प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका, नानाजी देशमुख को सम्मान मिला, अच्छा है गुरू जम्भेश्वर, चैधरी चरण सिंह और कांशीराम जी को भारत रत्न क्यो नहीं

18
loading...

चार वर्षों के अंतराल के बाद दिया जाने वाला भारत रत्न सम्मान इस बार माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी द्वारा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आदि की गरिमामय उपस्थिति में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे नानाजी देशमुख तथा गीतकार, गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका को दिया गया।
राष्ट्रपति भवन में उक्त गरिमा पूर्ण सम्मान प्रणब मुखर्जी जी द्वारा स्वयं लिया गया तो नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका के परिवार के सदस्यों ने यह सम्मान प्राप्त किया। किसी को भी जब यह पुरस्कार मिलते हैं तो खुशी होती है। माननीय प्रणब मुखर्जी को मिला अत्यंत प्रसन्नता की बात है। मैं किसी पर किसी प्रकार का कोई आरोप या पक्षपात का आरोप तो नहीं लगा रहा हंू, मगर क्योंकि लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने और सुनने का पूर्ण अधिकार है इस दृष्टिकोण से मेरा मानना है कि पूरे विश्व को पर्यावरण संतुलन का सर्वप्रथम संदेश देने वालों में शामिल पेड़ पौधों और मूक जानवरों की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने की प्रेरणा देने वाले बिश्नोई समाज के गुरू जम्भेश्वर जी महाराज तथा जीवनभर गरीब मजदूर और किसानों के हितों के लिए काम करते रहे पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चैधरी चरण सिंह तथा दलित कमजोर, पिछड़ों और गरीबों के उत्थान की मांग उठाने के साथ ही उन्हें अपने हितों के लिए संघर्ष का मार्ग दिखाने में सफल रहे बामसेफ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने वाले तथा बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए।
मेरा मानना है कि गरीबों के हित में काम करने वाले समाज को सदमार्ग दिखाने हेतु प्रयासरत अगर महान विभूतियों को और भारत रत्न दिया जाए तो मुझे लगता है हमारे युवाओं को अच्छे कार्य और औरों की मदद करने की प्रेरणा मिलेगी। जब भारत रत्न दिया ही जा रहा है तो इनको अभी तक नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है यह समझ से बाहर है। और वो भी ऐसे माहौल में जब पूरे दुनिया में अन्नदाता, पर्यावरण के लिए काम करने वालों और गरीबों और बेसहारा लोगों को सदमार्ग दिखाने की एक लहर चल रही है। ऐसे में इन महापुरूषों को अब भारत रत्न दिए जाने के मामले में किसी भी रूप में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
भारत रत्न किसे दिया जाए किसे नहीं का निर्णय करने वालों से आग्रह है कि अगली बार जब यह सम्मान दिया जाए तो अब तक जिन लोगों को यह मिल चुका है उनके साथ गुरू जम्भेश्वर जी महाराज, चैधरी चरण सिंह और मान्यवर कांशीराम का नाम भी इस सूची में जुड़ जाए तो नौजवानों को अच्छे काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
तथ्यों के अनुसार शायद अभी तक 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इनमें 1954 में डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (दूसरे राष्ट्रपति), 1954 में सी. राजगोपालाचारी (अंतिम गवर्नर जनरल), 1954 में डाॅ. सी वेंकट रमन (नोबेल पुरस्कार सम्मानित भौतिकशास्त्री), 1955 में डाॅ. भगवान दास (स्वतंत्रता सेनानी), 1955 में डाॅ. विश्वेशरय्या (सिविल इंजीनियर), 1955 में जवाहरलाल नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री), 1957 में गोविंद वल्लभ पंत (स्वतंत्रता सेनानी), 1957 में डाॅ. धोंडो केशव कर्वे (समाज सुधारक), 1958 में डाॅ. बीसी राॅय (पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री), 1961 में पुरुषोत्तम दास टंडन (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) 1961 में डाॅ. राजेंद्र प्रसाद (प्रथम राष्ट्रपति) , 1963 में डाॅ. जाकिर हुसैन (तीसरे राष्ट्रपति), 1963 में डा. पीवी काणे (संस्कृत के विद्वान), 1966 में लाल बहादुर शास्त्री (तीसरे प्रधानमंत्री) मरणोपरान्त, 1971 में इंदिरा गांधी (चैथी प्रधानमंत्री) , 1975 में वीवी गिरी (चैथे राष्ट्रपति), 1976 में के. कामराज (स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, 1980 में मदर टेरेसा (नोबेल पुरस्कार सम्मानित, मिशनरीज की संस्थापक), 1983 में आचार्य विनोबा भावे (स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, 1987 में खां अब्दुल गफ्फार खां (स्वतंत्रता सेनानी) पहले गैर-भारतीय, 1988 में एमजी रामचंद्रन (अभिनेता, तमिलनाडु के सीएम) मरणोपरान्त, 1990 में डाॅ. अंबेडकर (संविधान के रचयिता) मरणोपरान्त, 1990 में नेल्सन मंडेला (नोबेल पुरस्कार सम्मानित, रंगभेद विरोधी आंदोलन के नेता), 1991 में राजीव गांधी (सातवें प्रधानमंत्री) मरणोपरान्त, 1991 में सरदार वल्लभ भाई पटेल (पहले गृहमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, 1991 में मोरारजी देसाई (पांचवें प्रधानमंत्री), 1992 में मौलाना आजाद (पहले शिक्षा मंत्री) मरणोपरान्त, 1992 में जेआरडी टाटा, (उद्योगपति) मरणोपरान्त, 1992 में सत्यजीत रे (फिल्मकार), 1997 में एपीजे अब्दुल कलाम (वैज्ञानिक), 1997 में गुलजारीलाल नंदा (दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे), 1997 में अरुणा असफ अली (स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, 1998 में एमएस सुब्बालक्ष्मी (शास्त्रीय गायिका), 1998 में सी. सुब्रमण्यम (स्वतंत्रता सेनानी), 1998 में जयप्रकाश नारायण (स्वतंत्रता सेनानी, जेपी मूवमेंट के जनक) मरणोपरान्त, 1999 मंे पंडित रविशंकर (सितार वादक), 1999 में अमत्र्य सेन (नोबेल पुरस्कार सम्मानित अर्थशास्त्री), 1999 में गोपीनाथ बोरदोलोई (स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, 2001 में लता मंगेशकर (पाश्र्व गायिका), 2001 में उस्ताद बिस्मिल्ला खां (शहनाई वादक), 2008 में पंडित भीमसेन जोशी (शास्त्रीय गायक), 2014 में सचिन तेंडुलकर (क्रिकेटर), 2014 में सीएनआर राव (वैज्ञानिक और रसायनशास्त्री) 2014 मंे अटल बिहारी वाजपेयी (पूर्व प्रधानमंत्री), 2014 मंे पं. मदनमोहन मालवीय (शिक्षाविद) , 2019 में प्रणब मुखर्जी (पूर्व राष्ट्रपति) 2019 में भूपेन हजारिका (गायक) 2019 में नानाजी देशमुख (विचारक, समाजसेवी) आदि शामिल हैं।

इसे भी पढ़िए :  वाकई नागरिक मित्र लगी कोलकाता पुलिस कहीं चालान और जाम दिखाई नहीं दिया

 

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

three − three =