सरकार दें ध्यान, कुत्ते ,बन्दरो के बाद मधुमक्खियां बन रही है जान का बवाल।

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इन के हमलो से पीड़ित कहा जाये नागरिको के समक्ष अब मधुमक्खियो के रूप एक समस्या और सुरसा के भाति मुंह बाये खड़ी है। पीछे कुुछ दिनो में पढ़ने और सुनने को मिली खबरो के अनुसार मुधमक्खियो का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। बताते चले कि फलो और मीठे पत्ते आदि के वृक्षो तथा इनके आस पास के पेड़ो पर मधुमक्खियां अपने छत्ते बना लेती है और कभी भी कई कारणो से यह उड़ने लगती है और जो भी सामने आया उस पर हमला कर देती है क्योकि जंगल हो या घर पेड़ काटने की अनुमति आसानी से मिलती नही और इनका छत्ता हटाने वाले भी आवश्यकता पड़ने पर कम ही नजर आते हैं इस कारण से आम आदमी इस जानवरो से असुरक्षित तो महसुस करने ही लगा है यह सोचकर परेशान भी है की न जाने कब इनमे से कौन हमला कर बैठे मुजफ्फरनगर के मरूकी गांव के 60 वर्षीया किसान ज्योति सिंह गत दिवस खेत में गन्ना छील रहे थे तभी मधुमक्खियो ने हमला कर दिया था और अस्पताल जातें जाते उनकी मौत हो गई यह तो है एक घटना ढुढने से ऐसे अनेको मामले मिल सकते है।
केन्द्र व प्रदेशो की सरकारो द्वारा कुछ जानवरो की सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाये गये है। तो दूसरी और धार्मिक दृष्टिकोण से भी इनके खिलाफ कोई कार्यवाही आसानी से हो पाना सम्भव नही हो पाता है। जीव जन्तुओ की सुरक्षा हो यह जरूरी हैं लंेकिन इनसे मानव रक्षा किया जाना भी अत्यत आवश्यक है इस बात को दृष्टिगत रखते हुए सरकार या तो जीव जन्तुओ से नागरिको की रक्षा के लिए एक अलग से मंत्रालय बनाए और प्रदेश के हर जिले में एक अधिकारी बैठाया जाए जो हिंसक हो रहे जानवरो से नागरिको की रक्षा के लिए नीतियां बनाकर व्यवस्था करें इसके साथ ही सरकार एक वेबसाइट तैयार करे जिसमें देशभर के सभी जिलो व महा नगरो में मधुमक्खियो के छत्ते तोड़ने वाले विशेषज्ञयो के फोन व मोबाइल पूर्व विवरण के साथ मौजूद हो जिससे आवश्यकता पड़ने पर नागरिक उन्हे बुलाकर मधुमक्खियो की समस्या से छुटकारा पा सके साथ ही बन्दरो से छुटकारे के लिए लंगूर पालको तथा कुत्ते पकड़ने वालो का भी पूर्व विवरण हो मौजूद।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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