प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान खोंजे हरियाणा, पंजाब व यूपी सरकार

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अन्नदाता धरतीपुत्र पर एफआईआर, जुर्माना और नोटिस देना उचित नहीं

दिल्ली में प्रदूषण के हालात नहीं सुधरे तो आपके टाॅप बाॅस को बुला लेंगे यह चेतावनी माननीय न्यायालय द्वारा दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए व्यक्त किए गए। इस संदर्भ में निर्देश देते हुए अदालत ने मुख्य सचिव से कहा कि आप सड़क की धूल और कचरे से निपट नहीं सकते तो कुर्सी पर क्यों बैठे हैं।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वह पराली जलाने से रोकने के लिए यूपी, हरियाणा और पंजाब के किसानों को प्राथमिकता से मशीनें दें। इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर काबू पाने में विफलता के लिए केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पंजाब हरियाण और उप्र सरकारों को उनके यहां पराली नहीं जलाने वाले छोटे और सीमांत किसानों को सात दिन के भीतर 100 रूपये प्रति कुंतल के हिसाब से वित्तीय सहायता देने के निर्देश दिए गए। यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि यूपी में पराली जलाने से दिल्ली मे प्रदूषण नहंी है। उनका कहना है कि अभी तक 586 किसानों को नोटिस दिया गया है। 166 किसानों पर एफआईआर हुई है और 185 पर जुर्माना लगाया गया है। एक सरकारी बयान में उनके हवाले से कहा गया कि पराली जलाए जाने पर 2500 रूपये से लेकर 15000 रूपये तक का जुर्माना लगाया गया है और पुनरावृत्ति होने पर प्राथमिकी दर्ज कराए जाने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन न करने पर अब तक राज्य में कुल 586 किसानों को नोटिस जारी किए गए।

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मेरा मानना है कि किसानों पर जुर्माना लगाना या उन्हें नोटिस देना अथवा उनके खिलाफ एफआईआर कराना इस समस्या का समाधान नहीं है। इससे पहले से ही परेशान धरती पुत्र अन्नदाता और कई प्रकार की पीड़ा का शिकार हो सकता है। और ऐसे में कहीं महाराष्ट्र के कुछ किसानों जैसी स्थिति इनकी ना हो इस लिए हरियाणा पंजाब व यूपी की सरकारों को हर प्रकार के प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए कोई सरल मार्ग सक्रियता से प्रभावी रूप से तलाशना चाहिए और पीएम मोदी के कहे अनुसार इन्हें मशीनें और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार 100 रूपये प्रति कुंतल का भुगतान किसानों को तुरंत किया जाए जिससे इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। और यह व्यवस्था उन सब जगह लागू हो जहा पराली जलाई जाती है।

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