शकुंतला ईश्वर सिंह की पुण्य तिथि पर गीता ज्ञान महोत्सव का आयोजन; वक्ताओं ने की उनके कार्याें की सराहना

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मेरठ, 31 दिसंबर (विशेष संवाददाता)। जीवन भर समाज उत्थान महिलाओं की प्रगति के लिए कार्य करने अग्रणी, युवाओं की प्रेरणास्त्रोत बनी रही देश विदेश की संस्कृति का ज्ञान रखने तथा धार्मिक क्षेत्रों में सक्रिय शकुंतला ईश्वर सिंह की गत रविवार को पुण्यतिथि के अवसर पर चैधरी चरण सिंह विवि के बृहस्पति भवन में गीता ज्ञान महोत्सव का आयोजन किया गया। बताते चलें कि विश्व प्रसिद्ध हौम्योपैथ चिकित्सक समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय डा ईश्वर सिंह की पत्नी शकुंतला ईश्वर सिंह के सदकार्याें की इस मौके पर सभी वक्ताओं ने खुलकर चर्चा व प्रशंसा की। और डाॅ. ईश्वर सिंह द्वारा किए जा रहे कार्याें की सराहना की। आयेाजन के लिए डाॅ ईश्वर सिंह ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में सांस्कृतिक गौरव संस्थान के महामंत्री दिनेश त्यागी मौजूद रहे। तो आयेाजन का शुभारंभ पूर्व विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद प्रकाश अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्जवलन द्वारा किया गया। अध्यक्षता अजय गुप्ता और स्वागत अध्यक्ष नीरज मित्तल रहे।

वक्ताओं ने कहा कि घरों में बच्चों को भगवद्गीता जरूर पढ़ाएं। स्कूल-काॅलेजों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया जाना चाहिए। यूएस, ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक भगवद्गीता पढ़ाई जाती है। हमारे देश में हमारी ही भगवद्गीता (भगवान कृष्ण की गाथा) नहीं सुनाई जाती है। ओम पहनना पड़ जाए तो शर्म आती है। अपने धर्म पर जब तक हम खुद गर्व नहीं करेंगे तो दूसरों को क्या बताएंगे। यह विचार गीता ज्ञान महोत्सव में वक्ताओं ने व्यक्त किए। महोत्सव में अयोध्या से आए जगत गुरू महंत परम हंसाचार्य महाराज ने गीता का महत्व समझाया। उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि अमेरिका के बड़े दार्शनिक हुए हैं इमरसन। उनको एक काॅलेज में बाइबिल पढ़ाने के लिए रखा गया तो वह गीता पढ़ाने लगे।

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मैनेजमेंट ने उनसे इसका कारण पूछा तो इमरसन ने कहा कि आपने मुझे क्रिश्चियन बाइबिल पढ़ाने के लिए रखा था, लेकिन मैं यूनिवर्सल बाइबिल पढ़ा रहा हूं। इस पर उनको वहां से हटा दिया गया। इमरसन एक बार इंग्लैंड के बड़े दार्शनिक कारलाई से मिलने गए। कारलाई ने उनसे कहा कि आप हमारे लिए क्या उपहार लाए हैं। इमरसन ने कहा कि अमेरिका के पास तो पूरे यूरोप से लोग आए हैं। हमारी तो कोई संस्कृति ही नहीं है। यह कहकर वह रोने लगे।
उन्होंने कहा कि फिर भी मैं आपके लिए एक मूल्यवान उपहार लाया हूं और उन्होंने गीता भेंट की। इस पर कारलाई ने कहा कि मैंने भी आपके लिए एक उपहार रखा है। उन्होंने भी इमरसन को गीता भेंट की। यह घटना एक पत्रिका में छपी। एक फिलाॅसफी के अध्यापक ने मसूरी में यह पत्रिका पढ़ी। उसके बाद से उन्होंने पाश्चात्य गीता अपना ली। उस शिक्षक का नाम सर्वपल्ली डाॅ. राधाकृष्णनन था। उन्होंने कहा कि रक्त, मांस या हड्डी से हम किसी के धर्म को परिभाषित नहीं कर सकते हैं। लेकिन गीता एक ऐसा मानवीय ज्ञान है, जो कि हर मानव के लिए है। ऐसी गीता कम्युनल नहीं हो सकती।

अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि अन्याय और अत्याचार की अति का परिणाम महाभारत है और महाभारत का आरंभ गीता है। युद्धभूमि में अवतरित हुआ यह अतुलनीय ग्रंथ अपने आप में मानव जीवन के आध्यात्म और मनोविज्ञान का अनुपम ग्रंथ है। यह व्यक्ति या समाज के जीवन का संपूर्ण मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि अहिंसा को समझने से पहले हिंसा को समझो। वेद कहता है कि जिस कार्य से निर्दोषों का हनन होता है, उनकी हत्या होती है, उसे हम हिंसा कहते हैं। जिस पराक्रम, वीरता से हिंसा को समाज से दूर किया जाता है, उसे अहिंसा कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला अखाड़ा की महामंडलेश्वर शिवानी दुर्गा ने कहा कि शास्त्र ही हमारा सबसे बड़ा शस्त्र है। जिसके पास शास्त्र का ज्ञान है उसके पास शस्त्र का ज्ञान होगा ही। क्योंकि उसकी वाणी में शस्त्र पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता को स्कूल-काॅलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत है। सांस्कृतिक गौरव संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री दिनेश चंद्र त्यागी ने कहा की गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि जीवन की कामना रखने वालों में मैं नीति हूं। हमें यह समझ लेना चाहिए कि कोई व्यक्ति या राष्ट्र तभी प्रगति और विजय को प्राप्त कर सकता है जब उसकी नीति सही हो।

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कई राज्यों से पहुंचे महंत-महामंडलेश्वर
सांस्कृतिक गौरव संस्थान के तत्वावधान एवं स्व. शकुंतला ईश्वर सिंह की पुण्य स्मृति में आयोजित महोत्सव में कई शहरों से आए गीता मनीषियों और प्रचारकों ने भाग लिया। महोत्सव में महामंडलेश्वर निलिमानंद, डाॅ. पीयूष गुप्ता, आर्य विदुषी आयुषी राणा ने भी विचार रखे। सत्यकाम इंटरनेशनल की छात्रा नलिनी सिंह ने गीता के श्लोकों का पाठ किया। कार्यक्रम में डाॅ. ईश्वर सिंह, मुख्य संयोजक कपिल त्यागी और मुख्य समन्वयक अमर शर्मा, राजेश निगम, अमर शर्मा, सचिन मित्तल, सुनील चड्ढ़ा, आशीष नारायण त्यागी, शंभू पहलवान, सागर पोसवाल, आशुतोष, विक्रांत शर्मा, वरुण शर्मा, सतेंद्र कुमार, विक्रांत गुप्ता, सुनील भाटी, अजय सोम, दीपक जोशी, विपिन त्यागी, नितीश भारद्वाज आदि भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि म्यांमार से रोहिंग्या यहां आकर रह रहे हैं। आज समय ठीक नहीं है। पुलिस और पीएसी नहीं होती तो पिछले दिनों पता नहीं शहरों का क्या हाल होता। देश में बदलाव की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो खुद का घर नहीं बचेगा। ऐसे में गीता के कुछ श्लोक नहीं बल्कि महाभारत के साथ गीता को पढ़ना। उन्होंने कहा कि अगर गीता को हम सही से पढ़ लेते तो आज देश की यह सूरत नहीं होती। देश की जनगणना को पूर्व की सरकार ने गलत तरह से दिखाया। मैं जानता हूं कि डासना में जिसके 15 बच्चे हैं, उनको 2011 की जनगणना में सिर्फ दो दिखाया गया। उन्होंने कहा कि शहर में इस बार लोकसभा चुनाव का परिणाम क्या होता, यह लोग जानते हैं। किस तरह से भीड़ सड़कों पर आ गई थी, जब चुनाव परिणाम घोषित भी नहीं हुआ था। देश में क्या होने वाला है, यह अभी आप नहीं सोच रहे हैं।

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माननीय पदमश्री डाॅ रविंद्र कुमार, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रोटेरियन गजेंद्र सिंह धामा, वरिष्ठ अधिवक्ता केके पाहवा, ऑनलाइन न्यूज चैनल ताजा खबर डाॅटकाॅम के चेयरमैन व मजीठिया बोर्ड यूपी के सदस्य अंकित बिश्नोई, वरिष्ठ राजनेता समाजसेवी चैधरी यशपाल सिंह, कौमी एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा नेता संदीप गुप्ता एल्फा , मेरठ रिपोर्ट.काॅम और दैनिक केसर खुशबू टाइम्स के संपादक व आरकेबी फाउंडेशन के संस्थापक रवि कुमार बिश्नोई, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार डाॅ. संजय गुप्ता एडवोकेट आदि ने भी शकुंतला ईश्वर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सदकार्याे की सराहना की।

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