बिजली चोरी होने पर अधिकारियेां और कर्मंचारियों के खिलाफ भी हो कार्रवाई, नुकसान होने पर अफसरों से की जाए वसूली

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कटिया डालकर या किसी और प्रकार से बिजली चोरी करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई होनी ही चाहिए लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ताअेां के खिलाफ जो एक तरफा कार्रवाई की जाती है या कोशिश की जाती है अथवा विद्युत मजदूर संगठन के पश्चिमांचल प्रभारी श्री महेश शर्मा द्वारा सीएम व प्रदेश के उर्जा मंत्री को शिकायत कर बिजली चोरी करने वालों पर रासुका की कार्रवाई कराने की मांग जो की गई है। उससे तो मुझे कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा।

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मगर सवाल यह उठता है कि जिस प्रकार ताली एक हाथ से नहीं बजती उसी प्रकार बिजली चोरी भी लगातार ऐसे ही नहीं की जा सकती। उसमें कहीं न कहीं बिजली विभाग के क्षेत्र के कर्मचारी या अधिकारी का सहयोग अनिवार्य रूप से होता होगा क्योंकि अगर क्षेत्र में बिजली चोरी हो और कर्मचारियों को पता ना चले तो उसे अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री जी मेरा मानना है कि बिजली चोरी करने वाले नागरिकों के साथ साथ जिस क्षेत्र में यह व्यवस्था पकड़ी जाए वहां के अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ भी वहीं कार्रवाई की जाए जो एक आम आदमी के विरूद्ध की जाए।

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इसके अलावा मुख्यमंत्री जी अधिकारियों की लापरवाही या कर्मचारियों की गलती से विभाग में जो नुकसान होता है तो अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई हो और इसी क्रम में जनपद मेरठ महानगर के विक्टोरिया पार्क में स्थित बिजली के एक गोदाम में लगी आग से जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से की जाए। विभागीय कार्रवाई से इनका कुछ होने वाला नहीं है। क्योंकि जब जनता को दोषी ठहराकर वसूली की जा सकती है तो विभाग के अफसरों से क्यों नहीं।

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