अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर विशेष :बुजुर्गों की सेवा का लें संकल्प

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दो अक्टूबर को मनाई जाने वाली जयंती से एक दिन पूर्व मनाया जाता है वृद्ध दिवस। बताते चलें कि 1990 में भारत में इसकी शुरूआत हुई। 1991 में पहली बार देश में यह मनाया गया। ओैर फिर 1999 से पूरी दुनिया में एक अक्टूबर को वृद्ध दिवस मनाया जाता है।
इससे पहले भी बुजुर्गों का सम्मान परिवारों में होता था चाहे वह संयुक्त हो या एकल। धीरे-धीरे वृद्धों की कुछ समस्याएं सामने आने लगी। और जब से यह दिवस मनाया जाने लगा तब से उनका समाधान भी खोजा जाने लगा क्योंकि जगह-जगह इस विषय को लेकर होने वाली गोष्ठियों में जहां वृद्धों का सम्मान होने लगा वहीं खुले मंचों से उनकी समस्याओं पर चर्चा की जाने लगी।
परिणामस्वरूप समाज के साथ-साथ सरकार के स्तर पर भी मंथन और विचार उपरांत बुजुर्गों के लिए कुछ सुविधाएं दिए जाने के साथ-साथ कुछ नियम भी बनाए गए जिससे हर परिस्थिति में हमारे आदरणीय कष्टों से बचे रहें। जिसके तहत रेल और बसों आदि में रियायती दरों पर यात्रा देने के साथ-साथ निराश्रित वृद्धों के लिए वृद्धाश्रम खोले गए तो बच्चों को भी अगर वो उदंडता पर आते हैं तो मां-बापों का ख्याल रखने के लिए मजबूर करने हेतु कानूनी चक्रव्यूह में बांधा गया।
मैं यह तो नहीं कह सकता कि हर बुजुर्ग इससे खुश है लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि समाज और परिवार के सदस्यों की अच्छी सोच तथा सरकार के प्रयासों से अब ज्यादातर वृद्धों का जीवन खुशहाल होने लगा है। बताते चलें कि इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। वरिष्ठ नागरिकों को अपनी शिकायतों के लिए अब न्यायालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य के बुजुर्गों की शिकायत हर जिले में तैनात मेंटेनेंस अधिकारी सुनेंगे और एक माह में उनकी शिकायतों का निस्तारण भी करेंगे।
अगर शिकायत का निस्तारण नहीं हुआ तो डीएम स्तर के अपीलीय अधिकारी के पास वरिष्ठ नागरिक अपनी फरियाद रख सकेंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के लिए तीन महीने में प्रचार प्रसार की व्यवस्था करें।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई। हरिद्वार निवासी कैलाश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2007 में सीनियर सिटिजन मेंटेनेंस वेलफेयर एक्ट का गठन किया था। इसमें कहा गया था कि सभी राज्य सरकारें आदेश के छह माह बाद अपने राज्य में इस एक्ट को नियम बनाकर लागू करेंगे। इस एक्ट में एसडीएम रैंक के एक अधिकारी की मेंटेनेंस अधिकारी के रूप में नियुक्ति होनी थी लेकिन राज्य सरकार ने इसके लिए नियमावली तैयार नहीं की। वहीं, राज्य सरकार ने कहा कि राज्य में इस एक्ट को प्रभावी कर दिया गया है। मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आॅफ पेरेंट्स सिटिजन एक्ट 2007 के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। बुजुर्गवार इसको लेकर जागरूक न होने के कारण इसका महत्व नहीं समझ पाते हैं। इसके चलते आज भी ज्यादातर बुजुर्ग अपनों की ज्यादतियों के शिकार हो रहे हैं। इस एक्ट की धारा 23 के तहत अगर माता पिता ने सारी जायदाद बच्चों के नाम करवा दी हो और बच्चे उनकी देखभाल न करते हों तो इस कानून के अनुसार माता पिता अपनी सारी जायदाद वापस अपने नाम करवा सकते हैं। ऐसे में बच्चों को माता-पिता की सेवा करनी ही होगी।
