राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया

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जयपुर। राजस्थान में दो चरणों में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य के 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का इस्तेमाल किया। राज्य में नोटा में डाले गये मत सीपीआई, सीपीएम और बसपा के उम्मीदवारों को मिले वोटों से ज्यादा रहे हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भी लगभग इतने ही, 327902 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य के 3 लाख 27 हजार 559 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। यह राज्य की 25 लोकसभा सीटों में डाले गये कुल मतों के 1.01 प्रतिशत के बराबर है।

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नोटा में पड़े वोटों की संख्या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी, और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को मिले मतों से ज्यादा है। सीपीआई को 0.14 प्रतिशत मत मिले हैं, सीपीएम को 0.20 प्रतिशत जबकि बसपा को 1.07 प्रतिशत मत मिले हैं।नोटा का सबसे अधिक उपयोग आदिवासी बहुल बांसवाड़ा में किया गया है। यहां नोटा का इस्तेमाल 29962 मतदाताओं ने किया जो कुल मतदाताओं का 2.08 प्रतिशत है।

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उदयपुर में 28179 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया जो कुल मतदाताओं का 1.94 प्रतिशत रहा। वहीं जालौर में 1.3 प्रतिशत या 17714, चित्तौड़गढ़ में 1.2 प्रतिशत या 17528, और भीलवाड़ा में 1.33 प्रतिशत या 17418 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से अलवर में 0.43 प्रतिशत (5385) मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया, वहीं भरतपुर में 0.49 प्रतिशत (5638 मतदाताओं) , जयपुर शहर में 0.45 प्रतिशत (6522 प्रतिशत) और दौसा में 0.7 प्रतिशत (7394) मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। राज्य में इन सभी जिलों के अलावा नोटा बटन का इस्तेमाल अन्य क्षेत्रों में भी किया गया है।

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