अपने आप को सत्ता के निकट बताने वाले अधिकारियों को दिखाना होगा आईना : उच्चतम न्यायलय को क्यों कहना पड़ा वहां जंगलराज है

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ साथ न्याय का राज कायम करने और जनहित में बन रही योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। मगर उनकी इस भावना के तहत प्रदेश में काम होता नजर क्यों नहीं आ रहा है। और वो भी उन परिस्थितियों में जब अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने और कार्य में लापरवाही और दोषियों के स्थानांतरण व निलंबन के साथ ही समय से पूर्व सेवानिवृति देने की व्यवस्था भी हो रही है।

ऐसा क्यों हो रहा है जब इस ओर थोड़ा सा सोचने की कोशिश की गई तो जो तथ्य उभरकर सामने आए उससे पता चलता है कि सत्ता के शीर्ष पर विराजमान या इसके इर्द गिर्द घूमने वाले कुछ निरंकुश और सुविधाएं जुटाने में लगे अफसरों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है जिससे एक तरफ तो सरकार की योजनाएं लागू नहीं हो पा रही दूसरी तरफ आम आदमी को भयमुक्त वातावरण नहीं मिल पा रहा है। तीसरे जिन कामों के लिए सरकार भरपूर पैसा खर्च कर रही है वो पूरे नहीं हो रहे हैं। और जनहित की जो योजनाएं प्रदेश सरकार द्वारा आम आदमी को अच्छे दिनों का अहसास कराने के लिए लागू की गई हैं उनका लाभ पात्र व्यक्तियों को नहीं मिल पा रहा है। चुनाव में वोट तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदि द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्याें के लिए वोट तो मतदाता चुनावों में भाजपा को दे रहा है लेकिन मन से संतुष्ट नहीं है।

सत्ता के शीर्ष पर विराजमान जनप्रतिनिधियों और मन से सरकार से जुड़े अधिकारियों को सोचना होगा कि वो जनता और न्यायपालिका के मापदंडों पर खरे क्यों नहीं उतर पा रहे हैं। और विकास के बजट का भरपूर पैसा उपलब्ध होने के बावजूद मतदाता को सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं है। इस संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 15 नवंबर तक सड़कों को गडढा मुक्त करने के फरमान को देखा जा सकता है। बताते चलें कि पहले भी 15 दिन में सड़कों को गडढा मुक्त करने के आदेश किए जा चुके हैं लेकिन मोटी और चिकनी खाल के मालिक संबंधित विभाग के कुछ अधिकारियों ने कागजी खानापूर्ति कर उक्त आदेश से सरकार का ध्यान हटा दिया था। आगे क्या होगा वो तो मुख्यमंत्री जी को देखना है। लेकिन यह कहा जा सकता है कि सड़कों के अच्छे रखरखाव के लिए जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, आवास विकास, प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों की लगाम कसने में अगर सरकार सफल रही तो गढडा मुक्त सड़का बनाने के आदेश का अक्षरतः पालन हो सकता है।

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मुख्यमंत्री जी सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस कहा कि हम उत्तर प्रदेश सरकार से तंग आ चुके हैं। ऐसा लगता है यूपी में जंगलराज है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि अधिकतर मामलों में यूपी सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास संबंधित अथाॅरिटी का कोई उचित निर्देश नहीं होता। क्यों बुलंदशहर के सैकड़ों वर्ष पुराने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन के मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने यह टिप्पणी की। जस्टिस मान्य एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से पूछा कि क्या यूपी में कोई ट्रस्ट या सहायतार्थ ट्रस्ट एक्ट है? क्या वहां मंदिर व सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है? यूपी सरकार के वकील ने कहा कि इस बात की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इस पर नाराज होकर पीठ ने कहा, ऐसा लगता है कि राज्य सरकार चाहती ही नहीं कि वहां कानून हो। पीठ ने कहा, लगता है वहां जंगलराज है। हम यूपी सरकार से परेशान हो गए हैं। हर दिन ऐसा देखने को मिलता है कि सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास उचित निर्देश नहीं होते हैं। फिर चाहें वह दीवानी मामला हो या आपराधिक। पीठ ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। नाराज पीठ ने 2009 के इस मामले में अब यूपी के मुख्य सचिव को तलब किया है। पीठ ने कहा, हम सीधे मुख्य सचिव से जानना चाहते हैं कि क्या यूपी में मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है? पीठ ने मुख्य सचिव को आगामी मंगलवार को पेश होने को कहा है। मामला बुलंदशहर के करीब 300 वर्ष पुरानी श्री सर्वमंगला देवी बेला भवानी मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है। विजय प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें मंदिर के चढ़ावे को वहां काम करने वाले पंडों को दे दिया गया था। मुख्यमंत्री जी यह देखना होगा कि आखिर माननीय सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीशों को जो टिप्पणी ऊपर दिए गए मामले में करनी पड़ी ऐसी स्थिति क्यों आई और हमारे अफसर पूरी तैयारी से किसी भी मामले की पूरी तैयारी क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
एनजीटी द्वारा जो कहा गया है कि अन्य अपराध रोकने की भांति रोका जाए वायु प्रदूषण। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ के द्वारा जो यह आदेश किया गया है। यह लागू हो पाएगा वर्तमान परिस्थितियों को देखकर तो नहीं लगता क्योंकि यहां तो भरपूर दावे करने के बावजूद अपराध ही नहीं रूक पा रहे हैं तो यह एक नया काम कौन करेगा क्योंकि प्रदूषण रोकने के संबंधित विभाग के तो तमाम अधिकारी विभाग के लिए लगभग सफेद हाथी और व्यापारियों व उद्योगपतियों से वसूली का माध्यम बन गए लगते हैं। ऐसे में किससे उम्मीद की जा सकती है।

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माननीय मुख्यमंत्री जी आपके द्वारा भरपूर किए जा रहे प्रयास आखिर क्यों नहीं लागू हो रहे हैं। यह तो अब आपकों ही देखना होगा। मेरा मानना है कि इसके लिए आप अपनी टीम के कुछ ईमानदार और सख्त छवि के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की एक कमेटी गठित कर उनको इस काम में लगाए तो लगता है कि इस मामले में कुछ हो सकता है प्रदेश में। कानून व्यवस्था भी सुधर सकती है अधिकारी विभिन्न मामलों की पैरवी जिम्मेदारी से करने को मजबूर होंगे और एनजीटी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है वो भी पूरी हो सकती है। बस जरूरी है काम के प्रति लापरवाह और माल कमाने के लिए आपने आप को सत्ताधारी पार्टी के निकट बताए जाने वाले अफसरों को आईना दिखाए जाने की आवश्यकता है।

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