माफियाओं नौकरशाहों व सफेदपोश अपराधियों को तोड़ना होगा गठबंधन -अकाल मौतों को रोकने के लिये होने चाहिये ईमानदार प्रयास ,ऐसे प्रकरणों के दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई उसका भी हो प्रचार?

10
loading...

आखिर कब तक जहरीली शराब पीकर लोग मरते और मुआवजे बंटते रहेंगे

झबरेड़ा थाने के बालूपुर गांव में नानू नाम के व्यक्ति की तेहरवी की रस्म में शामिल होने हेतु उत्तराखंड व यूपी के आसपास के गांवों के कच्ची शराब पीकर मरने वालों की संख्या लगभग पांच दर्जन के आसपास घायलों की 70 आर 80 के बीच बताई जा रही है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कुशीनगर व सहारनपुर शराब कांड पर नाराजगी जताते हुए मृतकों के आश्रितों को मुआवजा दो दो लाख ओर अन्य इलाज करा रहे लोगों को 50 50 हजार रूपये देने का ऐलान किया गया है। तो काफी संख्या में आबकारी विभाग और पुलिस के अफसरों को निलंबित भी किया गया है। तथा यूपी के मुख्य सचिव अनूपचंद पांडे का कहना है कि दोषियों को मृत्युदंड दिलाने की कार्रवाई करायी जाएगी। कच्ची और जहरीली शराब पीकर मरने वालों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी ऐसी खबरें पढ़ने देखने और सुनने को मिलती ही रहती हैं। जब कोई ऐसा प्रकरण हो जाता है तो सरकार शासन और प्रशासन के बड़े अधिकारी सघन अभियान चलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करते हैं और कुछ स्थानों पर छापामारी भी होती है। और फिर मामला कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। शायद यही कारण है कि लोग मरते रहते हैं लेकिन जहरीली और कच्ची शराब की बिक्री बंद होने के स्थान पर कम या ज्यादा चलती ही रहती है। मेरठ जोन के एडीजी श्री प्रशांत कुमार का कहना है कि अवैध शराब को लेकर पूरे जोन में अलर्ट घोषित किया गया हैं सभी पुलिस अधीक्षकों को अवैध शराब के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। तो सहारनपुर और हरिद्वार के आसपास के जिलों सहित प्रदेशभर में पुलिस और आबकारी विभाग छापामार कार्रवाई कर रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इससे होगा क्या?
सहारनपुर मंडल मेरठ तथा हरिद्वार और देहरादून के अस्पतालों में बीमार तड़प रहे हैं। और उनके परिजन बिलख रहे हैं। अफसरों का जो काम है। बयानबाजी करना और कार्रवाई का आश्वासन वो बादस्तूर जारी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेेंद्र सिंह रावत द्वारा प्रथम दृष्टि दोषी पाए गए अपने अपने प्रदेशांे के पुलिस और आबकारी के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। दूसरी तरफ दोबारा से अभियान चलाकर अवैध शराब बनाने और बिकने के अड्डो और इन्हे बेचने वालों के विरूद्ध कार्रवाई किये जाने की बात चारो ओर से सुनाई दे रही है। लेकिन यह भी अटल सत्य है कि यह काम बिना आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के होना संभव नहीं है।
पिछले दिनों एक व्हाटसएप गु्रप पर वायरल हुई अवैध शराब विक्रेता थानेदार की बाते के बारे मंे शराब माफिया के यह बोल सुनाई दिये थे कि चैकी इंचार्ज से बात हो गई है। अब काम शुरू हो जाएगा। लेकिन अभी एक दो दिन और लगेंगे।
पिछले कई दशक से सुनाई व दिखाई दे रहा है कि जो भी सरकारे होती हैं वो कार्रवाई के दावे करती हैं। और विरोधी दल इन बातों को लेकर तंज कसते रहते हैं लेकिन सही बात यह है कि सरकार किसी की भी अधिकारी कोई भी हो जानकारों द्वारा मौखिक रूप से बताए जाता है कि यह धंधा हमेशा चलता है क्योंकि कुछ अफसरों और अन्य लोगों के बैंक बैलेंस इसी के दम पर बढ़ते हैं। और कुछ की राजनीति भी इसी नाम पर चलना बताई जाती है। कुछ जिलों में टीमे गठित कर दी गई हैं। जो छापे मारेगी लेकिन इसका स्थायी समाधान कैसे होगा और कौन करेगा यह बात विशेष रूप से सोचने की है।
मेरी निगाह में अगर वाकई में हमारी सरकार चाहती है कि जहरीली शराब से आगे किसी मां का लाल उससे न बिछड़े और किसी परिवार का कमाने वाला अपनों से दूर न हों तो जिस क्षेत्र में नकली ओर जहरीली अवैध शराब मिलें। उस क्षेत्र के थानेदार और आबकारी अधिकारी की नौकरी समाप्त कर उसे जेल भेजा जाए और उस पर मुकदमा चलाया जाए। तो शायद अपनी ओर अपने परिवार की स्थिति को ध्यान में रखकर इसमे लिप्त लोग इससे तौबा कर सकते हैं। वरना स्थिति तो यह हो गई है कि अगर सूत्रों का कथन सही है तो अब कुछ होटलों, ढाबो में भी कच्ची व अवैध शराब परोसी जाती है तो कई जगह इसकी बिक्री रोकने के लिये बताते हैं कि इसमे कुछ जिम्मेदार लोग ही शामिल हैं।
अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो जांच का विषय हैं कई बार ऐसी खबरे सुनने को मिली हैं शराब तस्कर इसकी बिक्री और उसके स्थान पर पहुंचाने के लिये छोटे बच्चों का भी उपयोग करते हैं। और कई का तो मौखिक रूप से यह भी कहना है कि इस धंधे में उन्हे शामिल करने हेतु धीरे धीरे उन्हे इसकी लत डलवाई जाती है। जिससे वो इसके चक्कर में पड़कर शराब माफियाओं की आमदनी और सप्लाई समय से चिंहित स्थान तक पहुंचाने का माध्यम बने रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात कुल मिलाकर यह है कि इससे संबंध सभी लोगों को चाहे वो अफसर हो या नेता। मिलकर ईमानदार प्रयास लालच छोड़कर करने होंगे। वरना दुख संवेदनाएं व्यक्त करने और मुआवजा देने का सिलसिला चलता रहेगा और साथ में ऐसे प्रकरणों में लोग मारे जाते रहेंगे।
मेरा मानना है कि चाहे कच्ची और जहरीली शराब का मामला हो या और ऐसे ही अपराधिक किस्से अथवा मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री हो या नकली दवाईयांें का व्यापार ऐसे हर मामले में पकड़े गए लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई उसका प्रचार सरकार को युद्ध स्तर पर करना चाहिये और मीडिया को भी ढूंढ कर ऐसे मामले प्रकाशित करने चाहिये जिससे अन्यों को ऐसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने से पहले यह अहसास जरूर हो जाए कि इसके क्या क्या घातक परिणाम हो सकते हैं? आम आदमी कि जान माल के नुकसान का कारण बन रही घटनाओं को रोकने और इनसे सरकार को होने वाली हानि की सम्भावनाओं को समाप्त करनें हेतु माफियाओं कुछ नौकरशाहओं एव सफेदपोश अपराधियों के बीच कहे अनकहें रूप सें चल रहे गठबंधन का तोड़ना होगा।

इसे भी पढ़िए :  अवतार सिंह भड़ाना ने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के साथ ही विधायक पद से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में शामिल होकर मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट से क्या लड़ेंगे चुनाव

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

7 − four =