मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र: भाजपा में पीयूष गोयल के नाम पर विचार क्यो?

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चुनाव ग्राम प्रधानी का हो या लोकसभा का किसे लड़ाना है किसे टिकट देना है यह सोचना पार्टी के प्रमुख नेताओं और उस जिताना क्षेत्र के मतदाताओं का काम है तथा वो हारेगा या जितेगा यह बात मतदाता तय करते है लेकिन अब जैसे जैसे मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है वैसे वैसे वोटरों में भी यह सोच तेजी से विकसित हो रही है की उम्मीदवार जीते या हारे मगर उसके बीच क्षेत्र का भी हो जहां से वो चुनाव लड़ रहा है।
गत दिवस मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने को लेकर सबसे मजबूत उम्मीदवार के रूप में कुछ लोगो द्वारा केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल का नाम आगे बढ़ाया गया लेकिन सवाल यह उठता है की आखिर पीयूष गोयल के नाम पर चर्चा ही क्यो ना तो वो इस क्षेत्र के है और कागजी आंकड़े बाजी कुछ भी हो विभाग के अधिकारी कितने ही दावे करे लेकिन अपने वर्तमान मंत्रालय का काम भी श्री पीयूष गोयल बहुत बढ़िया तरिके से शायद नही कर पाये है पूरे देश की बात छोड़ दी जाये तो अपने जनपद में राजरानी, संगम और नौंचदी ट्रेनों की जो स्थिति बीते कुछ साल में रही उससे कोई अनभिज्ञ नही है लेकिन यह तो मै भी कह सकता हूं की इनका प्रचलन इतना अच्छा नही रहा जिसे लेकर यह कहा जा सके की रेल मंत्री का कार्यकाल सफल रहा उन्हे यहां से चुनाव लड़ाया जा सके।
अब रही बात वैश्य मतदाताओं की तो इतने बड़े हापुड़ और मेरठ लोकसभा क्षेत्र में सबसे सफल और मजबूत उम्मीदवार तो आज की तारिख में भी वर्तमान सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ही है यहां को काफी प्रतिशत मतदाताओं की निगाह मे है और अगर किसी और नाम पर चर्चा होनी है तो पूर्व विधायक श्री अमित अग्रवाल उप्र भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक विनित शारदा अग्रवाल, पार्टी के दबंग नेता जयकरण गुप्ता ओर अगर महिला को दिया जाना है तो पूजा बंसल तथा कैंट बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तौगी, पूर्व विधायक शशि मितल आदि सहित ऐसे अनेकों नाम है वैश्य बिरादरी से जिन्हे टिकट दिया जा सकता है इस क्षेत्र से जहां तक मुझे याद है आज तक कोई ब्राहमण तो शायद भाजपा से जीता नही है और अगर जैसा की सब कहते है की बिरादरी की कोई बाध्यता नही है तो उप्र भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. लक्ष्मी कांत वाजपेयी को भी टिकट देने में भी कोई बुराई नही है लेकिन पीयूष गोयल तो कही भी किसी भी मानक पर इस क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए खरे नही उतरते है।
अभी महाराष्ट्र की राजधानी सपनो की नगरी मुंबई मे एक फुटओवर ब्रिज ढ़ह गया जिसके लिए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल ने टवीट कर पीयूष गोयल का रेलमंत्री पद से इस्तीफा मांगा है तो पिछले सालों में रेल दुर्घटनाओं और लेटलतीफी की खबरे पढ़ने से शायद कोई भी पाठक वंचित नही रहा होगा।
ऐसे में देश के सबसे बड़े राजनैतिक दलो मे से एक जिसकी वर्तमान मे केन्द्र और तमाम प्रदेशों में सरकार हो उसके नेताओं को किसी भी क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति लाकर चुनाव लड़ाने की सोचना पड़े तो यह उसके स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं का अपमान ही कहा जा सकता है और यह बात सोचने पर मजबूर करता है की क्या इतने बड़े लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के पास एक भी स्थानीय नेता ऐसा नही है जिसे चुनाव लड़ाया जा सके।
और अगर इनमें से भी भाजपा हाईकमान किसे के नाम पर संतुष्ट नही है तो सरधना से दबंग विधायक संगीत सोम को भी चुनाव लड़ाया जा सकता है क्योकि मेरठ मवाना लोकसभा क्षेत्र से पूर्व में ठाकुर अमर पाल सिंह सांसद रह चुके है इसी प्रकार भाजपा को अगर कोई वैश्य उम्मीदवार नही मिलता है तो गुर्जर के रूप मे पूर्व मेयर मधु गुर्जर अथवा सुशील गुर्जर को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है क्योकि पूर्व में यहां से श्री अवतार सिंह बड़ाना सांसद रह चुके है।
अमित शाह साहब ओर महेन्द्र नाथ पांडे जी जो भी हो, उम्मीदवार स्थानीय हो तभी वर्तमान परिस्थितियो में भाजपा यह उम्मीद कर सकती है की मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार वो विजय पताका फहरा सकती है।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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