प्राइवेट क्षेत्र में आरक्षण की मांग ठीक नहीं, कांग्रेसियों को हो क्या गया है

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छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार एक खबर के अनुसार निजी क्षेत्रों में आरक्षण लागू कर सकती है लागू। खबर पढ़कर यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा कि आखिर कांग्रेस चाहती क्या है और इस पार्टी के नेताओं को हो क्या गया है। बीती सात अगस्त को इस बड़े नेताओं द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर केंद्र सरकार द्वारा जनभावनाओं से जुड़े लिए गए फैसले का विरोध किया गया और अब इसके नेता निजी क्षेत्र में आरक्षण की बात कर रहे हैं।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि एक प्राइवेट व्यक्ति जब कोई उद्योग लगाता है अथवा काम करता है तो अपनी मेहनत के दम पर पांच साल में उसे कामयाबी के शिखर पर ले जाता है। लेकिन इतिहास उठाकर देखा जाए तो सरकार के ज्यादातर संस्थान नुकसान में चल रहे होंगे या जिस दिन से शुरू हुए नो प्राॅफिट नो लाॅस की सीमा पर ही खड़े होंगे। ऐसे में निजी क्षेत्र में आरक्षण की बात कि मुझे लगता है कि किसी भी रूप में उचित नहीं है। हर व्यक्ति को उसकी काबलियत के अनुसार सुविधाएं और मौके देेने के अतिरिक्त अगर वो उद्योग लगाना चाहता है तो उसे आर्थिक सहायता दो और हर तरह से आगे लाने और बढ़ाने का काम कुछ करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए होना चाहिए मगर निजी क्षेत्रों में आरक्षण की बात बिल्कुल भी उचित नहीं है।

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कांग्रेस शायद भूली नहीं होगी कि उसके कुछ समाचार पत्र प्रकाशित हुआ करते थे और क्योंकि देशभर में उसकी सरकारें थी। उसके बावजूद वो नुकसान में चलते रहे। और एक समय ऐसा आया कि वो बंद तो हुए ही खुद कांग्रेस नेताओं की जान को कितने मुकदमे लगे हुए हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। इसके बावजूद मुझे लगता है कि कांग्रेस के बड़े नेता अपनी कमियां और असफलता छुपाने और निरंतर मिल रही हार की बदनामी छिपाने के लिए जनभावना विरोधी बातें करने में लगे हैं।
सोनिया जी और राहुल जी आपकी पार्टी देश के सबसे बड़े राजनीतिक दलों में से एक है। इसकी मजबूती और पुरानी साख कायम करने के लिए प्रयास किया जाए तो ज्यादा यह निजी क्षेत्र में आरक्षण या धारा 370 के फैसलों की निंदा करने से अच्छा है।
एक खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण लागू किया जा सकता है। इसको लेकर प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री शिव डहरिया ने कहा है कि यह जरूर होना ही चाहिए। वहीं प्रदेश में आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन कोई मायने नहीं रखती है। जनसंख्या के आधार पर आरक्षण में बढ़ोतरी की जा सकती है। हमारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का कहीं उल्लंघन नहीं किया है। दरअसल, आरक्षण नीति को लेकर कैबिनेट मंत्री मीडिया से बात कर रहे थे। राजधानी स्थित सरकारी आवास पर पहुंचे मंत्री डहरिया ने एक सवाल के जवाब में निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू किए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा, निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। गरीबों को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गांव और गरीबों के लिए लगातार काम कर रही है। रायपुर के पुलिस ग्राउंड में गत 15 अगस्त को हुए स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरक्षण को लेकर बड़ी घोषणा की थी। इसके तहत अब अनुसूचित जाति वर्ग को 12 की बजाए 13 और पिछड़ा वर्ग को 14 की जगह 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। अनुसूचित जनजाति वर्ग का आरक्षण 32 प्रतिशत यथावत है। इससे राज्य में अब आरक्षण 58 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत हो जाएगा।
हो सकता है कि निजी क्षेत्र में आरक्षण की सोच रखने वाले अपनी जगह ठीक हों, मगर अगर वो देश में जो स्थिति वाहन उद्योग की हो गई है, उस पर थोड़ा नजर दौड़ा लें तो उन्हें पता चलेगा कि प्राइवेट सेक्टर में कितनी कठिनाईयां व्यापारियों और उद्योगपतियों के समक्ष उभरकर आ रही हैं। उनका समाधान खोजने की बजाय आरक्षण की सोच पूरे प्राइवेट सेक्टर को ही बर्बाद करके रख सकती है। रही बात काम की तो काबिल व्यक्ति और काम करने वाले को ना नौकरी की कमी है और ना अन्य सुविधाओं की। उन्हें हर परिस्थिति में व्यापारी अपना व्यवसाय बढ़ाने और कामयाबी के शिखर पर बने रहने के लिए ढूंढ रहे हैं। इसलिए शायद किसी भी काबिल और मेहनती व्यक्ति को आरक्षण की आवश्यकता नहीं हैं। वो अपने दम पर अब सबकुछ कर सकता है।

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