क्यों लगते हैं हर वर्ष पुरस्कारों को लेकर आरोप प्रत्यारोप

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चाहे सचिन तेंदुलकर रहें हो या प्रियंका चोपड़ा, हर साल जब भी कुछ विशेष पुरस्कार दिए जाते हैं तो उनके वितरण और दिए गए व्यक्ति की पात्रता को लेकर विरोध की आवाजें हमेशा ही उठती रहीं है। तथा लोकतंत्र में इसे रोका भी नहीं जा सकता। मगर सरकारी स्तर पर दिए जाने वाले सम्मान और पुरस्कारों का निर्णय करने वाली समिति और मंत्रालय को लगने वाले आरोपों को ध्यान में रखते हुए अब उनमें पारदर्शिता और पात्रता पर ध्यान रखने के साथ साथ इस पर भी विचार करना होगा कि जिन क्षेत्रों में यह सम्मान बांटे जा रहे हैं उनमें पूर्व में उल्लेखनीय कार्य करने वाले महान व्यक्तित्व इससे वंचित तो नहीं रहे। साथ ही जिन लोगों को सम्मान दिए जाते हैं एक बार सार्वजनिक रूप से उनके नाम और उनको दिए जाने वाले पुरस्कारों के बारे में आम जनता या जिस क्षेत्र से वह संबंध है उनमें सक्रिय अन्य लोगों की राय भी जरूर जाननी चाहिए।

क्योंकि एक समाचार पत्र में इससे संबंध छपी खबर जो पढ़ने को मिली उसने कई बिंदुओं पर सोचने के लिए मजबूर किया। इस साल आठ खिलाड़ियों को पद्म अवाॅर्ड से सम्मानित किया जाएगा। शायद यह पहला अवसर है जब इतनी संख्या में खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित अवाॅर्ड से सम्मानित होंगे। ओलंपिक के लिए कोटा हासिल कर चुकीं विनेश फोगाट ने भी इसके लिए आवेदन किया था। लेकिन, लिस्ट में उनका नाम नहीं देखकर उनके पति और पहलवान सोमवीर ने नाराजगी जाहिर की है। विनेश के पति सोमवीर का का कहना है कि विनेश ने पिछले कुछ सालों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए इस बार उम्मीद थी कि उसे पद्म अवाॅर्ड मिल जाएगा। लेकिन लगातार दूसरी बार अनदेखी किए जाने से काफी निराशा हुई। हमें समझ नहीं आ रहा कि विनेश देश के लिए मेडल जीतने की तैयारी करे या फिर अवाॅर्ड पाने के लिए अपनी सांठगांठ बिठाएं। खेल के क्षेत्र में जिन खिलाड़ियों को इस साल अवाॅर्ड मिले हैं उनमें विनेश का दावा भी किसी से कम नहीं है।’

सोमवीर ने कहा कि यह ओलंपिक वर्ष है। अगर विनेश को अभी अवाॅर्ड मिल जाता तो इससे उसका उत्साह और बढ़ता। बकौल सोमवीर, ‘विनेश के पास वल्र्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, काॅमनवेल्थ गेम्स हर तरह के मेडल हैं। वो अब किसी भी टूर्नामेंट से खाली हाथ नहीं लौटती है। दिग्गज पहलवान के पति ने अवाॅर्ड कमिटी पर प्रहार करते हुए कहा, ‘विनेश देश की एकमात्र खिलाड़ी है जिसे दुनिया के प्रतिष्ठित लाॅरियस अवाॅर्ड के लिए नामित किया गया था। इससे जाहिर होता है कि उसके प्रदर्शन की धमक पूरी दुनिया में है। लेकिन, अपने यहां सरकार में बैठे लोगों को शायद विनेश के बारे में पता नहीं है। तभी तो जूरी ने उसे इस अवाॅर्ड के लायक नहीं समझा।’

मशहूर बाॅक्सर एमसी मैरी काॅम को पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। वहीं बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु को पद्म भूषण दिया जाएगा। कुल मिलाकर खेल जगत की 8 हस्तियों को पद्म पुरस्कार से नवाजा जाएगा। सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। 6 बार की वल्र्ड चैंपियन एमसी मैरी काॅम को पद्म विभूषण अवाॅर्ड से नवाजा जाएगा। वह राज्यसभा सांसद भी हैं। मणिपुर की 36 साल की मैरी काॅम ने लंदन ओलिंपिक गेम्स में ब्राॅन्ज मेडल जीता था। वल्र्ड चैंपियन और ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट सिंधु को पद्म भूषण से नवाजा जाएगा। भारतीय महिला फुटबाॅल टीम की पूर्व कप्तान बमबम देवी को पद्मश्री से नवाजा जाएगा। मणिपुर की रहने वाली बमबम देवी को अर्जुन अवाॅर्ड से भी नवाजा जा चुका है।भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान को पद्म श्री के लिए चुना गया है। जहीर की गिनती बाएं हाथ के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में होती है। भारतीय तीरंदाज तरुणदीप राय गोरखा समुदाय से आते हैं। उन्हें भी अर्जुन अवाॅर्ड से नवाजा जा चुका है। भारतीय महिला हाॅकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को भी पद्मश्री के लिए चुना गया है। सिर्फ 15 साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय फील्ड हाॅकी करियर की शुरुआत करने वाली रानी 2010 वलर््उ कप में भाग लेने वाली भारत की सबसे युवा खिलाड़ी थीं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र इलाके की शाहबाद मारकंडा की रहने वाली रानी ने 6 साल की उम्र में हाॅकी खेलना शुरू कर दिया। रानी की टीम ओलिंपिक के लिए क्वाॅलिफाइ कर चुकी है और तोक्यो में उनकी कोशिश अच्छे प्रदर्शन पर होगी।भारतीय शूटर जीतू राय ने 2018 काॅमनवेल्थ गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। उन्हें भारत सरकार की ओर से खेल जगत के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से भी नवाजा जा चुका है। 33 साल के जीतू अर्जुन अवाॅर्डी भी हैं।73 साल के पूर्व हाॅकी प्लेयर एमपी गणेश ने भारत की कप्तानी भी संभाली है। वह भारतीय हाॅकी टीम के कोच भी रहे। उन्हें 1973 में अर्जुन अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया था।

मुझे लगता है कि भविष्य में नए नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने और जो पुराने हैं उन्हें आगे लाने के लिए अगर वो कोई पुरस्कार प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि जो लोग पात्र होने के बाद इनसे वंचित हो जाते हैं उनमें कहीं न कहीं कुंठा की भावना पैदा होती है तथा इनमें से कुछ के विद्रोही हो जाने के चलते पुरस्कारों व उनके वितरण पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं जिन्हें किसी भी रूप से उचित नहीं कहा जा सकता।

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