बिना किसी रसायन के पांच साल तक सुरक्षित रहता है अप्पेमिडी आम

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नई दिल्ली । अलग-अलग तरह की खुशबू से भरपूर अप्पेमिडी आम का बना अचार न केवल दुनिया भर में प्रसिद्ध है बल्कि इसका करोड़ों रपए का कारोबार होता है। अप्पेमिडी के अचार की खास बात यह है कि इसमें आम की सुगंध हावी होती है क्योंकि यह आम अत्यधिक सुगंधित होता है।

जीरा, कपूर और नारंगी के तेज सुगंध वाले अप्पेमिडी आचार की विशेषता है कि इसे पांच साल से अधिक समय तक बिना किसी रसायन के सुरक्षित रखा जा सकता है।अप्पेमिडी आम के विशिष्ट किस्मों का भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद -केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) लखनऊ में मूल्यांकन किया गया है। इसके पौधे को उत्तरी कर्नाटक के पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाए जाने वाले अप्पेमिडी पेड़ों से कलम लाकर तैयार किया गया है।

संस्थान की वैज्ञानिक डा. वीना गौड़ा ने अपनी डाक्टरेट की उपाधि के लिए अप्पेमिडी आम पर 2013 से 2018 तक शोध कार्य किया था। कर्नाटक के चिकमगलूर जिले में विविधता क्षेत्र में अप्पेमिडी आमों का एक सव्रेक्षण किया गया था जिसमें लगभग 40 किस्म के अप्पेमिडी एकत्र किए गए। चालीस तरह के इन आमों में से ‘‘कुदिगे’ और ‘‘अनरुरु’ किस्म को स्वाद में सबसे अच्छा पाया गया।

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इन आमों पर किए गए शोध से पता चला है कि इनमें अनेक प्रकार के अनूठे स्वाद और सुगंधित वाष्पशील यौगिक तत्व मौजूद है जो इनकी किस्म को दुर्लभ एवं अद्वितीय बनाते हैं।अप्पेमिडी आम सामान्य आम से कुछ अलग होता है। यह गोल, तिरछे या लंबे होते हैं लेकिन अधिकांश किस्में तेज सुगंध के साथ छोटे आकार की होती हैं। किस्मों के कई समूह सुगंध के आधार पर बनाए जाते हैं। एक समूह में सुगंध जीरा, कुछ में कपूर जैसी गंध और कई में कच्ची नारंगी की महक होती है। इन किस्मों में सामान्य आम का स्वाद नहीं होता है। फलों से लगी डंठल मोटी, बीज छोटे और आम तौर पर लंबे फलों के आकार के साथ स्वाद में ये किस्में अत्यधिक खट्टी होती है। खट्टापन इन किस्मों को ताजे फल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अनुपयुक्त बना देता है।संस्थान के निदेशक शैलेन्द्र राजन के अनुसार अप्पेमिडी शब्द की उत्पत्ति कन्नड़ से हुई है जिसमें ‘‘मिडी’ का अर्थ होता है ‘‘कोमल आम’। इसके आम में गुठली बनने से पहले ही आचार बना दिया जाता है।

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देश में सामान्यत: आम में गुठली बन जाने के बाद ही आचार बनाया जाता है। अचार के लिए उत्तर भारत में अत्यधिक इस्तेमाल होने वाले राम केला और बंगाल में अश्विन जैसी किस्मों की तुलना में अप्पेमिडी के आम बहुत ही छोटे होते हैं। इसकी अनुपम सुगंध के कारण उपभोक्ता इसे बेहद पसंद करते हैं।

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इस तरह के सुगंधित आम के अचार के लिए लोग अच्छी धन राशि का भुगतान करने के लिए तैयार रहते हैं। भारत एक से एक अनूठे आम की विविधता वाले देश के रूप में जाना जाता है। आम का भारतीय अचार भी विश्व प्रसिद्ध है। यहां हजारों टन आम का अचार घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर तैयार किया जाता है।

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