आम आदमी के हित में सरकार को रखनी होगी निगाह : बाबा रे बाबा संतों पर अकूत संपत्ति कहां से आई…?

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जिस प्रकार हाथ की पांचों अंगुलिया एक जैसी नहीं हो सकती उसी प्रकार से किसी भी मामले अथवा क्षेत्र में सबको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आम आदमी के धर्म के प्रति बढ़ते विश्वास और आस्था को बनाए रखने हेतु यह देखा जाना बहुत जरूरी है कि कहीं कुछ स्वार्थी तत्व नागरिकों की सेवाभाव और दान पुण्य की सोच और भावना का गलत इस्तेमाल या उन्हें बेवकूफ बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं।
मैं यह तो नहीं कहता कि अपने आप को भगवान बताने वाले बाबा आशाराम, राम रहीम या अन्य जिन बाबाओं और साधु संतों के कारनामे आए दिन सुर्खियों में नजर आते हैं वो सब गलत ही होंगे मगर यह भी नहीं कह सकता कि सब सच ही हैं।

मगर मंदिर धार्मिक संस्थाओं और आयोजनों के नाम पर अलग अलग तरीकों से चंदा वसूली करने वालों पर नजर जरूर रखी जानी चाहिए क्योंकि जनता का पैसा सही जगह उपयोग हो रहा है या नहीं इसके लिए विभिन्न नामों से धार्मिक संस्थाएं चलाने वालों पर शिकंजा कसा जाए कि वो जो पैसा खुद आता है या रसीदों के माध्यम से चंदे के रूप में लिया जाता है अथवा गुप्त दान आता है उन सबका ब्यौरा हर साल जनता के सामने किसी भी रूप में प्रस्तुत करें और सरकार को भी इसके लिए बने विभाग के माध्यम से दिया जाए।
वर्तमान में हो यह रहा है कि ईमानदारी की कमाई करने वाले तो दान पुण्य करते ही है सरकार के तमाम नियम और नीतियों तथा कानूनों को नजरअंदाज कर गलत तरीकों से धन कमाने वाले भूमाफिया, अवैध निर्माणकर्ता, जमाखोर व मुनाफाखेार भी अपना नाम कमाने या समाज में अपना नाम स्थापित करने के लिए दान पुण्य करने के मामले में भावना उनकी कुछ भी हो आगे नजर आते हैं। कही दबाव में तो कुछ जगह अपने नाम के लिए भी इनके द्वारा बड़े बड़े दान दिए जाते हैं। जो भी हों। जो पैसा इनके माध्यम से आता है उसका सदुपयोग संस्थाएं पात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करें। इसके लिए यह भी जरूरी है कि प्रदेश सरकार ने अगर कोई विभाग बना रखा है तो वो और अगर नहीं बनाया है तो बनाए जो इन चंदा लेने वालों पर अंकुश लगा रहे। इस संदर्भ में यूपी के बुलंदशहर स्थित श्रीमंगला बेला भवानी मंदिर मामले में उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यूपी सरकार से कहा कि ये अराजकता है। क्या उत्तर प्रदेश में कुछ भी कर सकते हैं। अदालत ने पूछा कि राज्य में मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून क्यों नहीं है? अदालत ने कहा कि यूपी सरकार इस संबंध में कानून बनाने पर विचार करे, जिसके तहत सरकार गलत प्रबंधन के आरोपों पर मंदिर व धार्मिक संस्था का मैनेजमेंट अपने अधिकार क्षेत्र में ले सके। जैसे आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए जाने से भी यही अहसास होता है कि सरकार को अब इस मामले में सख्ती बरतनी चाहिए।

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वर्तमान में नया मामला तमिलनाडु के स्वयंभू भगवान के अवतार कल्कि भगवान विजय कुमार नायडू और उनके बेटे के प्रतिष्ठानों पर पड़े आयकर के छापों में जो धर्मांधता के नाम पर धन इकठठा करने का मामला खुलकर आया है उससे ये विचारधारा और भी मजबूत हो जाती है कि गलत दृष्टि से नहीं सही किसी भी रूप में भी जो धार्मिक संस्थाएं बाबा और साधु संत काम कर रहे हैं उनका सम्मान बना रहे। इस हेतु सभी धार्मिक संस्थाएं चाहे वो किसी भी वर्ग या संप्रदाय से संबंधित हो उनके आय व्यय और कार्य प्रणाली का हिसाब पारदर्शी रूप में आम आदमी को पता होना ही चाहिए। इस दृष्टि से भी सरकार इन पर दबाव बनाए और पूरा हिसाब मांगे। फिलहाल एक नजर कल्कि भगवान के प्रकरण पर डाले और तय करें कि भविष्य में उन्हें इस संदर्भ में क्या नीति अपनानी है। खुद को भगवान बताने वाले विजय कुमार नायडू ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि वह देश छोड़ कर भागा नहीं हैं, वह यही भारत में हैं। उन्होंने कहा है कि न तो आयकर विभाग और ना ही सरकार ने कहा है कि मैं देश से भागा हूं। आयकर विभाग की छापेमारी में 600 करोड़ की अघोषित आय का पता चलने के बाद स्वयंभू नायडू ने एक विडियो जारी करते हुए सफाई दी है। बताते चलें कि इससे पहले आयकर विभाग ने कथित अध्यात्मिक गुरु कल्कि भगवान से जुड़े समूह के 40 ठिकानों पर छापेमारी करते हुए 600 करोड़ रुपये से ज्यादा के काला धन बरामद किया था। आयकर विभाग ने धार्मिक प्रवचन और बेहतर जीवन जीने के तरीके (वेलनेस कोर्स) सिखाने के नाम पर काला धन जमा करने वाले चेन्नई के एक समूह पर छापा मारा था। वहां से अधिकारियों ने 600 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के काला धन का पता लगाया। इस समूह ने भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में निवेश भी किया। सवाल यह भी उठता है कि आधुनिक बाबाओं का पैसा विदेशों तक कैसे पहुंच जाता है और कहां से किस रूप में आता है क्योंकि इतना पैसा कल्कि भगवान जैसे बाबाओं के पास चढ़ावे तो सीधे सीधे नहीं आ सकता इसलिए सरकार के खुफिया विभाग जिस तरह से व्यापारियों व उद्योगपतियों के मामलों में निगाह रखते हैं उसी प्रकार धार्मिक संस्थाओं के संचालकों पर भी उन्हें निगाह रखी जानी चाहिए।

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मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री चाहे वह किसी भी दल के क्यों न हों उन्हें धर्म से जुड़े महापुरूषों का सम्मान करते हुए बिना किसी गलत सोच के हर प्रकार का लेखा जोखा जनहित में इनका रखना चाहिए। संतों कोे मिलने वाले दान की रकम का कहीं गलत उपयोग न हो पाए इसलिए उनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से और कैसे आती है जिस पर सरकार को चाक चैबंद होकर निगाह रखनी होगी।

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