शोर-शराबे में लगातार रहने से खराब हो सकती है सुनने की क्षमता, जानें बचाव के एक्सपर्ट टिप्स

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नई दिल्ली । लगातार शोर-शराबे के बीच रहने से कान को नुकसान पहुंचता है और इंसान की सुनने की क्षमता घटने लगती है। डब्ल्यूएचओ का आंकड़ा बताता है कि दुनिया में 12 से 35 वर्ष उम्र के एक अरब से ज्यादा युवा मनोरंजन के लिए शोर के उच्च स्तरों के बीच रहते हैं, जिससे उन्हें बाद में सुनने में दिक्कत हो सकती है।

आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग एक-तिहाई लोग सुनने में अक्षम होते हैं। डब्ल्यूएचओ का एक और आंकड़ा कहता है कि दुनियाभर में लगभग 46.6 करोड़ लोगों को सुनने में कठिनाई होती है। यदि कोई उपाय नहीं किया गया तो वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर 90 करोड़ हो जाएगी। इसलिए कान के नुकसान की पहचान के लिए प्रारंभिक जांच और इलाज पर जोर दिया जाना जरूरी है।

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सुनने की क्षमता घटने के पीछे जो कारण हो सकते हैं, उनमें प्रमुख हैं। परिवार में पहले से ही इस समस्या का होना, संक्रमण, तेज शोर, दवाइयां और बढ़ती उम्र आदि। इनमें से कई कारणों से सुनने की क्षमता कम हो सकती है, जबकि टीकाकरण और शोर पर प्रतिबंध लगाकर इसे रोका जा सकता है। रूबेला, मैनिनजाइटिस और मम्प्स जैसे संक्रमणों के परिणामस्वरूप बच्चों में सुनने की क्षमता घटने की प्रवृत्ति को टीकाकरण जैसी रणनीतियों से प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

शोर से सुनने की क्षमता होती है प्रभावितहेल्थ केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल का कहना है कि समय के साथ हर दिन होने वाले शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। जोरदार शोर के बीच लगातार रहने से संवेदी तंत्रिका को नुकसान हो सकता है। 90 डीबी, जो कि लॉन में घास काटने की मशीन या मोटरसाइकिल से निकलने वाले शोर के बराबर है के संपर्क में 8 घंटे, 95 डीबी में 4 घंटे, 100 डीबी में 2 घंटे, 105 डीबी में एक घंटा और 130 डीबी में 20 मिनट ही रहने की अनुमति दी जाती है।

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उन्होंने कहा कि 110-120 डीबी पर बजने वाले संगीत में आधे घंटे से भी कम समय रहने पर कान को नुकसान पहुंच सकता है। शॉर्ट ब्लास्ट यानी 120 से 155 डीबी से अधिक शोर, जैसे कि पटाखे की आवाज से गंभीर सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस, दर्द या हाइपरकेसिस हो सकता है।

अधिकांश बम 125 डीबी से अधिक का शोर पैदा कर सकते हैं। यह अनुशंसा की जाती है कि जो लोग लगातार 85 डीबी से अधिक के शोर के बीच में रहते हैं, उन्हें मफ या प्लग के रूप में श्रवण सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि शोर व्यक्ति के शरीर को सिम्फेथेटिक मोड की ओर ले जाता है। इसलिए, हमें परिवेशीय शोर के स्तर को कम करने के लिए धीरे से बोलने का प्रयास करना चाहिए। अब देखा जा रहा है कि क्लास रूम या लेक्चर हॉल या डीजे म्यूजिक में माइक के लिए उपयोग किए जाते हैं। उपयोग किए जाएं, लेकिन वॉल्यूम कम रखें। इसके अलावा, दर्शकों से पूछें कि क्या आप मेरी आवाज सुन पा रहे हैं? पहले माइक के बिना बात करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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