संयुक्त परिवार है खुशियों का आधार, दादा दादी, ताऊ ताई के प्यार मे है जीवन की मिठास

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आज पूरे विश्व में अंतराष्ट्रीय संयुक्त परिवार दिवस मनाया जा रहा है अगर ध्यान से देखे तो जब से जनसंख्या कम करने के अभियान शुरू हुए है तब से परिवारों में धीरे धीरे सदस्यों की संख्या कम होती जा रही है और अब तो कारण कोई भी हो कुछ नागरिको में अलग रहने की बढ़ती लालसा के चलते संयुक्त परिवार टूटने लगे है जिसके कई नुकसान भी अब समय के साथ साथ नजर आने लगे है क्योकि जब बेटा बहु पोते पोती मां बापों के साथ मिलकर संयुक्त परिवारों में रहते थे तो कम आमदनी में भी ज्यादा सुविधाएं तो मिलती ही थी बच्चे भी आसानी से पल जाते थे तथा रिश्तों की गरिमा और समयनुसार निर्णय लेने की ताकत भी उनमें पुख्ता होती थी तथा हर समय किसी ना किसी से बोलने चालने अथवा डांट फटकार सुनने या प्यार दुलार के चलते बच्चे हो या बड़े कई ऐसी बीमारियों से बच जाते थे जिनके ईलाज पर आज की तारिख में काफी पैसा खर्च करना पढ़ता है क्योकि घर के बढ़े की इच्छाओं का बच्चे ध्यान रखते थे और उनकी भावनाओं का बड़े आदर तो करते ही थे। अच्छे बुरे का ध्यान भी रखते थे। अब कुछ वर्षा से गांव ही नही बड़े शहरो में भी संयुक्त परिवारों को महत्व दिया जाने लगा है कारण कुछ भी हो लेकिन इससे अपनेपन की भावना ओर तीनों पीड़ियों बाप बेटे ओर पोते को जीवन सुखमय और प्रसन्तताओं से भरा होने लगा ओर जो अपने मां बापों से अलग रहना चाहते है उनके समक्ष धीरे धीरे जो कठिनाईयां उत्पन्न होगी या हो रही है वो भी देर सवेर बुजूर्गो के प्यार और अपने पन को समझकर आखिर एक छत के नीचे इकट्ठा हो ही जायेगे।
कुल मिलाकर यह कहने में कोई हर्ज नही है की संयुक्त परिवार है साथ तो सबकुछ है आपकें पास।
परेशानियों में आपका सहारा बनता है और हौंसला बढ़ाता है संयुक्त परिवार इससे ही मिलती है जीवन मे खुशियां बच्चों में पैदा होता है आत्मविश्वास तथा सोशल सिक्योरिटी का होता है एहसास। परिवार की एकता से हर सुविधा का होता है एहसास और कमियां होती है दूर किसी की चलती गाड़ी का पहिया सबके साथ होने से कभी नही रूकता क्योकि सब एक दूसरे का रखते है ध्यान और भावनाओं का करते है आदर, बच्चों को मिलते है अच्छे संस्कार, बुजूर्गो को मिलता है प्यार ओर अपनेपन का एहसास।
1993 में यूएन की जनरल असेम्बली में इस दिन को मनाने की शुरूआत हुई इसका उद्देश्य इंटरनेशनल कम्यूनिटी को परिवारो के साथ जोड़ना था ओर तब से 15 मई को हर वर्ष मनाया जाता है इंटरनेशनल डे आॅफ द फैमिली।
अपने देश में भरपूर तरिकें से इसकी शुरूआत कब हुई यह तो नही कहा जा सकता लेकिन दादा दादी, ताऊ ताई, चाचा चाची का जो प्यार और दुलार मिलता है तथा वक्त पड़ने पर बुजूर्गो द्वारा सही शिक्षा और राय देकर निश्चल रूप से दी जाती है सबकों राय वही है संयुक्त परिवारों का मजबूत आधारं अगर ध्यान से देखे ओर सोचे तो संयुक्त परिवार के फायदे ज्यादा नुकसान कम है ओर मेरी निगाह में तो सबके मिलकर साथ रहने का जो लाभ है उसका कोई मुकाबला ही नही है अगर थोड़ा सा अपने स्वार्थ और हितो तथा अहम को त्याग दिया जाये तो संयुक्त परिवार खुशहाली का सबसे बड़ा माध्यम है जिसमें सबका भला ही भला है बुराई दूर तक नजर नही आती । संयुक्त परिवार और मां बापों के प्यार और रिश्तों की गर्माहट को महसूस ना करने वाले इसका महत्व उनसे पूछे जिनके पास यह रिश्ते और प्यार करने वाले नही है।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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