अब सोशल मीडिया की आलोचना करना छोड़ें हीन भावना से ग्रस्त लोग

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देश में भाईचारा तथा सदभाव मजबूत करने व राष्ट्रीय एकता व देश के विकास में भूमिका निभा रहे

देश में जब भी कोई मुददा चर्चित या ऐसा होता है जिसे लेकर नागरिको द्वारा नाराजगी व्यक्त की जा सकती है तब तब कुछ लोग बिना पानी पीये हाथ धोकर सोशल मीडिया के पीछे पड़ जाते हैं। परिणाम स्वरूप अपने प्रचलन के बाद से दुनियाभर में दोस्तों परिवार के सदस्यों को मिलाने तथा छात्रों का मार्गदर्श करनेए बुजुर्गों को सदमार्ग दिखाने और हर कठिन समय में सबकी मदद करने के लिए तैयार सोशल मीडिया को विवादों में खींचने का एक प्रचलन सा हो गया है।
बीते 9 नवंबर दिन शनिवार को अयोध्या से संबंध मामले में आए फैसले से पहले सोशल मीडिया को इतना विवादित बनाने की कोशिश की गई जिसका कोई जवाब नहीं है। इसके पीछे कारण कुछ भी हो सकते हैं। उन पर फिलहाल कभी और चर्चा करूंगा लेकिन इस दुष्प्रभाव पूर्ण प्रचार के चलते कुछ जिलों में फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर रोक लगाई गई लेकिन कई दृष्टिकोण से प्रसिद्ध मेरठ में सोशल मीडिया चालू रहा लेकिन कहीं भी कोई ऐसी बड़ी घटनाए सोशल मीडिया से संबंध पढ़ने या देखने को नहीं मिली जिससे पता चलता कि इसके माध्यम से कहीं कुछ गलत हुआ है।
सोशल मीडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव अंकित बिश्नोई ने मेरठ के डीएम अनिल ढींगरा को उनके सूझबूझ भरे निर्णय तथा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध न लगाने की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी तथा इस मीडिया के खिलाफ हमेशा दुष्प्रचार करने वालों से आग्रह किया कि दुनिया भर की निगाहें जिस फैसले पर लगी थी वो आया देशभर में शांति स्थाापित रही। सोशल मीडिया पर सब जगह प्रतिबंध नहीं रहा वहां भी भाईचारा और सदभाव मजबूती से नजर आया। चारों तरफ हिंदू मुस्लिम सभी एक दूसरे से गले मिल बधाई देते सोशल मीडिया पर नजर आए। इसलिए अब सब इस मीडिया को लेकर अपनी गलतफहमियां दूर करें और दुष्प्रचार करना बंद करें।

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मेरा मानना है कि किसी के बुरा कहने या दुष्प्रचार करने से यह मीडिया बंद तो होने वाला है ना ही इस पर कोई असर पड़ता है क्योंकि इसकी आलोचना करने वाले भी भरपूर तरीके से इसका उपयोग करते हैं। और अब तो सरकार पुलिस प्रशासन और राजनीतिक दल भी ज्यादा से ज्यादा इसकी प्राप्त सुविधाओं का लाभ उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में मेरा कहना है कि उन कुछ लोगों को जिनकी दुकान इसके आने के बाद बंद हो गई है वो अपनी हीनभावना से उभरकर अब सोचें क्योंकि बिल्ली के कोसे से कौअे नहीं मरा करते उसी प्रकार इनके चिल्पौ करने या शोर मचाने का कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। हां पुलिस अफसरों को इसके माध्यम से बदअमनी फैलाने की कोशिश करने वालों पर जरूर नजर रखनी चाहिए जिससे वो अपनी कोई कारस्तानी ना कर पाए। इस मामले में सोशल मीडिया का कितना बड़ा सहयोग रहा इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है यूपी के डीजीपी के आए बयान से स्पष्ट हुआ कि 37 लोग गिफ्तार किए गए और 3712 मामले दर्ज हुए। इतने बड़े प्रदेश में यह संख्या ना के बराबर ही है ओर फिर इसमें भी सब सोशल मीडिया से संबंधी व्यवस्था शायद नहीं हो। इसलिए यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि बड़े स्तर पर सोशल मीडिया से जुड़े लोग शांति और भाईचारा बनाए रखने के साथ साथ देश के विकास और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं।

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