आल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आइना की मांग ,मुख्यमंत्री जी मारे गये पत्रकार और उसके भाई को 25-25 लाख तथा परिवार के एक सदस्य को दी जाये सरकारी नौकरी

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मेरठ 19 अगस्त। सहारनपुर में मामूली से विवाद पर अपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति द्वारा दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उसके भाई आशुतोष कुमार की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी गयी। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने पांच-पांच लाख रूपये की सहायता देने की घोषणा की है तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री अखिलेश यादव ने भी पत्रकार की हत्या की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किये जाने की बात कही है।

यहां तक तो ठीक है लेकिन सवाल यह उठता है कि जब पत्रकार का हत्यारा पूर्व में कई मामलों में वांछित था तो खुला कैसे घूम रहा था और हत्यारे महिपाल पर तमंचा कहां से आया यह बिंदु पुलिस की लापरवाही और कमजोरी तथा अपराधियों के प्रति सख्त कार्रवाई न किये जाने की मंशा को दर्शाती हैं।

माननीय मुख्यमंत्री जी आपने पत्रकार और उसके भाई की मौत पर पांच-पांच लाख रूपये की सहायता राशि देने की घोषणा की यह अच्छी बात है लेकिन एक तरफ तो जिन लोगों को मोटी-मोटी तनख्वा और मरने के बाद अच्छी खासी पेंशन हर महीने मिलती है उन्हें तो सरकारे 20 लाख से लेकर 50 लाख तक की सहायता राशि खेती योग्य जमीन मकान और व्यवसाय के लिए सुविधाओं के साथ ही पेट्रोल पम्प आदि आवंटित करती है दूसरी तरफ निस्वार्थ भावना से जान जोखिम में डालकर समाज की बुराईयों और अपराधियों का पर्दाफाश करने वाले पत्रकार की हत्या पर मात्र पांच लाख की सहायता यह लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ से जुड़े लोगों के साथ इंसाफ नहीं है। विपक्ष के नेता भी जब कोई नौकरी पेशा व्यक्ति मरता है तो उसे बड़ी-बड़ी सहायताए देने की बात करते हैं और पत्रकार के मामले में सिर्फ निंदा और शोक संवेदना व्यक्त कर संतोष कर लिया गया। यह कहां का इंसाफ है।

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कंेद्र और प्रदेश की सरकारों से आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आइना मांग करती है कि जिस प्रकार से ऐसे मामलों में अन्यों को उनके परिवार के पालन पोषण हेतू दिलखोलकर सत्ता और विपक्ष के लोग और सरकारें सहायता देने की घोषण करती हैं उसी प्रकार सही मायनों में मीडिया से जुड़े समाचार पत्र संचालकों या पत्रकारों को भी कम से कम उनकी हत्या किये जाने पर समय अनुकूल 20 से 50 लाख रूपये तक की सहायता दी जाए और सामान्य मौत पर लघु और भाषाई पत्र संचालकों और पत्रकारों को उनकी स्थिति का ध्यान रखते हुए कम से कम 10 लाख रूपये सहायता सरकार की ओर से दी जानी चाहिए क्योंकि कितने ही मीडियाकर्मी ऐसे होते है जिनके चले जाने के बाद उनके बच्चों की पढ़ाई और खाने की व्यवस्था करना भी परिवार के लिये मुश्किल हो जाता है क्योंकि वह पत्रकारिता को मिशन और सेवा समझकर ईमानदारी से जीवन भर काम करते रहे और भविष्य के लिए दंद-फंद के माध्यम से पैसा इकट्ठा करने का प्रयास उनके द्वारा नहीं किया गया होता है।

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अब अगर ऐसे में सरकार आगे बढ़कर पत्रकार और समाचार पत्र संचालकों के साथ नहीं खड़ी होगी तो सामाजिक समरसता, ईमानदारी और भाईचारा व सेवाभाव कैसे कायम रह पायेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए 25 वर्षीय पत्रकार आशीष कुमार को 25 लाख और उसके भाई 18 वर्षीय आशुतोष को सहायता राशि बढ़ाकर दी जाये और परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुसार दी जाये सरकारी नौकरी।

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