थायराइड से निजात पाने के लिए पांच बातें जानें

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थायराइड की बीमारियां महिलाओं में अधिक पाई जाती हैं। यह बीमारी मुख्यत: तीन तरह की होती है। पहला हारमोन के कम बनने की क्षमता जिसको हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। दूसरा यदि ग्रंथि अत्यधिक हारमोन बना रही हो तो इसको हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं और तीसरा ग्रंथि के आकार में परिवर्तन होना या गांठें पड़ना है। इसे घेंघा यानि गोयटर कहते हैं। आम धारणा है कि थायराइड का पूरा इलाज संभव नहीं है लेकिन अब थायराइड के इलाज के लिए कईतरीके अपनाए जाते हैं। यह बात सहारा हास्पिटल के सीनियर कंसलटेन्ट एवं इंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जन डा. प्रतीक मेहरोत्रा ने दी।

क्या है इलाज
डा. मेहरोत्रा कहते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों में दवाइयों द्वारा हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है। सब क्लीनिकल हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों में यदि लक्षण नहीं है तो दवाइयों की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हाइपरथायरायडिज्म के मरीजों में एंटी थायरायड ड्रग्स और ज्यादा हार्मोन के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए बीटा ब्लाकर दवाइयां दी जाती हैं। ग्रेव्स या हायपरथायरायडि•म के मरीज, जो दवाइयों से नियंत्रित ना हो पा रहे हों उसमे रेडियो आयोडीन थेरेपी द्वारा हार्मोन ज्यादा बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाता है। यदि किसी मरीज को साधारण घेंघा है तो दबाव पड़ने की स्थिति में घेंघे का आपरेशन कर इलाज किया जाता है। कैंसर के घेंघों में स्टेज के अनुसार आपरेशन एवं रेडियोआयोडीन थेरेपी द्वारा थायरायड कैंसर का इलाज किया जाता है ।

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बीमारी नहीं ग्रंथि है
सहारा हास्पिटल के सीनियर कंसलटेन्ट ने कहा कि थायरायड एक बीमारी न होकर शरीर में पाई जाने वाली ग्रंथि का नाम है जो हमारे और आपके गले में सामने की ओर पाई जाती है। यह तितली के आकार की ग्रंथि थायरायड हार्मोन टी 3 एवं टी 4 बनाती है। ये हार्मोन हमारे शरीर में बहुत सारे अंगों को नियंत्रित करता है। टी.एस.एच हमारी प्यूटरी ग्रंथि से बनता है जो थायरायड हार्मोन के बनने को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क के विकास, नसों का विकास, बेसिक मेटाबॉलिक रेट को नियंत्रित करने में, प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट, फैट के मेटाबॉलि•म को नियंत्रित करने में, र्फटििलटी को नियंत्रित करने में, अंतड़ियों के काम और मांसपेशियों के काम करने में यह हारमोन सहयोग करता है।

क्या हैं लक्षण
डा. मेहरोत्रा ने बताया कि हाइपोथायरायडिज्म के अनेक लक्षण होते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में शरीर में सूजन बढ़ना, हड्डियों में दर्द होना, मासिक धर्म का अनियंत्रित होना, बालों का झड़ना, त्वचा में रुखापन होना, नींद अधिक आना, थकान महसूस होना और भूख कम लगना शामिल हैं। कई बार इसके कोई लक्षण नहीं होते हुए भी टीएसएच बढ़ा हुआ आता है। इसको सब क्लीनिकल हाइपोथायरायडिज्म कहते है। हाइपर थायरायडिज्म के लक्षण में अत्यधिक भूख लगना, हाथों पैरों में कंपन, अत्यधिक पसीना आना, वजन घटना, परेशानी या घबराहट होना, मासिक धर्म का अनियंत्रित होना और बार-बार लैट्रीन होने की समस्या होती है। हाइपरथाइरायडि•म का मुख्य कारण ग्रोव्स की बीमारी होती है। ग्रोव्स बीमारी एक ऑटोइम्यून प्रक्रिया है जिसमे थायरायड हार्मोन ज्यादा बनता है और साथ में गले में घेंघा बन जाता है। यह बीमारी आंखों पर भी असर डालती है जिसमे आंखें बाहर की ओर निकली नज़र आती है इसको ग्रेव्स ऑप्थालोपैथी कहते है।

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घेंघा होने से हो सकती तकलीफ
घेंघा गले में सामने की ओर एक सूजन की तरह उभरकर आता है । सामान्यतया घेंघे में दर्द का लक्षण नहीं होता है। घेंघा बड़ा होने पर सांस की नली पर दबाव पड़ता है और उस कारण खांसी आना या सांस उखड़ने की समस्या हो सकती है। यदि घेंघा खाने की नली पर दबाव डालता है तो खाना खाते समय खाना और पानी निगलने में तकलीफ हो सकती है। गले में आवाज़ की नस पर घेंघे के कारण दबाव पड़ने से आवाज़ में परिवर्तन या आवाज में भारीपन हो सकता है। यदि घेंघे ज्यादा बड़े हो जाए तो वह छाती के अंदर जाने की क्षमता रखते है। ऐसे घेंघे छाती में दिल और फेफड़ों पर दबाव डालते है। कैंसर के घेंघे में बहुत तेजी से गले की सूजन बढ़ जाती है।

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कौन सी जांच कराना जरूरी
हाइपोथायरायडिज्म एवं हाइपरथाइरायडि•म के मरीजों में थायराइड हार्मोन के अनियंतण्रको नापने के लिए खून जांच द्वारा थायरायड हार्मोन टी 3 टी 4 टी.एस.एच. को नापा जाता है। यह परीक्षण सुबह खाली पेट किया जाता है। बीमारी को डायग्नोस करने के लिए खून की जांच द्वारा एंटी बाडी जांच कराई जाती है। कुछ मरीजों में टीसी 99 थायरायड स्कैन करके हार्मोन के अनियंत्रित होने का कारण या ज्यादा हार्मोन बनाने वाले ग्रंथि के हिस्से को पहचाना जाता है। घेंघे के मरीजों में गले के अल्ट्रासाउंड अथवा सी.टी. स्कैन अथवा एम.आर.आई की जांच द्वारा घेंघे के आकर प्रकार का पता चल जाता है । एफएनएसी द्वारा साधारण एवं कैंसर के घेंघे को डायग्नोस किया जाता है।सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सलाहकार अनिल विक्रम सिंह ने कहा कि यदि थायरायड के लक्षणों को समय से पहचान कर बीमारी का इलाज किया जाए तो थायरायड पर नियंतण्रपाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सहाराश्री जी ने लखनऊ को ऐसा हास्पिटल दिया है जहां बेहतर चिकत्सकों की टीम के साथ बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

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