लोकसभा चुनाव: जब तौलिए से मुंह ढककर वीपी सिंह से मिले थे अमिताभ बच्चन

0
26
प्रयागराज
इन दिनों देश में चुनावी माहौल है। इस बार चुनाव में फिल्मी सितारों का मेला भी देखने को मिल रहा है। एक के बाद एक फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े सितारे राजनीति में शामिल हो रहे हैं और चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। यह बात आप जानते होंगे कि हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन भी लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं और भारी अंतर से जीते भी थे। अमिताभ की लोकप्रियता उस दौर में ऐसी थी कि उनकी एक झलक देखने के लिए रैलियों में दूर-दराज से इलाकों से लोग आते थे।
हालांकि एक शख्स ऐसे भी थे जो उस दौर में न तो अमिताभ और न ही उनकी लोकप्रियता से वाकिफ थे। यह कोई और नहीं बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह थे। कहा जाता है कि अमिताभ उनसे मिलने के लिए तौलिए से मुंह ढककर जाया करते थे। वीपी सिंह पर लिखी किताब ‘मंजिल से ज्यादा सफर’ में दर्ज है कि फिल्मों से लगाव न होने के कारण ‘राजा’ अमिताभ को पहचानते भी नहीं थे। 
अरुण नेहरू ने अमिताभ को वीपी सिंह से मिलवाया था

एक बार पूर्व प्रधानमंत्री और करीबी मित्र राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ तौलिए से मुंह ढककर उनसे मिलने पहुंचे थे। अमिताभ बच्चन के साथ अरुण नेहरू भी थे। अमिताभ ने ऐसा क्यों किया, यह उन्हें नहीं मालूम लेकिन अरुण नेहरू ने ही वीपी सिंह का अमिताभ से परिचय करवाया था। यह देख अमिताभ भी असहज हो गए थे। ऐसा तब हुआ था जब अमिताभ सुपरस्टार बन चुके थे और इलाहाबाद से चुनाव लड़ने वाले थे।
नामुमकिन को मुमकिन किया
1984 में राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ इलाहाबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुए थे। उनका मुकाबला लोक दल के हेमवती नंदन बहुगुणा से था जो राजनीति के पुराने खिलाड़ी थे। 1984 में ठंड के मौसम के बावजूद चुनाव में पूरी गर्मजोशी थी। हर तरफ हेमवती बहुगुणा के नाम का डंका बज रहा था। बहुगुणा ने क्षेत्र के लिए बहुत काम किए थे।

अमिताभ की रैली में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं सभी

इसलिए यह माना जा रहा था कि, उन्हें हराना नामुमकिन है। लेकिन अमिताभ के आते ही समीकरण बदलने लगे थे। अमिताभ के इलाहाबाद पहुंचने और सभाओं के बाद तो जैसे स्थिति साफ होने लगी। अमिताभ की हर सभा में युवा और महिलाओं की भीड़ उमड़ती और उन्हें देखने के लिए लोग लालायित रहते थे।

चुनाव जीते लेकिन बाद में दे दिया था इस्तीफा

अमिताभ इस सीट से 1,87,795 मतों से जीते थे हालांकि तीन साल बाद उन्होंने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 1988 में इलाहाबाद से हुए उपचुनाव में वीपी सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री को हराया था। 1,10,751 वोटों से हराया था।
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments