यूपी बोर्ड द्वारा बढ़ाई गयी 5 गुना स्कू्रटनी फीस पर मुख्यमंत्री छात्र छात्राओं के हित में लगाये रोक

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स्कुलों की मान्यता के लिए यूपी बोर्ड द्वारा निधारित 10 हजार रूपये की फीस बढ़ाकर 30 हजार रूपये कर दी गयी जो किसी भी रूप में गलत नही कही जा सकती क्योकि अब स्कूल कोई शिक्षा के मंदिर तो रहे नही मोटी कमाई के माध्यम बन गये है इसलिए अगर निधारित फीस और भी बढ़ा दी जाती है तो भी शायद स्कूल संचालक पर कोई विशेष फर्क नही पड़ने वाला था।
लेकिन परिक्षाओं में शामिल छात्र छात्रा अपनी कापी का प्रयोगिक परिक्षा की स्कूटनी कराना चाहेगे तो अब उन्हे 100 रूपये के स्थान पर 500 रूपये शुल्क जमा करना पड़ेगा।
मुझे लगता है की यूपी बोर्ड का यह निर्णय किसी भी रूप मे उचित नही है क्योकि पढ़ने वाले छात्र छात्राओं का इनकम का कोई मजबूत साधन नही होता है और नौकरी वो करते नही ऐसे में स्क्रूटनी फीस 100 के स्थान पर 500 रूपये करना किसी भी रूप में उचित नही है यह छात्र छात्राओं ओर उनके अभिभावकों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न ही कहा जा सकता है।
जबकि इसे बढ़ाने की बजाय अगर समाप्त कर दिया जाये या 100 की जगह 20 रूपये भी कर दिया जाता तो शिक्षा विभाग पर कोई बहुत बड़ा आर्थिक बोझ पड़ने वाला नही था। मेरा मानना है की हर बच्चे को साक्षर बनाने की भावना रखने वाले अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को यूपी बोर्ड के इस फैसले पर तुरंत रोक लगाते हुए स्कूल संचालकों आदि द्वारा बढ़ाई जाने वाली फीस पर भी लगाये प्रतिबंध।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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