8वीं पुण्य तिथि पर विशेष: सरकार मरणोपरांत टिकैत को दे पदम श्री तथा दिल्ली लखनऊ और सिसौली में बनवाये स्मारक

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बाबा टिकैत ने कराया था किसान की ताकत का अहसास, अंकित बिश्नोई ने उठायी मांग

देशभर में बिना किसी पद के किसानों की आवाज बुलंद कर उन्हे उनका अधिकार गांधी वादी तरिके से दिलाने के मामले में बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत का कोई मुकाबला नही है। 6 अक्टूबर 1935 को मुजफ्फनगर जिले के ग्राम सिसौली में चैहल सिंह नामक किसान के परिवार मे जन्में और 15 मई 2011 को देशभर के किसानों ओर मजदूरो को रोता बिलखता छोड़ गये बाबा टिकैत का आज देशभर में जन्मदिन मनाया गया। किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत इतिहास में दर्ज वह नाम है, जिसने देश के भोले-भाले किसानों को बोलना सिखाया। उनके सीने में अपने हक और हुकूक के लिए सरकार से टकराने का माद्दा पैदा किया। वर्ष 1986 में मुजफ्फरनगर के करमूखेड़ी बिजलीघर से उठी किसान आंदोलन की चिंगारी की तपिश को देश की केंद्र और प्रदेश सरकारों ने कई बार महसूस किया। किसानों को आज भी वो दौर याद होगा, जब भाकियू के रणसिंघे की गरजना से सरकारें थर्रा जाती थीं। टिकैत देश के ऐसे पहले किसान नेता हुए हैं, जिनके दौर में सिसौली सीधे हाटलाइन पर रहती थी।

