आवारा जानवरों से त्रस्त परिवारों के भरण पोषण की व्यवस्था भी कराइए

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मेनका जी यूपी के मेरठ की सुरजकूंड रोड पर हनुमानपुरी निवासी 38 वर्षीय पप्पी ताशे वाले की एक आवारा कुत्ते के काटे जाने से मौत हो गई। अब आपकी इसके परिवार के पालन पोषण ओैर इसके बच्चों को भविष्य सुरक्षित रहे इसकी व्यवस्था कीजिए क्योंकि जब भी कोई मानव किसी जानवर के विरूद्ध कोई कदम उठाता है तो आपका संगठन पीपुल्स फाॅर एनिमल्स सामने आकर खड़ा हो जाता है और जबरदस्ती नागरिकों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग करने लगता है। जिसके चलते अब कोई भी आवारा जानवरों के खिलाफ कुछ करने की नहीं सोचता है।

चर्चा है कि कुछ वर्ष पहले इसी जनपद के गढ़ रोड स्थित एक गांव में कुत्तों ने भयंकर आतंक मचाया था। इसके अतिरिक्त 21.10.19 में कंकरखेड़ा के गोविंदपुरी मोहल्ले में एयरफोर्स के रिटायर्ड अधिकारी समेत छह लोगों पर हमला कर घायल किया। 4.1.19 को जागृति विहार सेक्टर सात में पार्क में खेल रहे पांच साल के बच्चे पर कुत्ते ने हमला किया। 29.12.18 को वार्ड 36 के पार्षद शौकत अली को घर के पास आवारा कुत्तों ने हमला कर घायल कर दिया। 22.6.18 को पांच कुत्तों ने सोतीगंज में एक बच्ची समेत सात लोगों को काटा। 29.3.18 को मेडिकल कालेज में आवारा कुत्ते ने करीब 15 लोगों को काटकर घायल कर दिया 6.12.17 को सनौता में एक सात वर्षीय बच्चे को कुत्तों के झुंड ने नोंचकर बुरी तरह जख्मी कर दिया था। 14.1.17 को घर के बाहर खेल रही दो वर्ष की मासूम को आवारा कुत्तों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। 10.1.17 को पालतू कुत्ते के काटने से रेडियो जाॅकी कपिल स्वामी की मौत हो गई थी।

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अब यह कितना सच है कितना नहीं यह तो एक अलग बात है लेकिन बताया जाता है कि इस जनपद में लगभग छह लाख कुत्ते मौजूद हैं। ओैर महानगर में इनकी संख्या दो लाख के लगभग बताई जाती है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि शहर में कुत्तों का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। यही हाल बंदरों का है। लेकिन इसको पकड़ने के लिए जिम्मेदार वन विभाग और नगर निगम के अधिकारी सिर्फ फाइलों में आंकड़े ही अभी तक तैयार कर रहे हैं। क्योंकि अभी तक कहीं से इनके पकड़े जाने की सूचना तो प्राप्त नहीं हो रही है।

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और अगर ध्यान से देखें तो इनको पकड़ने के लिए अभियान की सोची जाती है तभी देशभर में वन विभाग द्वारा अनुमति देने के नाम पर इतने अड़ंगे लगा दिए जाते हैं जिनको पूरा करना किसी के भी बस में नहीं होता। और अभियान चलने से पहले टांय टांय फिस्स हो जाता है और संबंधित कागजात फाइलों में बंद होकर रह जाते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि मेनका गांधी जी संबंधित अधिकारी तो आपके संगठन द्वारा की जाने वाली कार्रवाईयों से घबराकर कुछ करना नहीं चाहते और कोई तरीका इन आवारा कुत्तों और बंदरों से निपटने का आता नहीं है। देशभर में यह लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं या मौत के घाट उतार रहे हैं। ऐसे में इनके कारण मारे गए या घायल हुए लोगों ेके परिवार आखिर कहां जाएं। और कौन उनकी मदद करेगा। आपसे अनुरोध है कि अब जानवरों से त्रस्त नागरिकों के भरण पोषण आदि की व्यवस्था भी आप कराएं। और भविष्य के लिए इस समस्या का कोई मजबूत समाधान आप खुद ही खोजकर सरकार और संबंधित अधिकारियों को दें जिससे किसी मां का लाल इन जानवरों के कारण उससे ना बिछुड़ पाए।

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