राजीव गांधी के हत्यारों को सजा क्यो नही, ऐसे तो देश में फैल सकती है अराजकता

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पूर्व प्रधानमंत्री के शहीदी दिवस पर उन्हे नमन करते हुए

कोई भी सांप्रदायिक या धार्मिक ताकत, जो धर्म निरपेक्षता को विरोध करती हो, अथवा कोई भी राजनीतिक ताकत जो सांप्रदायिक या धार्मिक हितों का आसरा लेती हो, उसे किसी भी सूरत में राष्ट्र को कमजोर बनाने की इजाजत नही दी जानी चाहिए। ऐसे उच्च विचारों से सबंध संदेश नागरिकों को देने वाले हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी का देश और उनके प्रशंसक शहीद दिवस मना रहे है आज कांग्रेसियों द्वारा 28वें शहीद दिवस पर उनका स्मरण कर उन्हे अपनी श्रद्धाजंलि ओर पुष्पाजंलि देते हुए उनके पे्ररणा स्त्रोत प्रसंगों का याद किया जा रहा है।
20 अगस्त 1944 को जन्में स्व0 राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे तो देशवासियों ने युवा हदय सम्राट के नाम से भी पुकारते थे। सुरक्षा का प्रोटोकाॅल तोड़ अपने प्रशंसकों और समर्थकों के बीच घुस जाने और उनसे बतियाने के चलते स्व0 राजीव गांधी आम आदमी की भावनाओं से जुड़े जन नेता थे।
21 मई 1991 को उनकी हत्या कर दी गयी। उनके साथ मारे गये लोगो के परिवार जनों द्वारा दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की जाती रही है और देशभर में फैले कांग्रेसी और निष्पक्ष विचार धारा वाले राजनेताओं और जनता का भी मत रहा है की उनके हत्यारों को सजा मिले।
लेकिन यह कितने ताज्जुब और आश्चर्य की बात है की स्व0 राजीव गांधी के 28वें शहीदी दिवस से पहले दिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीसामी द्वारा कहा गया की उनकी सरकार राजीव गांधी हत्याकांड के सातों दोषियों को रिहा करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप लिया गया फैसला और पास प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है इस मामले में निर्णय उन्हे ही लेना है।
बताते चले की हत्यारों के परिवार सातों दोषियो की रिहाई की अपील कर रहे है उस पर तो तमिलनाडु सरकार फैसला ले रही है लेकिन स्व0 प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मारे गये लोगो के परिवारों द्वारा 2014 में लिये गये तमिलनाडु सरकार के हत्यारो की रिहाई के फैसले का विरोध किया गया है। सरकार को उनकी बात और अपील क्यो नही दिखायी दे रही।
कोई भी सरकार ओर उसकी कैबिनेट अपने हिसाब से फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होती है लेकिन यह ताज्जुब की बात है की देशभर के गली मौहल्लांे तक में फैले कांग्रेस के नेताओं द्वारा इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए अपने नेता पुर्व प्रधानमंत्री स्व0 राजीव गांधी के हत्यारों को सजा दिलाने मांग करने के साथ साथ अभियान क्यो नही चला रहे राजीव गांधी के हत्यारों को सजा क्यो नही, ऐसे तो देश में फैल सकती है अराजकता
अत्याचार ओर उत्पीड़न तो किसी का भी किसी भी प्रकार से मानसिक हो या आर्थिक शारीरिक हो या समाजिक नही होना चाहिए लेकिन यहां तो बात पूर्व प्रधानमंत्री और एक जनमानस के लीडर के हत्यारों को छोड़ने और सजा दिलाने की चल रही है।
मेरा स्पष्ट मानना है की समाज में कानुन व्यवस्था और शांति का सम्राज्य एवं भय मुक्त वातावरण कायम रखने हेतु किसी को भी आराजकता फैलाने की अनुमति नही दी जानी चाहिए ओर जब मामला प्रधानमंत्री रहे व्यक्ति से सबंध हो तो उसमें दोषियों को तो सजा मिलनी ही चाहिए वरना प्रमुख व्यक्तियो की हत्याओं का सिलसिला विभिन्न कारणों ओर उद्ेश्यों को लेकर बढ़ सकता है। इस तथ्य को दृष्टिगत रख आम लोगो के इस मत में दम नजर आता है की तमिलनाडु के महामहीम राज्यपाल को कैबिनेट का यह फैसला ना मानकर राजीव गांधी के हत्या दोषियोेे की सजा बरकरार रखनी चाहिए। जनहित में तो यही कहा जा सकता है बाकी जो करना है वो सरकार और राज्यपाल को करना है। पूर्व प्रधानमंत्री के शहीदी दिवस पर उन्हे नमन करते हुए उनके समर्थकांे यह सवाल मुहबाय खड़ा है।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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