कांग्रेस के हित में जल्द हो राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर निर्णय, फाईव स्टार संस्कृति और धन प्रिय नेताओं को किया जाये नजरअंदाज

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देश के सबसे बड़े राजनैतिक दलों मे से एक कांग्रेस में 17वीं लोकसभा के चुनाव के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद श्री राहुल गांधी द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने के उपरांत अभी तक नये अध्यक्ष का चुनाव ना हो पाने से कारण कुछ भी हो पार्टी में और भी ज्यादा घमासान और निरकुशता नीचे से लेकर ऊपर तक बड़ रही है तो जिन नेताओं का इस पद पर चयन होने की उम्मीद है उनमें और उनके समर्थकों में अनकहे रूप से बेचैनी ओर झुझलाहट दिखायी देने लगी है। परिणाम स्वरूप अब पार्टी की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे है तो कुछ जिले और महानगरों में वहां के अध्यक्ष पद को लेकर पैसे के लेनदेन की इच्छा की चर्चाएं भी होने लगी है।
यह जग जाहिर है की कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई भी रहे इस पार्टी में कार्यकर्ताओं की रग रग में नेहरू गांधी परिवार का नाम कांग्रेस के रूप में बसा हुआ है इसलिए राहुल गांधी जी ने इस्तीफा दिया तो फिलहाल तुरंत उस पर निर्णय लेकर या तो पूर्ण कालिक नया अध्यक्ष अथवा कार्यवाहक प्रेसीडेंट के चुनाव के साथ ही कुछ बड़े प्रदेशों के लिए भी एक एक कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तुरंत चुना जाना चाहिए।
बीते दिवस डाॅ. करण सिंह ने कहा था की पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में विचार कर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाना चाहिए तो अब पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी द्वारा अध्यक्ष चुने जाने को लेकर सवाल खड़े किये गये है उनका कहना है की अब तक राहुल गांधी जी की जगह दूसरा अध्यक्ष चुन लिया जाना चाहिए था।
बताते चले की वरिष्ठ कांग्रेस नेता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री केन्द्र में कई विभागांे के मंत्री रह चुके सुशील कुमार सिंधे तथा उप्र के पूर्व राज्यपाल और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल बोरा और वर्तमान में राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत का नाम भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चर्चाओं में है मुझे लगता है की कांग्रेस के हित में और निकट भविष्य में कुछ प्रदेशों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए सोनियां गांधी, राहुल गांधी ओर प्रियंका गांधी आदि से सलाह कर तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा यह तय कर कार्यप्रणाली कुछ भी अपनायी जाये मगर घोषणा की जानी चाहिए।
क्यांेकि जब से राहुल गांधी जी ने स्तीफा दिया है और वापस लेने से इनकार किया उसके बाद जो इस दल में इस्तीफा देने का सिलसिला शुरू हुआ वो रूक नही रहा है कुछ नेता आत्महत्या करने की बात करते है कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है की अब कांगे्रस की मजबूती और भविष्य में होने वाले चुनावों में पार्टी के पक्ष में अच्छे परिणामों के लिए इस मामलें में तुरंत निर्णय तो होना ही चाहिए दल में जिला और नगरों तक में चल रही अनुशासन हीनता ओर पैसे के लेनदेन की बातों पर विराम लगाने के अतिरिक्त पार्टी के बड़े नेताओं को निर्देश दिये जाये की वो जब प्रवेक्षक के रूप में किसी भी मामले में देश का भ्रमण करे तो सबंधित गांव कस्बों और महानगर व जिलों के कांग्रेसियों के यहां ही उनके इच्छानुसार बैठकें करे और खाना नाश्ता अलग अलग कांग्रेसियो के यहां ले ओर सम्भव हो तो ऐसे कांग्रेस नेताओं के विश्राम और आराम की व्यवस्था हो जिससे जमीन से जुड़े गरीब मगर भरोसेमंद आस्थावान कार्यकर्ता भी वहां पहुंच सके इससे जहां मन से नये पुराने कांग्रेसी पार्टी से जुड़ेगे वही उनमें एक जोश और उत्साह भी उत्पन्न होगा और इसी कड़ी में अब जो संगठन की ईकाईयां गठित हो उनमें भी पुराने और वफादार जमीन से जुड़े कांग्रेसियों को पदों पर बैठाकर पार्टी को आगे लाने ओर जोड़ने का मौका देते हुए फाईव स्टार संस्कृति और होटलों में रहने की मंशा वाले नेताओं को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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