बीते 70 साल में कभी भी सभी घोषणाएं पूरी नही कर पाये नेता, तो राजनैतिक दल वायदे करते ही क्यो है?

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2019 में गठित होने वाली 17वीं लोकसभा के लिए पहले चरण के चुनाव सम्पन्न हो चुके है बाकी के लिए नामांकन प्रचार की कार्यवाही जारी है भाजपा और कांग्रेस तथा गठबंधन सहित दक्षिण भारत में सक्रिय क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए बड़े बड़े वायदे करने के साथ साथ वोटरों के हित में अनेकों काम करने की घोषणाएं की जा रही है।
बीते लगभग 70 साल से अपने देश में कम या ज्यादा राजनैतिक दलों के नेताओं और पार्टियों ने लिखित घोषणा पत्र जारी कर या मौखिक वायदे करके जनता को लुभाने का काम तो बहुत किया लेकिन सवाल यह उठता है की क्या राजनैतिक दल अपनी बातों ओर वायदों पर पूरा उतर पाये तो मेरी सोच भले ही कुछ भी हो लेकिन इस मामले में सत्य क्या है यह सोचना मतदाताओं का काम है।
पिछले माह राजनैतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों को लेकर खुब चर्चाएं चली तथा कई मोर्चो से यह आवाज उठी की जब नेता अपने वायदे पूरे नही कर सकते तो घोषणा क्यो करते है।
70 साल पहले ना तो मै था और राजनीति मे इतनी गिरावट शायद महसूस की जाती थी जितनी अब कही कही नजर आती है। इसलिए तब राजनैतिक दलों ने वोटरो को लुभाने के लिए क्या किया और क्या नही यह तो मै विश्वास के साथ नही कह सकता मगर केन्द्र की वर्तमान सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों में जो वायदे किये थे। वो तो सारे पूरे नही हो पाये जिसके लिए समय असमय केन्द्र सरकार की आलोचना भी होती रही है। लेकिन अब जो भाजपा सहित कांग्रेस ओर अन्य राजनैतिक दलों द्वारा जो वायदे किये जा रहे है देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए पूरे हो पायेगे लगता नही है।
कुछ लोगो का मानना है की अगर राजनैतिक पाटियों ने वादे पूरे नही किये तो उनकी बहुत फर्जीहत होगी तो मेरा मानना है की राजनैतिक नेताओ की वर्तमान समय में जो स्थिति है उसको देखकर यह स्पष्ट कहा जा सकता है की उन्हे इस बात से कोई परेशानी उत्पन्न नही होगी क्योकि ज्यादातर इसके आदि से हो गये लगते है।
मगर मेरा मानना है की जो वायदे पूरे नही कर सकते जनता से उन्हे करने की नेताओ को जरूरत क्या है अगर सभी यह तय कर ले की जितना कर सकते है उतनी ही बात की जायेगी तो शायद मतदाता भी ज्यादा की उम्मीद नही करेगा। रही बात वोट देने की तो वो उसे किसी ना किसी को देनी ही है तो सभी नेता ओर दल अपनी ऐसी स्थिति बनाये की वोटर उन्हे आगे बढ़कर बिना किसी स्वार्थ के वोट दे ऐसे में झूठे वायदों से तो बचा ही जा सकता है।
राजनीति में भी स्वच्छता आयेगी और जब हम पूरे देश को स्वच्छ करने चले है तो फिर राजनीति में स्वच्छता लाने में पीछे क्यो रहे? इस बात को ध्यान में रखते हुए नेता अब पूर्व में किये गये वायदो को दौहराना बंद करे।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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