इसके बावजूद मुझे लगता है कि सरकारों को वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि करने के साथ ही सरकारी वाहनों में यात्रा पूर्ण रूप से मुफ्त तथा सीनियर सिटीजन के लिए सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों व डाॅक्टरों के यहां भी चिकित्सा सुविधा निःशुल्क रूप से उपलब्ध कराई जाए। तथा जो वृद्ध आश्रम चल रहे हैं उनका तीन माह में कम से कम एक बार निरीक्षण हो और जो भी कमियां हैं उन्हें दूर कराया गया। इसके अलावा हर वृद्ध समारोह आयोजित कर सरकार के खर्च पर जिला प्रशासन की देखरेख में सम्मान समारोह आयोजित हो जिनमें कम से कम 100 वृद्धों का सम्मान अनिवार्य रूप से किया जाए। कुल मिलाकर मेरी सरकार से मांग है कि सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आने वाले वृद्धों की पूर्ण जिम्मेदारी अपने ऊपर वहन करे और उन्हें सब सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए जिस प्रकार से सरकारी नौकरशाहों को सरकार सारी सुविधाएं सेवानिवृति के बाद दे रही है।
वैसे तो वरिष्ठजनों का सम्मान हर दिन, हर पल हमारे मन में होना चाहिए, लेकिन उनके प्रति मन में छुपे इस सम्मान को व्यक्त करने के लिए एवं बुजुर्गों के प्रति चिंतन की आवश्यकता के लिए औपचारिक तौर पर भी एक दिन निश्चित किया गया है। अतः प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर का दिन अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की शुरुआत सन् 1990 में की गई थी। विश्व में बुजुर्गों के प्रति होने वाले दुव्र्यवहार और अन्याय को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए 14 दिसंबर 1990 को यह निर्णय लिया गया। तब यह तय किया गया कि हर साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाएगा, और 1 अक्टूबर 1991 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया।
हालांकि इसके पहले भी बुजुर्गों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए, उनके लिए इस तरह की पहल की जा चुकी थी। सन् 1982 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा, वृद्धावस्था को सुखी बनाइए का नारा देकर सबके लिए स्वास्थ्य अभियान शुरू किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1991 में अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस की शुरुआत के बाद 1999 को अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग वर्ष के रूप में मनाया गया था। इस दिन को पूरी तरह से बुजुर्गों के लिए समर्पित किया गया है। उनके लिए वृद्धाश्रमों में भी कई तरह के आयोजन किए जाते हैं, और उनकी खुशी व सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाता है। खास तौर से उनकी सुविधाओं और समस्याओं पर विचार किया जाता है, एवं उनके स्वास्थ्य के प्रति गंभीरत से ध्यान दिया जाता है।
बुजुर्ग हमारे लिए ईश्वर का अवतार होते हैं, जिनके आशीर्वाद से हमारा पालन पोषण होता है, उनके प्रति मन में सम्मान और अटूट प्रेम होना स्वभाविक सी बात है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण होता है, उस अवस्था में उनके साथ होना, जब वे असहाय और अक्षम होते हैं। यही उनके प्रति अहमारे प्रेम और सच्ची श्रद्धा होती है।
इस सबके बावजूद मुझे लगता है कि हर परिवार को अपने बुजुर्गों के सम्मान और उनकी सुख सुविधाओं का ध्यान रखने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि जब उनके द्वारा अर्जित ख्याति और धन संपति के हकदार बनने के लिए ज्यादातर बच्चों में एक ललक रहती है तो उनकी यह जिम्मेदारी भी है क्योंकि जो बुजुर्ग अगर ख्याति और संपति नहीं छोड़ते है तो भी हमें मनुष्य के रूप में जीवन देने में तो उनका जो अहसान ही कह सकते हैं वो ही अपने आप में इतना है जिसका कर्ज कभी कोई नहीं चुका सकता। इस सबको ध्यान में रखते हुए आओ समस्त वृद्धजनों की खुशहाली और सुखमय जीवन की कामना करते हुए उन्हें बधाई दे।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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