राहुल बजाज के बयान को रचनात्मक रूप से ले सरकार; महिलाओं से छेड़छाड़ और अपराध रोकने व असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने?

26
loading...

मुंबई में गत शनिवार की रात को आयोजित एक अवार्ड समारोह में प्रमुख उद्योगपति राहुल बजाज द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में कहा गया कि आप अच्छा काम कर रहे हैं उसके बाद भी हम खुले तौर पर आलोचना करें इतना विश्वास नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे। मैं गलत हो सकता हूं पर फिर भी हम सब बोलने से बचते हैं। इस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश में भय का माहौल होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि किसी को भी किसी से डरने की जरूरत नहीं है। मीडिया में सरकार की आलोचना होती आई है लेकिन ऐसा आप कह रहे हैं तो हमें इसमें सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि आलोचना सुनी जाती है और उनका जवाब समाधान कर दिया जाता है। जवाब मांगना निजी विचार जाहिर करने से बेहतर है जो समर्थन मिलने पर राष्ट्रहित को नुकसान पहुंचा सकती है।

इसे भी पढ़िए :  NRI कारोबारी सीसी थम्पी खोलेगा कालेधन का राज; रॉबर्ट वाड्रा की बढ़ी मुश्किलें

राहुल बजाज जी का कथन अब राजनीति करने का माध्यम बन गया है। कांग्र्रेस कह रही है कि देश के मौजूदा माहौल में इस तरह की आवाज उठानी चाहिए। पार्टी ने उनकी बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा कि शुक्र है कि कोई तो बोला। दूसरी तरफ भाजपा प्रवक्ता कृष्णगोपाल अग्रवाल का कहना है कि विपक्ष अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ अभियान चला रहा है। राहुल बजाज इसी अभियान के हिसाब से ऐसा बयान दे रहे हैं। तो दूसरी ओर आईटी सेल भाजपा के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट पर लिखा कि राहुल बजाज ने सार्वजनिक मंच पर अपनी बात कही यह इस बात का सुबूत है कि मोदी सरकार आलोचनाओं का स्वागत करती है।

केंद्र और प्रदेशों में स्थित भाजपा की सरकारों ने सत्ता संभालने के बाद धारा 370, अयोध्या फैसले, सर्जिकल स्ट्राइक, तीन तलाक जैसे कई फैसले किए जो ऐतिहासिक हैं और उन्हें हमेशा ही याद किया जाएगा। और यह भी है कि कई क्षेत्रों में काफी अच्छा काम सरकार कर रही है इसलिए दूसरी बार भी भाजपा ने लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र में सरकार बनाई। जो इस बात का प्रतीक है कि नरेद्र मोदी और अमित शाह तथा राजनाथ सिंह आदि के नेतृत्व में अच्छे काम हुए हैं।

इसे भी पढ़िए :  नागरिकता कानून को लेकर फिल्म अभिनेताओं की जंग; नसीरूददीन शाह साहब से आखिर जन्म प्रमाण मांगा किसने है

लेकिन देशभर में विपक्षी विचारधारा रखने वालो राजनीतिक दलों की बात तो छोड़ दें लेकिन जिस प्रकार से व्यापारी वर्ग जो ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के साथ ही रहता है उसके द्वारा कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों को लेकर किए जाने वाले धरने प्रदर्शन और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने वाले ज्ञापनों को देखकर यह कहने में कोई हर्ज नहीं होता है कि अपराध बढ़े हैं और भय का माहौल भी उत्पन्न हुआ है। मगर इसके लिए सरकार दोषी नहीं है। उसका सिर्फ इतना ही दोष कहा जा सकता है कि इन्हें रोकने के लिए तैनात अधिकारियों की कार्यप्रणाली एवं तानाशाही सोच पर अंकुश लगाकर उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं कर पा रही है।

इसे भी पढ़िए :  जस्टिस बोबडे के कथन से; टैक्सों के बोझ से दबते जा रहे आम आदमी को मिल सकती है राहत

दूसरी तरफ हैदराबाद में डा. प्रियंका रेडडी की हदयविदाकर घटना ओर आए दिन खबरों की सुर्खियों में महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले यह महसूस करा रहे हैं कि इस संदर्भ में सरकार को सुधार एवं काम करने की बड़ी आवश्यकता है। इसलिए उसे राहुल बजाज के कथन को गलत तरीके से न लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरह रचनात्मक रूप से लेना चाहिए। क्योंकि अगर सही स्थिति सरकार और प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री तक नहीं पहुंचेगी तो सरकार और भाजपा दोनों के लिए ही यह सही नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

two − two =