Google pixels भारतीय यूजर्स को लुभाने में क्यों रहा नाकाम?

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नई दिल्ली ।Google pixels को ‘‘श्रेष्ठ एंड्रॉयड फोन’ कहा जा रहा था, लेकिन टेक जाएंट गूगल का यह महत्वाकांक्षी उत्पाद भारत में लोगों को लुभाने में नाकाम रहा। इसका कारण यह रहा कि अपने इस उत्पाद को लेकर google की मार्केटिंग रणनीति काफी लचर रही।

अगर गूगल पिक्सल के नंबर्स पर गौर किया जाए तो 2019 के दूसरे क्वार्टर में यह भारतीय प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में सिर्फ 0.1 प्रतिशत शेयर हासिल कर सका।Counterpoint Research के मुताबिक भारतीय बाजार पर सैमसंग, एप्पल और वनप्लस जैसे ब्रांड का बोलबाला रहा। साल 2016 में नियंतण्र बाजार में आने के बाद से गूगल पिक्सल नियंतण्र बाजार में भी अपनी छाप नहीं छोड़ सका।

बीते तीन साल में अगर किसी Chinese smartphone player के ग्राफ पर नजर डाली जाए तो इस दौरान इन सबने भारतीय बाजार में अपनी अच्छी-खासी पकड़ बना ली। काफी हो-हल्ला के बाद चार अक्टूबर, 2016 को लांच किए गए पिक्सल और Pixels xl के पहले संस्करण ने आगे चलकर नेक्सल लाइन के स्मार्टफोन्स का रूप ले लिया। पिक्सल ने अपने अब तक के सफर के दौरान कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना किया। रियर कैमरे से लिए गए पिक्र्चस में एक्सेसिव ऑप्टिकल लेंस फ्लेअर दिखा।

साथ ही कुछ मोबाइल डैटा ब्रांड्स के साथ कनेक्टिविटी इश्यू भी दिखे। साथ ही ब्ल्यूटुथ कनेक्टिविटी में भी परेशानी आई। इसके अलावा बैटरी और माइक्रोफोन में समस्या से ग्राहक परेशान रहे। गूगल ने इस परेशानियों को पहचाना और इन्हें दूर भी किया लेकिन इसका कोई फायदा होता नहीं दिखा। इंडस्ट्री इंटेलीजेंस ग्रुप (आईआईजी) और साइबर मीडिया रिसर्च (सीएमआर) के प्रमुख प्रभु राम के मुताबिक स्मार्टफोन कैमरा ही एक ऐसा तत्व है, जिसे लेकर ग्राहक सबसे अधिक सोचता है।

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