चैधरी महेंद्र सिंह टिकैत और उनकी भाकियू के इंकलाबी इतिहास में मेरठ का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। देश ही नहीं पूरी दुनिया में मेरठ और भाकियू एक साथ सुर्खियों में रहे थे। 27 जनवरी 1988 से लेकर 19 फरवरी 1988 तक के वो 25 दिन शायद ही कोई मेरठवासी अभी तक भूल पाया हो। किसानों की समस्याओं को लेकर मेरठ कमिश्नरी के पास सीडीए मैदान में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चै. महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लाखों किसान जमा थे। देखते ही देखते सीडीए का मैदान भाकियू के आंदोलन स्थल में तब्दील हो गया था।
…और बन गए किसानों के मसीहा
आंदोलन के 24 दिन बाद प्रदेश सरकार की ओर से मंत्री सईदुल हसन व हुकुम सिंह ने आकर वार्ता की। इस पर यहां धरना तो समाप्त हो गया, लेकिनटिकैत ने प्रदेश सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने किसानों से बिजली के बिल न देने की अपील की थी। कहा कि किसी भी बिजली अधिकारी को गांव में न घुसने दें। इसका असर हर गांव में हुआ। इस आंदोलन से ही टिकैत किसानों के मसीहा बने और देश दुनिया में नाम बुलंद हुआ। यही आंदोलन था, जिसके बाद टिकैत ने 25 अक्तूबर 1988 को नई दिल्ली स्थित वोट क्लब पर आंदोलन का बिगुल फूका था।
उधर लाखों की संख्या में आए किसानों के आंदोलन की आग के शोले लखनऊ तक भड़के। आंदोलन को कुचलने के लिए तत्कालीन कमिश्नर वीके दीवान ने बताते चले की उस समय के मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह से बात करके 20 कंपनी । पीएसी, 11 कंपनी सीआरपीएफ लगाई। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए मेरठ-मुजफ्फरनगर मार्ग पर लगातार फ्लैग मार्च कराया। आंदोलन के दौरान सात किसानों की ठंड से मौत भी हुई, लेकिन किसानों ने धैर्य नहीं छोड़ा। यहां सैकड़ों भट्ठियां चढ़ीं, गांवों से खाना बनकर आता रहा। उस वक्त किसानों ने स्वयं ही यातायात व्यवस्था का संचालन किया था। किसी की हिम्मत धरना स्थल की ओर वाहन ले जाने की नहीं होती थी। लोकदल के अध्यक्ष हेमवती नंदन बहुगुणा, पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चै. चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी, चै. अजित सिंह, मेनका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी समेत देशभर के नेताओं ने टिकैत के आंदोलन का समर्थन किया। तो उस दौरान रहे डीएम विजय शर्मा ने डाॅ. ईश्वर सिंह सहित शाति बनाये रखने हेतु कई प्रमुख जाट व किसान नेताओं का सहयोग लिया था।
ताज और राज के मोह से हमेशा दूर रहे बाबा टिकैत
किसानों के मसीहा चैधरी महेंद्र सिंह टिकैत को त्याग एवं सेवा का प्रतीक माना जाना था। उन्हें कभी भी ताज और राज का मोह नहीं रहा। किसानों की सेवा को वह अपना धर्म मानते थे। दहेज प्रथा, ब्रह्मभोज, भू्रण हत्या, नशाखोरी जैसी कुरीतियों के वह विरोधी थे। आंदोलनों से वह किसानों की बात मनवाते थे। टिकैत के कई बड़े आंदोलनों ने सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दिया।
बाबा टिकैत के जीवन पर एक नजर चै. महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म कस्बा सिसौली में छह अक्टूबर सन 1935 में एक किसान परिवार में हुआ। गांव के ही एक जूनियर हाईस्कूल में उन्होने 7वीं शिक्षा प्राप्त की। इनके पिता चैहल सिंह टिकैत बालियान खाप के चैधरी थे। पिता की मृत्यु के समय चै. महेन्द्र सिंह टिकैत मात्र आठ वर्ष के थे, तभी इन्हें बालियान खाप की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। बालियान खाप का चैधरी रहते समय दहेज प्रथा, मृत्यु भोज, दिखावा, नशाखोरी, भू्रण हत्या आदि सामाजिक कुरीतियों व बुराइयों से दूर रहने का किसानों को पाठ पढ़ाते थे। शादी विवाह में दहेज देने और लेने का वह विरोध करते थे। बारात में सिर्फ पांच आदमी ले जाने के पक्षधर थे। 15 मई 2011 को उनका निधन हो गया।
ऐसे हुआ था भाकियू का उदय अस्सी के दशक में किसान परेशान था। फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल रहे थे। सिंचाई के बिना फसल खराब हो जाने आदि समस्याओं को लेकर 17 अक्टूबर 1986 को सिसौली में एक महापंचायत हुई। जिसमें सभी जाति-धर्म के लोगों, खाप चैधरियों, किसानों ने भाग लिया और भारतीय किसान यूनियन के गठन की घोषणा की गई। सर्वसम्मति से चै. महेन्द्र सिंह टिकैत को इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
अपने जीवन में निस्वार्थ भावना से किसानों के लिए आंदोलन कर सरकार की चूलें हिला देने वाले बाबा टिकैत को किसानों ने महात्मा किसान मसीहा बेताज बादशाह और आज का गांधी के खिताब से नवाजा। बाबा टिकैत की ताकत का इससे ही एहसास होता है की उस समय के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को किसानो से बात करने के लिए सिसौली आना पड़ा और चिलचिलाती धूप में बैठकर हथेलियां जोड़कर करवा से पानी पीना पड़ा था। बाबा टिकैत ने अलीगढ़ जनपद के खैर, मुजफ्फनगर के भोपा सहित अनेकों छोटे बड़े आंदोलन किये और आज उनका नाम अमर हो गया है।
मजीटिया बोर्ड यूपी के सदस्य समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक सोशल मीडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव आॅनलाईन न्यूज चेनल ताजाखबर.काॅम के चेयरमेन अंकित बिश्नोई द्वारा महान किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत के पुण्यतिथि पर पुनः अपनी पुष्पाजंलि और श्रद्धाजंलि देते हुए केन्द्र सरकार से मांग की है की किसान नेता को मरर्णोपरांत पदमश्री देकर नवाजा जाये तथा सिसौली, लखनऊ व दिल्ली मे सरकार अपने खर्च पर उनके स्मारक बनवार कर अन्नदाता किसानो की भावनाओं का आदर व सम्मान करे।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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