डायबिटीज से बढ़ जाता है पैंक्रियाज के कैंसर का खतरा, साइलेंट किलर भी है ये बीमारी

23
loading...

नई दिल्ली। डायबिटीज के मरीजों में पैंक्रियाज (अग्नाशय) के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म’ में छपे शोध में यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि पैंक्रियाज के कैंसर का जल्द पता लगाना मुश्किल है। इसकी पहचान आखिरी स्टेज में हो पाती है। उस वक्त कैंसर शरीर के अन्य अंगों में पहुंच चुका होता है। शोध के दौरान 2.5 करोड़ लोगों के रक्त में ग्लूकोज के स्तर और पैंक्रियाज कैंसर के संबंध का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने से पैंक्रियाज कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। शोध के बाद वैज्ञानिक चेओर-यंग ने कहा, ‘डायबिटीज इस कैंसर का प्रमुख कारक है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों के साथ उन लोगों को भी सचेत रहना चाहिए, जो डायबिटीज से ग्रस्त तो नहीं है, लेकिन उनके खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगा है।’ पैंक्रिएटिक कैंसर अग्नाश्य का कैंसर होता है।

जानकारी के अनुसार प्रत्येक साल अमेरिका में 45000 लोगों की इस रोग के कारण मृत्यु होती है। इस कैंसर को शांत मृत्यु (साइलेंट किलर) भी कहा जाता है क्योंकि आरंभ में इस कैंसर को लक्षणों के आधार पर पहचाना जाना मुश्किल होता है और बाद के लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। सामान्यत: इस कैंसर के लक्षणों में एबडोमेन के ऊपरी हिस्से में दर्द होता है, भूख कम लगती है तेजी से वजन कम होने की दिक्कतें, पीलिया, नाक में खून आना, उल्टी होना जैसी शिकायत होती है।

बड़ी उम्र (60 से ऊपर), पुरुष, धूम्रपान, खाने में सब्जियों और फल की कमी, मोटापा, मधुमेह, आनुवांशिकता भी कई बार पैंक्रिएटिक कैंसर की वजह होते हैं। पैंक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित ज्यादातर रोगियों को तेज दर्द, वजन कम होना और पीलिया जैसी बीमारियां होती हैं। डायरिया, एनोरेक्सिया, पीलिया वजन कम होने की मुख्य वजह होती है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ने इसके लिए किसी भी तरह के दिशा-निर्देश नहीं बनाए हैं हालांकि धूम्रपान को इस कैंसर के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक जिम्मेदार माना जाता है। सितंबर 2006 में हुए एक अध्ययन में कहा गया था कि विटामिन डी का सेवन करने से इस कैंसर के होने की संभावना कम हो जाती है।

पैंक्रिएटिक कैंसर का इलाज, इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर की अवस्था कौन सी है। रोगी की सजर्री की जाती है या फिर उसे रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी दी जाती है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार अब तक इस कैंसर का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है। कैंसर सोसाइटी का कहना है कि 20 से 30 प्रतिशत पैंक्रिएटिक कैंसर की वजह ज्यादा धूम्रपान करना होता है। गौर करने वाली बात ये है कि यह कैंसर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा होता है।

कहां और कैसे होता है पैनक्रियाज

पैनक्रियाज रीढ़ के हड्डी के सामने और पेट में काफी गहराई में होता है, यही कारण है कि आमतौर पर पैनक्रियाज का कैंसर चुपचाप बढ़ता रहता है और काफी बाद में जाकर इसका पता चलता है। इस बीमारी में शुरूआत में कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते और अगर दिखते भी हैं तो अन्य बीमारियों से मिलते जुलते होते हैं।

इन घरेलू औषधियों का कर सकते हैं इस्तेमाल

नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण और स्क्रीनिंग कराने से इस रोग से बचा जा सकता है। कीमोथेरपी और रेडियोथेरपी के साथ कुछ घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके इससे ग्रस्‍त कई रोगी इसे ठीक करने में सफल हुए हैं।

ब्रोकोली

पेनक्रियाज के उपचार के लिए ब्रोकोली को बहुत ही उत्तम औषधि माना जाता है। ब्रोकोली के अंकुरों में मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर युक्‍त सेल्‍स से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही यह एंटीऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और रक्त के शुद्धिकरण में भी मदद करते हैं।

ग्रीन टी

पै‍नक्रियाज में होने वाली समस्‍या का दूर करने और इसके उपचार के लिए नियमित रूप से प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करें। क्‍योंकि ग्रीन टी में मौजूद तत्व ऐसी कोशिकाओं को कम या न के बराबर पनपने देते हैं।

एलोवेरा

यूं तो एलोवेरा बहुत से रोगों में फायदा पहुंचाता है लेकिन पैनक्रियाज में इंफेक्‍शन में यह बहुत ही फायदेमंद है। इसे पैनक्रिऑटिक कैंसर के उपचार के लिए उत्तम माना जाता है। नियमित रूप से ताजा एलोवेरा जैल का सेवन करने से लाभ मिलता है।

सोयाबीन

सोयाबीन से भी पैनक्रियाज के उपचार में सहायता मिलती है। इसमें कुछ एंजाइम होते हैं जो हर तरह के कैंसर को रोकने में मदद करते हैं। दिनचर्या में सोयाबीन के अंकुर या पकाए हुए सोयाबीन का सेवन करने से पैनक्रियाज और स्‍तन कैंसर में लाभ मिलता है।

जिन्सेंग

जिन्सेंग एक प्रकार की जड़ी बूटी है जो शरीर में बाहरी तत्वों के खिलाफ प्रतिरोधक शक्ति का निर्माण करती है। यह जड़ी बूटी भी पै‍नक्रियाज को काफी हद तक ठीक रखती है।

लहसुन

लहसुन में औषधीय गुण होते हैं। जो कई रोगों में फायदा पहुंचाते है। इसमें बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एलीसिन, सेलेनियम, विटामिन सी, विटामिन बी आदि भी होते है। इन सब तत्‍वों के कारण पैनक्रियाज में होने वाले इंफेक्‍शन और कैंसर से बचाव करता है और कैंसर हो जाने पर उन्हें बढ़ने से रोकता भी है।

हरड

कीमोथेरपी और रेडियोथेरेपी के साथ हरड का प्रयोग भी पैनक्रियाज में इंफेक्‍शन और कैंसर को काफी हद तक ठीक करता है। इसमें उत्तेजना और कीटाणुओं को रोकने वाले और स्तन और पैनक्रिया कैंसर के उपचार के लिए भरपूर गुण होते हैं।

अंगूर

अंगूर में पोरंथोसाईंनिडींस की भरपूर मात्रा होती है, जिससे एस्ट्रोजेन के निर्माण में कमी होती है, जिससे फेफड़ों के कैंसर के साथ पैनक्रियाज के कैंसर के उपचार में भी लाभ मिलता है।

अमरुद और तरबूज

अमरुद, तरबूज, एप्रिकॉट जैसे फलों में लाइकोपीन की मात्रा अधिक होती है। इन फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करने से भी पैनक्रियाज रोग को ठीक होने में सहायता मिलती है। साथ ही ताजे फलों का और सब्जियों का रस लेने से भी पै‍नक्रियाज में होने वाली परेशानियों से काफी हद तक लाभ मिलता है।

गेहूं का ज्‍वारा (व्हीटग्रास)

पै‍नक्रियाज की चिकित्सा के लिए व्हीटग्रास अत्यधिक लाभकारी होता है। यह कैंसर युक्त सेल्‍स को कम करने में भी सहायता करता हैं। गेहूं का ज्‍वारे का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

srcjg

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

5 × four =