1965 और 71 में भी चटटान की तरह डटे रहे सीमा पर बसे गांवों में भारतीय ,हमारी सेना और सरकार समय अनुसार निर्णय लेने और हमलों का जवाब देने में है सक्षम

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हमारे जवान है तैयार सोशल मीडिया का सोच समझकर करे उपयोग

14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के शहीद हुए जवानों को नमन करने और श्रद्धांजलि देने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो आज भी जारी है। लेकिन दूसरी तरफ इस हमले के लिये दोषी आतंकवादियों ओर उन्हे संरक्षण देने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिकों के मन में तो नफरत का उबाल हेै ही ज्यादातर देश भी इस मामले में आतंकवाद खत्म करने पर सहमत है इसलिये भारत के साथ उनका विचारणीय समर्थन प्राप्त है तो कुछ देश खुलकर हमारे साथ नजर आ रहे हैं। बीते मंगलवार को पुलवामा घटना के विरूद्ध वायु सेना द्वारा जो सहासी और वीरतापूर्व कारनामे को अंजाम दिया गया उसके लिये सारा देश और विपक्षी लीडर सेना के साथ खड़े नजर आए। और इस मामलेमें सरकार के निर्णय का समर्थन भी हर स्तर पर किया जा रहा है। बीते बुधवार को जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय चैकियों पर खबरों के अनुसार पाकिस्तानी सेना द्वारा जबरदस्त गोलाबारी की गई जिसका पहले से सतर्क हमारी सेना और उसके जवानों ने मुंहतोड जवाब दिया।और पाकिस्तान का लड़ाकू विमान ढेर किया तो हमारा भी मिग 21 विमान धराशाही हुआ लेकिन चीन के वुझेन में चल रही रूस भारत चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद खत्म करने के लिये नीतिगत तालमेल पर सहमति बनी। लेकिन अतंराष्ट्रीय मंच पर पाक अलग थलग पड़ता नजर आया।
श्री नगर स्थित काॅप्र्स बैटल स्कूल के फाउंडर कमांडर रहे रिटायर्ड कर्नल सतीश त्यागी के यह विचार अत्यंत महत्वूर्ण है कि पाकिस्तान कभी भी स्लीपिंग माडल्यूस से भारत के भीड़ भाड वाले इलाको में वारदात कराकर असंतोष और अफरा तफरी की स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिये सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना होगा। इसलिये किसी भी तरह की लारवाही मेरी निगाह में हमारे लिये इस समय सही नहीं रहेगी।
नई दिल्ली में 21 विपक्षी दलों की बैइक में यह निर्णय लिया गया कि सत्ता पक्ष जवानों की शहादत पर राजनीति न करे। भारत की प्रभु सत्ता और एकता की रक्षा के लिये उठाए जाने वाले हर कदम पर राष्ट्र को विश्वास में लिया जाए इस मामले में मेरा मानना है कि विपक्षी दलों को थोड़ा सा संयम जरूर बरतना चाहिये क्योंकि किसी भी स्तर पर अगर बीते मंगलवार 26 फरवरी को जो जवाब दिया गया उसका ज्यादा ढिंढोरा पीटा जाना किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता। हां इस घटना के बाद केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और मंत्रियों को सभी राजनीतिक दलों से अपनी योजना और विचार साजा करने में कोई हर्ज नहीं हैं।
कुछ लोग कह रहे हैं कि सोशल मीडिया पर पाक से जो दावे किये जा रहे हैं उससे हमारे मन मस्तिक पर गलत असर पड सकता है। इस बारे में तो मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि हम भारतीयों में विश्वास और आस्था कुट कुट कर भरी है। आवश्यकता पडने पर जिस क्षेत्र में भी हम सक्रिय है वहां खुद और हमारी सेना के वीर जवान चाहे वो आर्मी के हो या अर्द्धसैनिक सब देश की रक्षा सुरक्षा ओर अखंडता के लिये कुछ भी करने में पीछे नहीं है।
