कांग्रेस के राशिद अल्वी ने अमरोहा से चुनाव लड़ने से किया इनकार, अब सचिन चौधरी होंगे उम्मीदवार

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अमरोहा
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार  ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने इसके पीछे कोई खास वजह नहीं बताई जा रही है लेकिन सूत्रों के अनुसार वह टिकट मिलने पर देरी के चलते पार्टी नेतृत्व से नाराज थे। अब सचिन चौधरी को कांग्रेस ने अमरोहा सीट से उम्मीदवार बनाया है।

की कि वह अमरोहा से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। राशिद अल्वी ने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है।

12 सीटों पर होगा महामुकाबला

अमरोहा में उम्मीदवारों के नामांकन के लिए 26 मार्च आखिरी दिन है। अमरोहा में 18 अप्रैल को चुनाव होना है। इससे पहले कांग्रेस ने शनिवार रात उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट में पश्चिमी यूपी की महत्वपूर्ण सीट अमरोहा सीट से राशिद अल्वी को प्रत्याशी बनाया था। इसे कांग्रेस का बड़ा दांव माना जा रहा था क्योंकि उनके सामने एसपी-बीएसपी के गठबंधन के प्रत्याशी मैदान पर थे। दानिश अली हाल ही में जेडी (एस) से बीएसपी में शामिल हुए थे।

  

  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलालोकसभा चुनाव के लिए सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान जारी है। इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की ऐसी कई सीटें हैं जहां मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। इन तीनों ही राज्यों में 2014 चुनाव में बीजेपी ने विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था लेकिन इस बार बिहार में महागठबंधन और यूपी में एसपी-बीएसपी-आरएलडी के गठबंधन की बदौलत इन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। एक नजर इन सीटों पर-
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट-अमेठी, चुनाव- 6 मईयूं तो अमेठी कांग्रेस का गढ़ है और गठबंधन भी यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतार रहा है, फिर भी अमेठी में इस बार मुकाबला कांटे का होगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने स्मृति इरानी को यहां से टिकट दिया है। स्मृति ने 2014 में भी इसी सीट से राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें मात भी मिली थी लेकिन उसके बाद से वह अमेठी में काफी सक्रिय रही हैं। दूसरी ओर राहुल यहां से 3 बार सांसद रह चुके हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- मुजफ्फरनगर, चुनाव-11 अप्रैल
    राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) नेता अजित सिंह पहली बार मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। यह सीट जाट बाहुल्य सीट है जो कि आरएलडी का वोटबैंक भी है। वहीं बीजेपी ने यहां से मौजूदा सांसद संजीव बालियान को टिकट दिया है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 2014 में हुए चुनाव में ध्रुवीकरण और मोदी लहर में यहां से संजीव बालियान जीत गए थे लेकिन इस बार उनके सामने अजित सिंह के रूप में कड़ी चुनौती होगी। एसपी-बीएसपी गठबंधन के साथ अजित सिंह यहां से जाट, मुस्लिम और दलितों के समीकरण को लेकर अपनी जीत का ताना-बाना बुन रहे हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- बागपत, चुनाव-11 अप्रैलआरएलडी का गढ़ माने जाने वाली पश्चिमी यूपी की बागपत सीट से पहली बार जयंत चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से उनके पिता अजित सिंह को बीजेपी के सत्यपाल सिंह से 2014 में मात मिली थी। ऐसे में जयंत के सामने इस सीट पर अपने परिवार का खोया हुआ विश्वास लौटाने की चुनौती होगी। बीजेपी ने इस बार भी मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह को ही टिकट दिया है।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- अमरोहा, चुनाव-18 अप्रैल
    यूपी की अमरोहा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। यहां से मौजूदा बीजेपी सांसद कंवरसिंह तंवर को इस बार इस सीट दानिश अली से कड़ी चुनौती मिल सकती है। दानिश हाल ही में बीएसपी में शामिल हुए हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने यहां से राशिद अल्वी को टिकट दिया है। अमरोहा में 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा यहां दलित, सैनी और जाट समुदाय के लोग भी हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट-फिरोजाबाद, चुनाव- 23 अप्रैलउत्तर प्रदेश के यादव परिवार का झगड़ा इस बार लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद सीट पर और ज्यादा साफ नजर आएगा। फिरोजाबाद से इस बार एसपी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ एसपी ने राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को मैदान में उतारा है। पुराने वोटरों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच पैठ रखने वाले शिवपाल अपने भतीजे को कड़ी टक्कर देते नजर आएंगे।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- बदायूं, चुनाव-23 अप्रैलबदाऊं सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है और यहां से पिछले 6 चुनाव में पार्टी का सांसद चुना गया है। हालांकि इस बार मुलायम सिंह यादव के भतीजे और मौजूदा सांसद धर्मेंद्र यादव के लिए यहां से जीतना इतना आसान नहीं होगा। उनके खिलाफ बीजेपी ने सवर्णों और गैर-यादव वोटरों को लुभाने के लिए यूपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व एसपी नेता और इस सीट से चार बार सांसद रह चुके सलीम शेरवानी को टिकट दिया है।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- बेगूसराय, चुनाव- 29 अप्रैल
    इस बार लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगूसराय सीट पर दिलचस्प मुकाबला होने वाला है। यहां केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ सीपीआई ने जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को टिकट दिया है। यह सीट सीपीआई का मजबूत गढ़ मानी जाती है और कन्हैया को महागठबंधन का समर्थन भी मिल सकता है।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- जमुई, चुनाव- 11 अप्रैलजमुई सीट से मौजूदा सांसद चिराग पासवान को इस बार आरएलएसपी के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी से इस सीट से कड़ी टक्कर मिलेगी। भूदेव इस सीट से 2009 में जेडी (यू) के टिकट से जीत चुके हैं। इस बार वह यहां से दलितों और ओबीसी वोट बैंक के समीकरण को मजबूत करने के प्रयास में हैं तो वहीं पासवान दलितों और सवर्ण दोनों वोटरों पर नजर बनाए हुए हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- गया, चुनाव -11 अप्रैल
    बीजेपी ने एनडीए गठबंधन के तहत अपनी इस सीट को जेडी (यू) के खाते में दिया है और इस वजह से यहां से मौजूदा सांसद हरि मांझी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इस सीट से महागठबंधन के प्रत्याशी और पूर्व सीएम जीतनराम मांझी के सामने जेडी (यू) से विजय मांझी होंगे। पिछले चुनाव में इस सीट पर जेडी (यू) के टिकट से चुनाव लड़ने के बाद जीतनराम तीसरे नंबर पर आए थे। इस बार मांझी अपनी पार्टी (HAM) से चुनाव लड़ रहे हैं और मजबूत दावेदार हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- पूर्णिया, चुनाव- 18 अप्रैलपूर्णिया उन दो सीटों में से एक है जहां से 2014 में जेडी (यू) ने मोदी लहर के बावजूद जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार समीकरण बदले हुए हैं। 2014 में इस सीट से बीएसपी के टिकट से लड़ने वाले उदय सिंह इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उदय इस सीट से बीजेपी के प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट- गढ़वाल, चुनाव- 11 अप्रैल
    उत्तराखंड की गढ़वाल सीट में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए बीजेपी सांसद और पूर्व सीएम बीसी खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को पार्टी ने यहां से उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने बीजेपी ने खंडूरी के शिष्य माने जाने वाले तीरथ सिंह रावत को उतारा है। बीसी खंडूरी इस सीट से 5 बार सांसद रह चुके हैं और इस बार उनके बेटे इस सीट से लड़ाई को नया आयाम दे रहे हैं। दोनों ही उम्मीदवारों का दावा है कि उन्हें बीसी खंडूरी का आशीर्वाद मिला हुआ है।
  • 12 सीटों पर होगा महामुकाबलासीट-नैनीताल, चुनाव- 11 अप्रैल
    बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में नैनीताल की 14 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस लिहाज से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के लिए यहां से लड़ाई उतनी कठिन नहीं है लेकिन कांग्रेस के यहां से हरीश रावत को टिकट देने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। हरीश रावत राजपूत वोटरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। इस सीट से मौजूदा सांसद बीएस कोश्यारी को टिकट न देने से बीजेपी से नाराज भी हैं।
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बीएसपी ने दानिश अल्वी को बनाया उम्मीदवार

