घायलों और पीड़ितो की आगे बढ़कर करनी होगी मदद अच्छी सोच वालो का सरकार करे सम्मान, कितने ही इन्सानो की इस से ही बचाई जा सकती है जान

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अपने देश के गांव गली मौहल्लो कस्बो व नगरो में शायद कोई भी ऐसी जगह नही होगी जहाँ आधे समाज सेवी संगठन न हो और 10 ,20 समाज सेवी न रहते हो । उसके बावजूद कई बार कुछ ऐसी घटना, विभिन्न जगहो पर शहर के बीचो बीच या हाईवे पर देखने को मिलती है जहां भीड़ तो खुब इठ्ठा होती हैं लेकिन मदद करने को हजारो में सें कोई बिरला ही एक ही निकल कर आता है। बाकी सब तमाश बीनो की तरह खडे़ रहते है या अपने मोबाइल से सेल्फी लेने या फिर वीडियो बनाते रहते है। मैं यहा तो नही कहता की लोगो को वीडियो नही बनानी चाहिए या सेल्फी नही लेनी चाहिए। यह काम तो उनको जरूर करना चाहिए क्योकि यह कभी कभी पीड़ित व्यक्ति को न्याय और मदद दिलाने में काफी हेल्पफुल सिद्ध होते है मगर इन सबके साथ ही पीड़ित व्यक्ति को जैसी जरूत हो वैसे मदद जरूरत मिलनी चाहिए।

दोस्तों मैने भी देखा है और आपके सामने से भी कभी न कभी कोई न कोई ऐसा नजारा जरूर गुजरा होगा। जिसे देखकर मानवीय दृष्टिकोण से संकट में फैसे व्यक्ति की मदद करने की इच्छा मन में होती है लेकिन किसी विवाद में फसने या पुलिस के चक्कर से दूर रहने की बात को ध्यान में रखते हैं। हम ये सोचकर पीछे हट जाते है कि हम क्यो मुसीबत में फंसे और परेशानी मौल ले।

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पूरे तथ्य तो उपलब्ध नही है लेकिन कई बार ऐसा पढ़ने को मिला है की कुछ सरकारो में उच्च पदो पर तैनात बड़े अधिकारियो द्वारा यह घोषणा की गई है कि सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को आप आप अगर समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु उसे अस्पताल पहुंचातें है तो पहुंचाने वाले का नाम पता पूछा नही जाए लेकिन अगर वो बतायेगा तो उससे पुरूस्कृत व सम्मानित भी किया जाएगा। और पुलिस का कोई पचड़ा उसकी जान को नही होगा। इस प्रकार कई मौको पर देखने को मिलता है की सड़क पर दो लोग लड़ रहे है या कुछ व्यक्ति एक नौजवान या आदमी को पिट रहे है लेकिन हम तमाशा तो देखने के लि, खड़े हो जाते है मगर कमजोर की मदद करने या असलियत जानकर एक जिम्मेदार नागरिक की भाति न तो खुद मदद करते है और न ही पुलिस को सूचना देते है।

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जीवन में हर व्यक्ति के कई सामने समस्याएं व्याप्त है उससे ही वो असानी से नही निकल पाता है लेकिन उसके बावजूद अगर भगवान ने हमे सबसे श्रेष्ठ मानव जीवन दिया है तो हमे भगवान का आदेश समझकर पीड़ित और पात्र व्यक्तियो की किसी न किसी रूप में मदद जरूर करनी चाहिए। क्योकि कही ना कही आप के अपने भी ऐसी स्थिति में हो सकते है जिन्हे सहयोग और मदद की आवश्यकता पड़ सकती है। वहा अगर उनकी सहायता को कोई आगे नही आयेगा तो क्या क्या हो सकता है यह सोचकर हमे भी जरूरत मंदो की हर सम्भव सहायता करने के लिए आगे आना चाहिए।

मुझे लगाता है की केन्द्र और प्रदेशो के ग्रह स्वास्थ्य, कानून, और वित्तमंत्रालयो के आधिकारियों की एक कमेठी इन विभागो के मंत्रीयो को गठित कर जन सहयोग सेे कोई ऐसी नीति और नियम बनाकर उनका भरपूर प्रचार करे की जो लोग किसी भी प्रकार की मुश्किल में फंसे नागरिको की मदद करेगें उनका पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सम्मान करेगें तथा उन्हे पुलिस किसी विवाद में घसीटने की कोशिश नही करेगी। और पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक सहायता करने के साथ साथ अगर मदद करने वाले का कुछ खर्च हुआ है तो वो उसे तुरन्त उपलब्ध करा दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो मुझे लगाता है की कई घायलो की जान बचाई जा सकती है और कितने ही पीड़ितो को न्याय दिलाने के साथ साथ ऐसे मामलो में जो मुकदमें होतें है उनसे भी बचा जा सकता है।

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