मथुरा में यह जगह घूमने के लिए हैं सबसे ज्यादा विशेष….

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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान मथुरा का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। यहां पर कई मंदिर और तीर्थस्थान मौजूद हैं और इसलिए पूरे देश से लोग मथुरा में भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए आते हैं। मथुरा बेहद ही पावन स्थान माना जाता है और इसका जिक्र प्राचीन हिन्दू महाकाव्य रामायण में भी किया गया है। अगर आप भी मथुरा घूमने का मन बना रहे हैं तो एक बार इन जगहों पर जरूर होकर आइए−

कृष्ण जन्म भूमि मंदिर मथुरा के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म यहीं हुआ था। यह मंदिर उस कारागार के बाहर बना हुआ है जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। यहां पर हर दिन भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस विशाल मंदिर के परिसर में राधा कृष्ण व श्रीमदभगवद भवन भी है। कहा जाता है इस मंदिर में भगवान कृष्ण की चार मीटर ऊंची शुद्ध सोने की मूर्ति थी जिसे महमूद गजनवी चुरा कर ले गया था।

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द्वारकाधीश मंदिर विश्राम घाट के नजदीक और नगर के राजाधिराज बाजार में स्थित है। चूंकि भगवान कृष्ण को द्वारकाधीश के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस मंदिर का नाम कृष्ण भगवान के इसी नाम पर पड़ा है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तिंया मौजूद है। साथ ही मंदिर में अन्य देवी−देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान हैं। यह मंदिर ना केवल अपनी कलात्मकता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां पर मनाया जाने वाला झूले का त्योहार भी अपनी अलग प्रमुखता रखता है।

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राधा कुंड की अपनी एक धार्मिक मान्यता है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि यदि किसी दंपत्ति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है और वे अहोई अष्टमी अर्थात् कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि को इस कुंड में स्नान करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो सकती है।

इस पर्वत का हिंदू पौराणिक साहित्य में काफी महत्व है। मथुरा आने के बाद भक्तजन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा जरूर करते हैं। गोवर्धन पर्वत राधाकुण्ड से करीबन तीन मील दूर है और जहां से गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा शुरू होती है, वहां पर एक मंदिर भी है, जिसे दानघाटी मंदिर भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथो में इस पर्वत के बारे में कहा गया है कि गोकुल वासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए इस पर्वत को एक बार भगवान कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर उठाया था।

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