सिंह की अध्यक्षता में गठित तीसरे आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था।

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पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने की पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने की सराहना
कई पूर्व पुलिस महानिदेशकॉ ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है। एससी एसटी आयोग के अध्यक्ष पूर्व डीजीपी श्री ब्रजलाल ने कहा है कि आज यह मिथ्य टूट गया है कि यूपी में कभी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू नहीं हो सकती। पूर्व डीजीपी श्री विक्रम सिंह का कहना है कि प्रदेश के शहरों का जिस तरह से विस्तार हुआ है उसमें पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय राज्यमंत्री रहे अब सांसद डाॅ. सत्यपाल सिंह का मानना है कि यूपी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली कारगर साबित होगी। पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता ने इस कदम को प्रदेश सरकार का साहसिक कदम बताया है। तो डीजीपी रहे एके जैन द्वारा पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के लिए योगी सरकार की प्रशंसा की है।

पूर्व मुख्य सचिवों का है मानना
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और इस पद पर अत्यंत लोकप्रिय रहे आज भी जहां जहां डीएम रहे थे वहां के नागरिकों में अपनी महत्वपूर्ण पहचान रखने वाले योगेंद्र नारायण का कहना है कि अगर पुलिस के स्तर से कोई गड़बड़ी होती है तो डीएम से संवाद किया जाता है मगर नई व्यवस्था में यह संवाद खत्म हो जाएगा इसलिए मौजूदा व्यवस्था ज्यादा बेहतर है। जिन शहरों में यह व्यवस्था लागू है वहां के ज्यादा बेहतर परिणाम नहीं है। दिल्ली इसका उदाहरण है। तो पूर्व मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन का कहना है कि डीएम एसएसपी की व्यवस्था में बेहतर चेक एंड बैलेंस होता है। अगर पुलिस कोई गड़बड़ी करती है तो उसकी शिकायत डीएम से होती है। वर्तमान व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। क्राइम कंट्रोल के मामले में डीएम का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।

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ये रहेंगे अधिकार
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 58 व अध्याय-आठ और अध्याय 10 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां भी पुलिस कमिश्नर की होंगी। उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम लगाने का अधिकारी भी कमिश्नर को होगा। धारा 20 सीआरपीसी के तहत पुलिस कमिश्नर के पास कार्यकारी मजिस्ट्रेट के विधिक अधिकार रहेंगे। इसी तरह धारा 21 सीआरपीसी के तहत संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त व सहायक पुलिस आयुक्त को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां मिलेंगी।

पुलिस कमिश्नर के साथ ये भी होंगे
लखनऊ में पुलिस कमिश्नर एडीजी रैंक के सुजीत पांडेय को तैनात किया गया है एवं उनके साथ दो संयुक्त पुलिस कमिश्नर आईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए गए हैं। ’ लखनऊ में डीसीपी (एसपी) रैंक के 10 अधिकारी तैनात किए जाएंगे। ’ नोएडा में पुलिस कमिश्नर एडीजी रैंक के आलोश सिंह को एवं उनके साथ डीआईजी रैंक के दो अपर पुलिस कमिश्नर तैनात किए गए हैं। ’ नोएडा में डीसीपी (एसपी) रैंक के 7 अधिकारी तैनात किए गए हैं। ’ महिला सुरक्षा के लिए लखनऊ एवं गौतमबुद्धनगर में एसपी स्तर की 1-1 महिला पुलिस अधिकारी की भी विशेष रूप से तैनाती की गई है।

नोएडा में दो नए थाने भी बनेंगे
पुलिस कमिश्नर प्रणाली के साथ ही गौतमबुद्धनगर में दो नए थाने भी बनाए जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली में अफसर टीम वर्क के रूप में काम करते हैं। दोनों पुलिस कमिश्नरों को मजिस्ट्रेट के 15 अधिकार भी दिए जा रहे हैं।

आम आदमी के सवाल ..
151 के तहत गिरफ्तारी और जमानत देने का अधिकार से कहीं पुलिस निरंकुश तो नहीं हो जाएगी?
ड्राइविग लाइसेंस रद करने के अधिकार का दुरुपयोग तो नहीं होगा?
चेकिंग के नाम पर मनमानी तो नहीं की जाएगी।
सड़क से अवैध कब्जे हटाने के नाम पर ठेला व गुमटी वालों को परेशान तो नहीं करेगी पुलिस?

साइबर क्राइम रोकने में मिल सकती है सफलता
प्रदेश में हर साल 10 प्रतिशत साइबर अपराध बढ़ने की चर्चा है। जानकारों का मानना है कि लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने से साइबर क्राइम रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। और शायद उससे पूरे प्रदेश में इस प्रकार का क्राइम रोकने में भी सफलता मिल सकती है।
कल्याण सिंह सरकार में मैंने उठाई थी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग
स्मरण रहे कि प्रदेश में जब श्री कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे तब मेरे द्वारा मेरठ सर्किट हाउस में उनसे यूपी के कुछ जिलों में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू करने की मांग के साथ ही केंद्र में गृहराज्यमंत्री के पद पर तैनात पी चिदंबरम से इस संबंध में आग्रह किया गया था। देर से ही सही वर्तमान मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जिस प्रकार से केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी जी ने धारा 370, तीन तलाक, नागरिकता कानून आदि निर्णय लिए उसी प्रकार से जो पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू करने का साहसिक कदम उठाया गया है उसके लिए उन्हें बधाई तो दी जानी चाहिए। चाहे परिणाम कुछ भी निकले फिलहाल लखनऊ और नोएडा में यह व्यवस्था लागू होने से जहां यह दोनों शहर चर्चाओं में आए हैं वहीं यूपी का सम्मान भी बढ़ेगा कि अब यहां भी लागू है पुलिस कमिश्नर व्यवस्था। इसलिए मेरा मानना है कि अगर पुलिस को संसाधन पूर्ण रूप से मिले और सभी वर्गों के अधिकारियों का सहयोग व सीएम साहब का मार्गदर्शन मजबूती से मिला तो यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होगी ही कुछ न कुछ अपराधों में भी कमी जरूर आएगी। यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है।

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मुख्यमंत्री की भावनाओं पर खरे उतरेंगे सुजीत पांडेय और आलोक सिंह
लखनउ के पुलिस कमिश्नर और नोएडा के पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ओैर आलोक सिंह दोनों ही तेज तर्रार ओैर तुरंत निर्णय लेने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं और अपने पूर्व के कार्य क्षेत्रों में काफी अच्छे काम भी इनके द्वारा किए गए हैं जिससे पुलिस का मान सम्मान दोनों बढ़े। आलोक सिंह और सुजीत पांडेय की अब तक की कार्यप्रणाली को देखकर कहा जा सकता है कि सीएम योगी ने इन पर जो विश्वास जताया है उस पर तो यह खरे उतरेंगे ही आम आदमी भी इनकी कार्यप्रणाली से संतुष्ट नजर आएगा।

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