महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक हैं गुर्दे की समस्याएं

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नई दिल्ली। देश के अन्य राज्यों की तुलना में पूर्वी राज्यों में रहने वाले लोगों में गुर्दा संबंधी समस्याएं अधिक पाई गई हैं और पूर्वोत्तर राज्य इस मामले में दूसरे स्थान पर हैं। मेडिकल जांच कराने वाली कंपनी एसआरएल डायग्नॉस्टिक ने गुर्दे की जांच के लिए कराए जाने वाले परीक्षण किडनी फंक्शन टेस्ट केएफटी के लिए प्राप्त 10,45,612 नमूनों की जांच के आधार पर किए गए अध्ययन में यह खुलासा किया है। एसआरएल ने 14 मार्च को विश्व किडनी दिवस के पहले यह सव्रेक्षण रिपोर्ट जारी की है।

एसआरएल के सव्रेक्षण से यह बात सामने आई है कि पूर्वी राज्यों के लोगों में गुर्दे की समस्या सबसे अधिक पाई गई है। वहां से प्राप्त नमूनों में 16 फीसदी को यह समस्या है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में केएफटी जांच कराने वालों में से 15 फीसदी लोग इस समस्या से ग्रसित हैं। सव्रेक्षण से यह भी पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरु ष के गुर्दे अधिक खराब होते है। औसतन 19 प्रतिशत पुरु ष गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा नौ फीसदी का है। ये परिणाम देश भर में किए गए ब्लड यूरिया नाइट्रोजन क्रिएटिनाइन और यूरिक एसिड स्तर की जांच के विश्लेषण से सामने आए हैं। लीवर द्वारा प्रोटीन की प्रोसेसिंग के दौरान ब्लड यूरिया नाइट्रोजन बनता है, जिसे गुर्दे शरीर से बाहर निकालते हैं। इसी तरह क्रिएटिनाइन शरीर में पेशियों के सामान्य ब्रेकडाउन से बनने वाला एक उत्पाद है।

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अगर किडनी अपना काम ठीक से न करें तो खून में इन संकेतकों का स्तर बढ़ने लगता है। इसी तरह हाल ही में हुए एक अनुसंधान से पता चला है कि सीरम यूरिक एसिड का बढ़ना भी रीनल फंक्शन की कमी को बताता है, इन संकेतकों के बढ़ने का अर्थ है कि व्यक्ति डायबिटीज और हाइपरटेंशन का शिकार हो सकता है और उसमें क्रोनिक किडनी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

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दुनिया भर मे 85 करोड़ लोग पीड़ित.

रिपोर्ट में विश्व स्वास्य संगठन के हवाले से बताया गया है कि भारत में 1990 में क्रॉनिक बीमारियों के कारण असमय मौत के शिकार होने वाले मरीजों की संख्या करीब 38 लाख थी जिसके वर्ष 2020 में बढ़कर 76.3 लाख होने का अनुमान है। क्रॉनिक किडनी बीमारी सीकेडी एक गैर संचारी रोग है जो दुनिया भर में हर 10 में से एक व्यक्ति को प्रभावित करता है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में 85 करोड़ लोग किडनी संबंधी रोगों से पीड़ित हैं। सीकेडी के कारण हर साल 24 लाख मौतें होती हैं। एक्यूट किडनी इंजरी से दुनिया भर में एक करोड़ लोग ग्रसित हैं, इनमें से 85 फीसदी मामले निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में पाए जाते हैं।

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एक अनुमान के अनुसार हर साल लगभग 17 लोगों की मृत्यु इसके कारण होती है। यही कारण है कि दुनिया भर में मार्च का दूसरा गुरुवार विश्व गुर्दा दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोगों को गुर्दा रोगों के बारे में जागरुक बनाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है ताकि जीवनशैली से जुड़ी दिक्कतों का गुर्दों पर असर कम किया जा सके।

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