अमरोहा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार और मौजूदा सांसद कंवरसिंह तंवर और दानिश अली के बीच ही सीधी टक्कर बताई जा रही थी। अमरोहा में 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा यहां दलित, सैनी और जाट समुदाय के लोग भी हैं। राशिद अल्वी इस सीट से 1999 के चुनाव में बीएसपी के टिकट से चुनाव जीतकर सांसद रह चुके हैं। उन्होंने तब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बीजेपी उम्मीदवार चेतन चौहान को हराया था।

कांग्रेस की देरी बनी राशिद अल्वी की नाराजगी?

बाद में मायावती पर रिश्वत लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाने के बाद उन्हें बीएसपी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और दो बार राज्यसभा सांसद चुने गए। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं। इस बार उनके भी इसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी थी लेकिन बताया जा रहा है कि कांग्रेस की एक के बाद एक लिस्ट में भी उनका नाम न होने से वह नाराज थे।

एक के बाद एक कांग्रेस नेता नाराज

इन दिनों यूपी कांग्रेस के बड़े नेताओं की नाराजगी की खबर सुर्खियों में है। इससे पहले पूर्व केंद्री मंत्री जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की खबर आई थी। भले ही जितिन प्रसाद ने बाद में इससे इनकार कर दिया हो लेकिन दबी आवाज में बताया जा रहा है कि जितिन प्रसाद इस बार अपनी परंपरागत सीट धौरहरा से चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। अब चर्चा है कि वह लखनऊ लोकसभा सीट से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ उतर सकते हैं।

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