मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के लिए जरूरी विटामिन

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लखनऊ । मीनोपॉज या मासिक धर्म में गड़बड़ी से पीड़ित महिलाओं का इलाज पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स के नियमित सेवन से ही हो पाता है। इसमें विशेष रूप से कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन ई बहुत जरूरी हैं । अगर स्थिति गंभीर है तो हार्मोन रिप्लेसमेन्ट थेरेपी का प्रयोग करना पड़ता है, इसमें कृत्रिम रूप से एस्ट्रोजन दिया जाता है। यह काफी कारगर थेरेपी है। यह बात सहारा हॉस्पिटल लखनऊ की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ ऋचा गंगवार ने कही।

क्या है मीनोपॉज : डॉ. गंगवार ने कहा कि मासिक धर्म के स्थाई रूप से बंद हो जाने को रजोनिवृत्ति या मीनोपॉज कहते हैं। मीनोपॉज महिलाओं में 45 से 50 साल की उम्र में होता है। हालांकि, मीनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कोई रोग नहीं है पर कई महिलाओं के शरीर में होने वाला बदलाव उनकी जीवन शैली में समस्याएं खड़ी कर सकता है। उन्होंने कहा कि असल में मीनोपॉज बीमारी नहीं, बल्कि महिलाओं के शरीर में होने वाला बदलाव मात्र है। यदि आपको 12 महीने से पीरियड नहीं हो रहे हैं और आप 45 से 55 की उम्र के पास हैं, तो हो सकता है कि आप मीनोपॉज की समस्या से गुजर रहे हैं।

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बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा : डॉ. गंगवार ने कहा कि मीनोपॉज़ होने पर महिला में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन आने लगते हैं। महीना बंद हो जाता है, जिससे उनमें कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ता है। विशेषकर ज्यादा वजन वाली महिलाओं में हार्ट अटैक की समस्या हो सकती है। महिलाओं में हार्ट अटैक के साथ ब्लड प्रेशर व शुगर की समस्या बढ़ जाती है। मीनोपाज के समय महिलाओं को कई असामान्य लक्षणों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे कि वजन बढ़ना और हॉट फ्लैशेस (थोड़ी-थोड़ी देर में गर्मी का अहसास)। महिलाओं की बढ़ती उम्र के साथ व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है। महिलाएं बुझा-बुझा महसूस करती हैं, चिड़चिड़ाने लगती हैं। अचानक कई बार शरीर लाल हो जाता है, उलझन, घबराहट होती है पर कुछ मिनटों में ठीक हो जाती हैं। लोगों को यह उम्र का पड़ाव दिखता है पर दरअसल यह मीनोपॉज के कारण होता है।

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परिवार दे ध्यान : डॉ. गंगवार ने कहा कि ऐसे समय में जरूरत है कि परिवार के लोग समझे और उसका इलाज करवाएं। मुख्य रूप से इस समय महिलाओं में विटामिन, मिनरल्स और कैल्शियम की कमी हो जाती है। एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा, हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ता है, क्योंकि एस्ट्रोजन कार्डियो प्रोटेक्शन के रूप में कार्य करता है। डॉ. ऋचा ने बताया कि मीनोपॉज का असर शरीर के सभी अवयकों जैसे हृदय, धमनियों, हड्डी, मस्तिष्क, जननेंद्रियों पर होने से उन अवयकों से संबंधित बीमारियां होने की संभावना बढ़ने लगती हैं। आस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ता है।

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इनका भी करें सेवन : महिलाओं में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रान हार्मोंन बंद होने के बाद शरीर में आइसोफ्लेवांस तत्व की कमी होती है। आइसोफ्लेवांस की कमी को दूर करने के लिए जामुनी रंग वाले फल, सब्जियां, चुकंदर, लाल पालक, काली गाजर व जामुन का सेवन कर सकती हैं।

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