“वृन्दावन धाम” : कण-कण में विराजमान है भगवान श्री कृष्ण

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‘‘वृन्दावन’’ यह नाम सुनते ही मन में एक ही ख्याल उत्पन्न होता है, वह है भगवान श्री कृष्ण का। जिन्होंने इस गांव को अजर-अमर कर दिया। यह युग रहें या ना रहें लेकिन उत्तर प्रदेश के इस छोटे से गांव का इतिहास हमेशा के लिए जीवित रहेगा। कहते हैं कि यहां आज भी कण-कण में भगवान श्री कृष्ण विराजते है। मधुरा क्षेत्र का प्रसिद्ध गांव वृन्दावन जहां से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं जुड़ी हैं। यह भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का प्रमुख स्थान माना गया है। वृन्दावन की महिमाओं का वर्णन हरिवंश पुराण, श्रीमद् भागवत पुराण, विष्णु पुरान सहित कई धार्मिक ग्रंथों में किया गया। आज भी वृन्दावन का भ्रमण करने मन में यह अहसास होता है भगवान श्री कृष्ण आज भी यहां की आबोहवा में मौजूद हैं। जीवन में आत्म शान्ति की चाह रखने वालों को एक बार वृन्दावन अवश्य जाना चाहिए।

घुटनों के बल पर श्रीकृष्ण ने चाटी थी धरती-
भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। उनकी बाल लीलाओं के कारण आज हर मां अपने बेटे को प्यार से कान्हा कहती है। युवा अवस्था में राधाजी से प्रेम किया तो ऐसा जो आज भी अमर है। वृन्दावन की धरती स्वयं में बहुत ही पवित्र पावन है। संसार के पालनहार भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की साक्षी स्वयं यहां की धरती है। भगवान श्री कृष्ण ने घुटनों के बल पर चलकर यहां की धरती चाटी थी। जिसके बाद माना जाता है कि यहां के कण-कण में श्री कृष्ण विराजमान है जो वृन्दावन को हमेशा के लिए अजर-अमर कर गए। इसका उल्लेख श्रीमद् भागवत पुराण में भी किया गया है।

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वृन्दावन में जरूर करें इन मंदिरो का दर्शन-
वृन्दावन में भगवान श्री कृष्ण और राधाजी के मन्दिर बड़ी संख्या में मौजूद है। जब भी आप वृन्दावन जाए तो यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में अवश्य दर्शन करें। वृन्दावन में स्थित भगवान बांके बिहारीजी और राधा वल्लभ लाल जी का मंदिर अति प्राचीन है। साथ ही राधारमण, राधा दामोदर, राधा श्याम सुंदर, गोपीनाथ, गोकुलेश, श्री कृष्ण बलराम मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर आदि प्रसिद्ध मंदिर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओ से हमें रूबरू करवाते है। इन मंदिरां में दर्शन मात्र से ही मनुष्य जीवन सफल माना गया है। ग्रंथों में भी इसका वर्णन किया गया है कि जीवन में प्रगति पथ पर हारे को वृन्दावन में जरूर सहारा मिलता है। वृन्दावन की धरा को देव भूमि माना गया है।

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वृन्दावन में प्राकृतिक छटा देखने योग्य है। वृन्दावन को यमुना जी ने तीन और से घेरे रखा है। यहां मौजूद घनघोर और ऊंचे वृक्षों यहां के प्राकृतिक नजारे को शोभित करते है। इस नजारे को देखते ही मन में उल्लास भर जाता है। इतना ही नहीं जिस तरह माना जाता है कि यहां के कण-कण में श्री कृष्ण विराजते हैं उसी तरह यहां का कण-कण रसमय है। वृन्दावन धाम प्रेम-भक्ति का साम्राज्य कहलाता है। यहां हर व्यक्ति अपनी भक्ति में मग्न रहता है। यहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहर, गौशालाएं एवं आश्रम वृन्दावन को और भी दार्शनिक बनाते हैं।

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घाटों पर रहता है मनमोहक दृष्य-
तीन और से घेर रखी यमुना नदी के घाट वृन्दावन को प्राकृतिक रूप से धाम का दर्जा प्रदान करते है। यमुनाजी के तट पर अनेक घाट है जो मनोमोहक दृश्य प्रदान करते है। यहां के हर घाट पर स्नान करने का अलग-अगल महत्व बतलाया गया है। साथ ही वृन्दावन में भ्रमण करने पर यहां के मोहल्ले हमें कृष्ण लीलाओं का मनोरम दृष्य प्रदान करते हुए मानों यह कह रहें हैं कि आज भी वृन्दावन की फिजा में केवल और केवल श्री कृष्ण ही समाएं हुए है।

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