गुजरात के शिक्षा निदेशक और शराब की बिक्री को लेकर सवाल पूछने वाले अफसरों की समाप्त की जाए नौकरी

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एक तरफ तो हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहे हैं। सत्ताधारी और विपक्ष के सभी दल इस मौके पर गांधी जी द्वारा किए गए कार्याे और उनके प्रेरणास्त्रोत प्रसंगों की चर्चा कर अपनी भावी पीढ़ी को एक आदर्श नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित अन्य प्रदेशों के नेता इस अवसर पर राष्ट्रपिता के अच्छे कार्याें का गुणगान करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं।

ऐसे में गुजरात में नौवीं कक्षा की आंतरिक परीक्षा में चैंकाने वाला यह प्रश्न पूछा गया है कि ‘‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ परीक्षा में यह अटपटा प्रश्न पूछे जाने का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों से पूछे गए एक और प्रश्न ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हैरान कर दिया है। इस प्रश्न में कहा गया है– ‘‘अपने इलाके में शराब की बिक्री बढ़ने एवं शराब तस्करों द्वारा पैदा की जाने वाली परेशानियों के बारे में शिकायत करते हुए जिला पुलिस प्रमुख को एक पत्र लिखें।’ उल्लेखनीय है कि गुजरात में शराब बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी है। एक अधिकारी ने कहा कि ‘‘सुफलाम शाला विकास संकुल’ के बैनर तले चलने वाले विद्यालयों में नौवीं कक्षा की आंतरिक परीक्षा में पूछा गया, ‘‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ सुफलाम शाला विकास संकुल कुछ स्व वित्तपोषित विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों का संगठन है, जिन्हें गांधीनगर में सरकारी अनुदान मिलता है। गांधीनगर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने कहा कि स्व वित्तपोषित स्कूलों के एक समूह ने और अनुदान प्राप्त करने वाले स्कूलों ने ये दोनों प्रश्न शनिवार को हुई अपनी आंतरिक परीक्षाओं में शामिल किया था।

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सवाल ये उठता है कि गुजरात सरकार का शिक्षा और आबकारी विभाग कर क्या रहा है। क्योंकि राष्ट्रपिता की हत्या की गई थी। उन्होंने आत्महत्या नहीं की थी। दूसरे गुजरात में पूर्ण शराब बंदी है तो फिर शराब की बिक्री बढ़ने और उसे रोकने के लिए पत्र लिखे जाने का कोई औचित्य ही नहीं है। रही बात तस्करी की तो अगर वह हो रही है तो वहां का आबकारी और गृह विभाग दोषी है। बच्चों को ऐसी गलत जानकारियों दी जानी उनके हित में नहीं कही जा सकती। मेरा मानना है कि गुजरात के शिक्षा निदेशक और शराब के संबंध में सुझाव देने वाले अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर यह जांच कराई जाए कि कहीं गुजरात की सरकार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने के लिए तो किसी कुचक्र के तहत ये दोनों सवाल नवीं क्लास के बच्चों से तो नहीं पूछे गए।

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