और रही बात नागरिकों की तो 1965 और 71 के युद्ध में पाकिस्तान के हमलों से अटारी बाॅर्डर के आसपास स्थित 35 गांवों के रहने वाले भारतीय नहीं डरे और अपनी जगह पर अटल बने रहे। यह हमारे भाईयों के साहस और जीवटता का खुला उदाहरण है। हम और हमारे भाई न तो ढिगने वाले और न पीछे हटने वाले।
बडी उम्र के लोगों को याद होगा कि जब बराबर के देश बंगालदेश पर हमला हुआ तो भारतीय सेना ने हमलावर देश ओर उसके सहयोगियों को मुंहतोड जवाब देकर उनके चक्के छुड़ाए थे। परिणाम स्वरूप बांग्लादेश अस्तिव में आया और उस समय देश में प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी केंद्र की सत्ता संभाले हुए थी लेकिन विपक्ष के सबसे बडे नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा उन्हे दुर्गा कहकर उनकी सराहना और सम्मान किया गया था जो इस बात का प्रतीक है कि जब भी राष्ट्रहित की बात होगी तब देश का हर नागरिक आज भी उसी प्रकार से एक सुर में बोलने और एकजुट होकर काम करने के लिये कटिबद्ध नजर आता है।
न तो हमारा देश और सेना तथा यहां के नागरिक किसी से कमजोर है ओर न ही कभी रहे। हमारे यहां हर मुश्किल घडी में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाइ हम भारतीय हैं सब भाई भाई का नारा जो आज से कुछ दशक पूर्व लगता था आज भी उसी प्रकार से एकता बनी हुई है भले ही कुछ मुददो और समाजिक विषयों को लेकर हमे कुछ वैचारिक मदभेद क्यों न हो।
कहने का आशय सिर्फ इतना है कि जहां देश का बच्चा बच्चा सोशल मीडिया के माध्यम से पुलवामा के शहीदों को को अपनी श्रद्धांजलि दे रहा है तो वहीं देश की सरकार और माननीय पीएम मोदी तथा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित सेना के अधिकारियों और उनके प्रयासों तथा वायु सेना की खुलकर प्रशंसा की जा रही है और घर घर में सोशल मीडिया के माध्यम से हम अपने नेतृत्वकर्ताओं ओर रक्षा करने वालों को बधाई ओर शुभकामनाएं देते हुए हर घडी में उनके साथ रहने का विश्वास दिला रहे है तो दूसरी ओर आतंकवादियों के चेहतो के द्वारा सोशल मीडिया का खुला दुरूपयोग कर गलत प्रचार के माध्यम से हमारा मनोबल तोडने की कोशिश भरपूर तरीके से हो रही है और आगे भी यह और भी बढ़ सकती है। हमे इस दुष्प्रचार से बचते हुए स्वयं भी सोशल मीडिया पर मैसेज टवीट् व्हाट्सैप कोई भी माध्यम क्यों न हों उस पर सक्रियता दिखाने के साथ साथ थोड़ी चैकस रहना और ध्यान देना चाहिये ।हमारी किसी भी पोस्ट अथवा विचार से सेना और सरकार को किसी भी प्रकार की असहजता महसूस न हो इसलिये सोशल मीडिया मंच का उपयोग हम अपनी राष्ट्रीय एकता सेना के जवानों का उत्साह ओर साहस बनाने तथा नागरिकों को एकजुट रखने और वर्तमान समय में सरकार को स्वंतत्र रूप से निर्णय लेने के लिये सोचसमझकर सोशल मीडिया का उपयोग करने की आवश्यकता है हमे थोड़ी सी एहतियात बरतनी है सरकार को निर्णय लेने हैं ओर सेना को हर घटना का मुंहतोड़ जवाब देना है सेना और सरकार अपना काम पूर्ण जिम्मेदारी से कर रही है तो हम भी आओ पीछे क्यो रहे अपनी जिम्मेदारी निभाने मे।पूरी जिम्मेदारी से सोशल मीडिया का उपयोग करने का ले निर्णय ।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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