चुनाव के दौरान अब नहीं होता ,झंडे बैनर और

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सन 1951 -1952 में हुए लोकसभा के पहले चुनाव से लेकर 2000 तक चुनाव के दौरान झंडे बैनर और बिल्ले प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ताओं में होती थी खूब मारामारी जब भी कोई उम्मीदवार या पार्टियों के बड़े नेता आते थे तो सर्व प्रथम स्थानीय नेताओं द्वारा उनसे इन तीनों चीजों की कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराने के लिए मांग की जाती थी उस समय , आज की तरह कार्यकर्ता और नेता निस्वार्थ भावना से अपने दल या समर्थक नेता या उम्मीदवार का प्रचार प्रसार करते थे और उसका झण्डा बैनर घर पर अथवा बिल्ला सीने पर लगाकर घूमना शान की बात समझी जाती थी, मगर जैसे जैसे चुनाव का ट्रेंड बदला जीतने के बाद उम्मीदवार बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमते दिखाई देने लगे और उनकी चल अचल संपत्ति कुछ ही वर्षो में काफी बढ़ जाने की खबरें छपने लगी वैसे वैसे कार्यकर्ता भी समझदार हो गए और वो भी बड़े बाजुर्गों में होने वाली चर्चा अनुसार अधिकार के साथ झंडे बैनर और बिल्ले मांगने के अतरिक्त मतदाताओं को लुभाने के लिए विभिन्न तरीके की मांगे करने लगे ।जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में श्री टी एन शेषन का दौर शुरू हुआ और चुनाव सुधार की हवा चलने लगी तो खुले रूप में कुछ भी मांगे जाना और दिया जाना बंद हो गया क्योंकि जैसे ही यह पता चला की यह काम फला उम्मीदवार के समर्थन में हुआ है तो करा किसी ने भी हो खर्च उम्मीदवार के खाते में पड़ने लगा । अब 2019 का 17 वी लोकसभा के लिए चुनाव का दौर शुरू हो गया है आचार सहिता लग चुकी है। और जितना दिखाई और सुनाई दे रहा है उसके अनुसार इस चुनाव में अब झंडे बैनर और बिल्लो का प्रचलन पहले के मुकाबले 10 प्रतिशत के आस पास रह सकता है क्यूंकी अब चुनाव खर्च की सीमा तय हो गयी है सख्ती से उसका पालन कराया जाने लगा है , समर्थक भी अगर कुछ खर्च करेंगे तो वो उम्मीदवार के चुनावी खर्च में जुड़ेगा । इसलिए और कुछ हो न हो, अब न तो लोगों के घरो की दीवारें गंदी होंगी और न ही रात को उनकी नींद खराब क्यूंकी अब सब बातों का एक समय तय हो गया है उस से अलग जो भी जाएगा या तो वो चुनाव लड़ने के अयोग्य सिद्ध होगा , और अगर जीत जाता है तो निर्वाचन रद्द हो सकता है ।कहने का मतलब सिर्फ इतना है की अब चुनाव उम्मीदवार और उसके समर्थकों के लिए मेहनत का काम हो गया है, तथा इस मौके का इंतजार करने वाले झंडे बैनर और बिल्ले निर्माता काम कम हो जाने के चलते और बिजनस तलाशने लगे है ।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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