22 अक्टूबर को होंगे बीसीसीआइ के चुनाव

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नई दिल्ली, 22 मई (जा) सीओए के चुनाव कराने के फैसले से बोर्ड के कई अधिकारी हैरान हैं। बीसीसीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसका मतलब है कि 2018 में चुनाव कराने वाली दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) को दोबारा चुनाव कराने होंगे। डीडीसीए के जिन अधिकारियों का अभी कार्यकाल भी खत्म नहीं हुआ है वह उससे पहले ही अपना पद छोड़ देंगे। अधिकारी ने कहा कि इसमें सबसे मजाकिया बात यह है कि अगर किसी को लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक नियुक्त किया गया है और उसका कार्यकाल दो साल का है तो उसे कैसे हटाया जा सकता है। अगर किसी राज्य संघ के चुनाव नहीं हुए हैं तो यह बात मायने रखती है, लेकिन आप वहां चुनाव कैसे करा सकते हैं जहां चुनाव का समय ही नहीं है? विनोद राय को लग रहा है कि वह कानून से बड़े हैं। वहीं राज्य संघ अधिकारी ने कहा कि क्या ये संदेहास्पद नहीं है कि उन्होंने सर्वोच्च अदालत की छुट्टियां शुरू होने का इंतजार किया और फिर चुनावों की तारीखों का ऐलान किया, वह इस बात को अच्छे से जानते थे कि न्याय मित्र और राज्य संघों के बीच कुछ मुद्दे हैं सुलझाना बाकी है।
आदित्य वर्मा ने उठाए सवाल
क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ बिहार यानि सीएबी के सचिव आदित्य वर्मा ने कहा कि अगर यह चुनाव तय समय में हो जाता है तो सीएबी इसका स्वागत करते हुए अपने ओर से शुभकामनाएं देता है। मैं एक याचिकाकर्ता होने के नाते सीओए तथा न्याय मित्र से पूछना चाहता हूं कि पिछले साल नौ अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक मे सीओए के द्वारा भेजे गए मेल के बाद कितने राज्य संघों ने नए संविधान का पालन किया है। कुछ राज्य क्रिकेट संघों का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए रुका हुआ है। सबसे आश्चर्यजनक बिहार का मामला है। वर्तमान में बिहार क्रिकेट संघ यानी बीसीसीए को चलाने वाले शख्स अयोग्य साबित हो चुके हैं। बिहार क्रिकेट संघ का निबंधन रद है।

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