यातायात उल्लंघन के नाम पर मोटा जुर्माना ठोकने के बजाए : बिहार के मोतीहारी की पुलिस से लें प्रेरणा।

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1 सितम्बर से लागू यातायात नियमों को लेकर भले ही केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी साहब उत्साहित हों और यह कहते नहीं थक रहे हों कि इससे डिसिप्लिन बनेगा और दुर्घटनाएँ कम होंगी। लेकिन इससे जो परेशानियाँ आम आदमी के लिए उत्पन्न हुई हैं उसने गरीब वाहन चालकों में डर की भावना पैदा की है। कुछ प्रदेशों की सरकारों मे अपने नागरिकों की इस परेशानी को समझकर राहत भी दोनों शुरू कर दी है, लेकिन अभी देश के सबसे बड़े प्रदेशों में से एक यू.पी में वाहन चालक बुरी तरह डरे हुए हैं क्योंकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस पुराने वाहनों के मालिकों पर भी इतना जुर्माना लगा रही है की वो यह सोचने पर मजबूर हैं की वाहन चलाएँ या न चलाएँ।

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बताते चलें कि प्रधानमंत्री जी के गृहप्रदेश गुजरात सरकार ने एक खबर के अनुसार नागरिकों को राहत देते हुए आगामी 16 सितम्बर से तय जुर्माना राशि ट्रेफिक नियमों में 50% कमी कर दी है, तो दिल्ली प्रदेश की सरकार भी इस संदर्भ में राहत की बात कर रही है। मगर सबसे बड़ा सुधार का कदम इस मामले में बिहार प्रदेश के मोतीहारी जिले की पुलिस द्वारा वाहनों के चालान काटने की बजाए वाहन मालिकों को हाथो-हाथ हेलमेट खरीदवाने तथा बीमा करने की योजना लागू की गयी है। जनपद के छतौनी थाना प्रभारी मुकेश चंद्र ने इस व्यवस्था को लागू करते हुए जगह-जगह हेलमेट और बीमा एजेन्टों के स्टाल पुलिस चौकियों के पास लगवा दिये हैं।

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गडकरी जी फरमा रहे हैं की उनका व केन्द्रीय मंत्री वी.पी सिंह तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का भी चालान हुआ है। पुलिस प्रचारित कर रही है कि अफसरों और पुलिस कर्मियों के भी चालान काटे जा रहे हैं। मैं इस बात को गलत तो नहीं कहता लेकिन यह कहना भी जरूरी समझता हूँ की मंत्री जी और अधिकारी आसानी से चालान और जुर्माना भर सकते है क्योंकि सबको एक लगी-बंधी तनख्वा मिलती है और ज़्यादातर को वाहन भी सरकारी मिलते हैं। लेकिन आम आदमी के पास ना तो सरकारी वाहन होते है और ना ही पैसे की बहुतायत और वर्तमान मंदी के दौर में तो वो बिलकुल पिसा पड़ा है।

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मेरा मानना है कि यातायात नियमों को बनाने और लागू करने के लिए जिम्मेदार मंत्रालय और अधिकारी तथा गैर भाजपा सरकारों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के नाम पर मोटा जुर्माना भरने के स्थान पर अगर बिहार के मोतीहारी पुलिस से प्रेरणा लेकर यातायात नियमों का उलंघन करने वालों को मौके पर ही हेलमेट खरीदवाने और वाहन बीमा करने की व्यवस्था लागू करे तो वो जनहित में होगा।

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