कई प्रदेशों में हो सकती है राजनीति उलटफेर, केंद्र में कांग्रेस हुई मजबूत

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शिवसेना परिवार से उद्धव ठाकरे के पहला मुख्यमंत्री बनने से होगी नए दौर की शुरूआत

अभी तक बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, कांगे्रस नेता अहमद पटेल, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी व उनकी पत्नी नीता अंबानी की उपस्थिति में मुंबई के शिवाजी पार्क में तीनों दलों के कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी में महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से महाराष्ट्र के 18 वें और बिना किसी सदन के सदस्य बने 8वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। भाजपा और उसके सहयोगी दल कुछ भी कह लें लेकिन फिलहाल शिवसेना के किसी नेता के रूप में उद्धव ठाकरे द्वारा मुख्यमंत्री की शपथ लिए जाने से इस प्रदेश की राजनीति में नए नए मापदंड कायम होंगे। ऐसा सरकार में शाामिल तीनों दलों के नेताओं का कहना है।

उद्धव ठाकरे के पुत्र नवनिर्वाचित विधायक पुत्र आदित्य ठाकरे और रश्मि ठाकरे के सफल प्रयासों और अपनाई गई सुलझे विचारों की नीति जहां शिवसेना का पहली बार राजनीति में सीधे सीधे शामिल होना और मुख्यमंत्री बनने का सपना साकार हुआ वहीं दोनों परिवारों में आत्मिक सुलह की शुरूआत भी हो गई लगती है। क्योंकि शपथ समारोह से पूर्व राज ठाकरे से मुलाकात यह दर्शाता है कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल अगर किसी ने बड़ी इच्छाएं नहीं पाली तो सफलता से पूरा हो सकता है। 53 साल बाद महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार का पहले मुख्यमंत्री बने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे किसानों की समस्याओं के समाधान, बेरोजगारी दूर करने, महिलाओं के लिए सुविधा, जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, शिक्षा में सुधार, पर्यटन कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने, हर व्यक्ति को सामाहिक न्याय दिलाने, उद्योंगों को बढ़ावा देने की सोच के साथ शपथ ली गई।

धर्म निरपेक्षता के रथ पर सवार हुई महाविकास की इच्छा को लेकर तीनों दलों की तिकड़ी अगर सफलता से सूझबूझ के साथ आगे बढ़ी तो ठाकरे राज का आगाज और इन दलों की एकता देश के कई और प्रदेशों में जल्द ही कोई नया गुल खिला सकती है। तथा केंद्र में शिवसेना और एनसीपी के सांसदों का समर्थन मिलने से लोकसभा में कांग्रेस मजबूत होगी। राज्यसभा में भी उसकी पकड़ काफी मजबूत हो सकती है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार की शुभकामनाओं के बीच छह मंत्रियों के साथ शपथ लेने वाले उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल का शीघ्र बड़ा विस्तार होगा। और ये कहा जा सकता है कि एनसीपी नेता सांसद सुप्रिया सुले ओैर कांग्रेस नेता अहमद पटेल की सूझबूझ तथा सोनिया गांधी और शरद पवार के मार्गदर्शन में मंत्री बनने को लेकर जो थोड़ी बहुत छटपटाहट नजर आ रही है उसका बिना कोई असर आए हुए समाधान होगा। ओैर पात्र विधायकों को प्रतिनिधित्व तो मिलेगा ही, अन्य विधायकों को निगम और सरकार में मौजूद अन्य जनहित के पद प्राप्त होने से असंतोष समाप्त भी हो सकता है।

27 जुलाई 1960 को जन्मे उद्धव ठाकरे पेशेवर फोटोग्राफर बनना चाहते थे। लेकिन पारिवारीक राजनीति और हिंदूवादी सोच को आगे बढ़ाने के लिए समय की मांग को समझते हुए अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाते बनाते खुद मुख्यमंत्री बन गए और शायद फिलहाल महाराष्ट्र की जनता और विकास के लिए यही ठीक भी था।

एनसीपी के छगन भुजबल, शिवसेना के जयंत पाटिल, एकनाथ शिंदे, कांग्रेस के बाला साहेब थोराट एवं नितिन राउत ने शपथ ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, भाजपा सांसद पूनम महाजन, सपा सांसद जया बच्चन, एनसीपी नेता अजित पवार, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव आदि ने भी आगे बढ़कर उद्धव ठाकरे को अपनी बधाई दी। जो इस बात का प्रतीक है कि आवश्यकता पड़ी तो भविष्य में संपूर्ण विपक्षी नेताओं का समर्थन उद्धव ठाकरे को मिल सकता है।

शिवसेना संस्था बाला साहेब ठाकरे एक ऐसा नाम महाराष्ट्र की राजनीति में सुनने को मिलता रहा जिसको सभी आदर और सम्मान देते थे। अब इस परिवार के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन चुके हैं। तो उनके पुत्र आदित्य ठाकरे पहली बार विधायक के अलावा रश्मि ठाकरे, जयदेव ठाकरे, राज ठाकरे, तेजस ठाकरे सरकार की सफलता के लिए समझा जाता है कि हर संभव प्रयास करेंगे।

2002 में शिवसेना के मुख्य प्रचारक से शुरू होकर उद्धव ठाकरे बीएमसी चुनावों में बड़ी जीत दिलाई। 2003 में शिवसेना के कार्यवाहक अध्यक्ष बने। 2006 में सामना के मुख्य संपादक तथा 2012 में बाल ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना का नेतृत्व संभाला। 2013 में अध्यक्ष बने और 2019 में कांग्रेस, शिवसेना तथा एनसीपी गठबंधन के नेता तथा अब महाराष्ट्र के सीएम बने। अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी रायगढ़ के किले के विकास आदि के लिए 20 करोड़ रूपये मंजूर किए गए। जिसकी खुले दिल से सभी को सराहना करनी चाहिए।

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